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समझौता ब्लास्ट केस: क्या हुआ था उस दिन जिसमें मारे गए थे 43 पाकिस्तानी

समझौता ब्लास्ट केस में पंचकूला की स्पेशल एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया है.

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समझौता ब्लास्ट केस में सभी आरोपी बरी(फाइल फोटो)
समझौता ब्लास्ट केस में सभी आरोपी बरी(फाइल फोटो)

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समझौता ब्लास्ट केस में पंचकूला की स्पेशल एनआईए(राष्ट्रीय जांच एजेंसी) कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने असीमानंद समेत सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया है. स्पेशल एनआईए कोर्ट ने असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी को बरी किया है. बता दें कि 18 फरवरी 2007 को हुए समझौता एक्सप्रेस धमाके में 68 लोगों की जान गई थी. मरने वाले में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे. धमाके के ढाई साल बाद केस को एनआईए को सौंप दिया गया था.  

18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत में समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में IED ब्लास्ट किया गया था. हादसे में 43 पाकिस्तानी, 10 भारतीय नागरिक और 15 अन्य लोग मारे गए थे. मारे गए कुल 68 में से 64 आम लोग थे, जबकि 4 रेलवे के अधिकारी थे.

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ब्लास्ट के बाद कई अन्य कोच में आग लग गई थी. शुरुआत में हरियाणा पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन जुलाई 2010 को जांच एनआईए को सौंप दिया गया. समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में पहली चार्जशीट 2011 में फाइल की गई. इसके बाद 2012 और 2013 में भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गई.

ट्रेन रात के 10.50 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी. इसमें 16 कोच थे. ब्लास्ट 2 अनारक्षित कोच में किया गया था. 4 आईईडी प्लांट किए गए थे, जिनमें 2 ब्लास्ट हुए और 2 को बाद में बरामद किया गया. केस में आठ लोग आरोपी थे, लेकिन चार लोगों ने ही ट्रायल का सामना किया. केस में स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया गया था जिन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 2015 में जमानत दे दी थी.

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