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बदहवास मां...बेहाल पिता...सवाल एक- कहीं मोहरा तो नहीं बनाया गया कंडक्टर?

प्रद्युम्न हमेशा के लिए चला गया. मां बदहवास है. पिता बेहाल है. कंडक्टर पर कत्ल का इल्जाम है. लेकिन परिवार अभी भी ये मानने को तैयार नहीं. पिता सीबीआई जांच से कम पर तैयार नहीं हैं, लेकिन हरियाणा सरकार ने भी साफ कर दिया है कि इस मामले की जांच अभी पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ही करेगी.

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प्रद्युम्न केस में सीबीआई जांच की मांग
प्रद्युम्न केस में सीबीआई जांच की मांग

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प्रद्युम्न हमेशा के लिए चला गया. मां बदहवास है. पिता बेहाल है. कंडक्टर पर कत्ल का इल्जाम है. लेकिन परिवार अभी भी ये मानने को तैयार नहीं. पिता सीबीआई जांच से कम पर तैयार नहीं हैं, लेकिन हरियाणा सरकार ने भी साफ कर दिया है कि इस मामले की जांच अभी पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ही करेगी.

एक था प्रद्युम्न. था इसलिए क्योंकि अब उसकी याद ही गुड़गांव के ठाकुर परिवार के जीने का जरिया बनेगा. आज प्रद्युम्न की मां अपने लाडले के आने की आस देख रही है. आज प्रद्युम्न का पिता उस पल को याद रहा है जब बेटे ने स्कूल जाते वक्त आखिरी बार बाय बाय पापा बोला था. आज प्रद्युम्न का कमरा खाली है.

आज प्रद्युम्न का बस्ता दीवार पर यूं ही टंगा है. आज तस्वीरों से प्यारा प्रद्युम्न झांक रहा है. आज प्रद्युम्न की बहन अपने भाई को खोज रही है. मां बेहोशी से जागकर बार बार दरवाजे की ओर देखकर यही पूछती है, 'हमर बेटा प्रद्युम्न आइब गैले की (मेरा बेटा प्रद्युम्न आ गया क्या)' आज प्रद्युम्न को याद कर पूरे देश की आंखे नम है.

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प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर को भरोसा नहीं हो रहा है कि उसके बेटे को स्कूल बस के कंडक्टर ने मारा है. उनका अभी भी यही कहना है कि इसके पीछे के असल गुनहगार कोई और है. कंडक्टर अशोक को तो सिर्फ एक मोहरा बनाया गया है. क्या प्रद्युम्न का कातिल कोई और है? अब सवाल इसे लेकर उठने लगे हैं.

पहले मां ने पूछा. आज पिता भी पूछ रहे हैं. पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं. अब सीबीआई जांच से ही प्रद्युम्न को इंसाफ की उम्मीद है. इस मामले में दूसरा पेंच भी आ गया है. इस केस में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने स्कूल की 3 महिला टीचरों को जांच और पूछताछ के लिए बुलाया है. सवाल उठता है कि क्या मर्डर में किसी दूसरे का हाथ है?

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