जाने-माने क्रिकेटर और तेज-तर्रार नेता नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ 1988 के रोडरेज मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को अहम सुनवाई करेगा. इस बीच आजतक के हाथ सिद्धू के केस की पूरी फाइल और इनवेस्टिगेशन रिपोर्ट लगी है, जिसके मुताबिक सिद्धू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
केस की फाइल के मुताबिक, सिद्धू अपने ही जवाबों के जाल में फंसते नजर आ रहे हैं. सिद्धू ने क्रॉस क्वेश्चनिंग के दौरान करीब-करीब हर सवाल का जवाब गलत दिया है या यह कहकर बचते नजर आए हैं कि उन्हें कुछ नहीं पता. केस फाइल के मुताबिक, क्रॉस क्वेश्चनिंग के दौरान सिद्धू ने पूछे गए 34 सवालों में से 32 के जवाब इसी तरह दिए.
सिद्धू के इकबालिया बयान में विरोधभास
इसके अलावा सिद्धू ने जो इकबालिया बयान दिए हैं, उनमें भी काफी विरोधाभास है. एक सवाल में सिद्धू का जवाब है कि घटना के वक्त वह अपने ऑफिस में थे और उन्होंने सामने देखा कि एक ट्रक ड्राइवर और स्कूटर वाला आपस में लड़ रहे हैं.
बहुत जोर का शोर उन्होंने सुना और जब वह स्पॉट पर गए तो वहां पर 60 वर्ष की उम्र का एक व्यक्ति सड़क पर पड़ा हुआ है, जिसे हार्ट अटैक हुआ था. वहीं सिद्धू ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा है कि वह स्पॉट पर थे ही नहीं.
हार्ट अटैक से नहीं, सिर पर लगी चोट से हुई मौत
सिद्धू का जहां कहना है कि वृद्ध व्यक्ति हार्ट अटैक के चलते पड़ा हुआ था, वहीं फॉरेंसिक जांच में वृद्ध की मौत की वजह सिर पर गंभीर चोट और हार्ट फेल दोनों को बताया गया है. फोरेंसिक जांच में कहा गया है कि मृतक गुरनाम सिंह के सिर पर जो चोट थी, वह इतनी गहरी थी कि जान लेने के लिए काफी थी.
पटियाला के मेडिकल ऑफिसर जितेंद्र कुमार के मुताबिक वह भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि गुरनाम सिंह की मौत की वजह उनके सिर पर गंभीर चोट थी. इसके अलावा हार्ट का फेल होना भी मौत की वजह रही, लेकिन ऐसा लगता है कि गुरनाम सिंह के सिर पर जो गंभीर चोट आई वहीं उनकी मौत की प्रमुख वजह बनी.
एक अन्य मेडिकल ऑफिसर जितेंद्र कुमार के मुताबिक ऐसे लक्षण ना के बराबर मिले हैं, जिससे इस बात की पुष्टि होती हो कि गुरनाम सिंह की मौत की वजह हार्ट फेल या कार्डिएक अरेस्ट रही हो.
मृतक के बेटे ने लगाए गंभीर आरोप
इस बीच अब तक मीडिया से दूर रहे मृतक गुरनाम सिंह के बेटे नरविदेंदर सिंह ने एक ई-मेल जारी कर नवजोत सिंह सिद्धू को आड़े हाथों लिया है. अपने ईमेल में मृतक के बेटे ने आरोप लगाया है कि ऐसा लगता है कि इस मामले में दोषियों को अपनी बात रखने और मीडिया में खुद को महिमामंडित करने का अवसर दिया गया है.
हमारा परिवार एक पैसे वाले पॉवरफुल व्यक्ति के साथ लड़ रहा है. सिस्टम ने हमेशा ही हमारे जख्मों पर नमक रगड़ा है और नवजोत सिंह सिद्धू हर सरकार में किसी न किसी बड़ी राजनीतिक पोजीशन पर रहा और आजाद घूमता रहा. ये सब देख कर मेरी बूढ़ी बीमार मां काफी आहत हुई हैं.
मृतक के बेटे ने यहां तक कहा कि कई बार उन्हें लगा कि उन्हें इंसाफ कभी नहीं मिल पाएगा, इसके बावजूद उन्होंने देश की न्यायिक प्रक्रिया में पूरा भरोसा रखा. उन्होंने मीडिया से भी अपील की है कि इस केस को राजनीतिक रंग न दिया जाए. साथ ही उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मदद की गुहार लगाई है.