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पत्रकार हत्याकांड: शहाबुद्दीन का हो सकता है लाई डिटेक्टर टेस्ट, CBI हेटक्वार्टर में पूछताछ जारी

सिवान के पत्रकार राजदेव रंजन चर्चित हत्याकांड में आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन से सीबीआई मुख्यालय में पूछताछ की जा रही है. बताया जा रहा है कि शहाबुद्दीन का लाई डिटेक्टर टेस्ट हो सकता है. मुजफ्फरपुर की एक अदालत ने शहाबुद्दीन को 8 दिनों की सीबीआई रिमांड लेने का आदेश दिया था. सीबीआई 10 दिन के लिए रिमांड पर लेने की मांग की थी.

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आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन
आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन

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सिवान के पत्रकार राजदेव रंजन चर्चित हत्याकांड में आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन से सीबीआई मुख्यालय में पूछताछ की जा रही है. बताया जा रहा है कि शहाबुद्दीन का लाई डिटेक्टर टेस्ट हो सकता है. मुजफ्फरपुर की एक अदालत ने शहाबुद्दीन को 8 दिनों की सीबीआई रिमांड लेने का आदेश दिया था. सीबीआई 10 दिन के लिए रिमांड पर लेने की मांग की थी.

सीबीआई की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जेल में बंद आरजेड़ी के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन को 10वां अभियुक्त बनाया था. बिहार के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन इस वक्त दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. उनको तिहाड़ जेल से सीबीआई मुख्यालय में ले जाकर पूछताछ की जा रही है. बिहार पुलिस 6 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है.

मुजफ्फरपुर में सीबीआई के वकील शरद सिन्हा ने कहा कि पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड से संबंधित एफआईआर आरसी/एस/2016 में साथ ही एक अन्य अभियुक्त के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई है. इस मामले में दो अभियुक्त मो. जावेद और मो. कैफ जमानत पर बाहर हैं. जबकि अब अदालत ने पूर्व सांसद डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन को दसवां अभियुक्त बनाया है.

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कौन है मोहम्मद शहाबुद्दीन
मोहम्मद शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई 1967 को सीवान जिले के प्रतापपुर में हुआ था. उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बिहार से ही पूरी की थी. राजनीति में एमए और पीएचडी करने वाले शहाबुद्दीन ने हिना शहाब से शादी की थी. उनका एक बेटा और दो बेटी हैं. शहाबुद्दीन ने कॉलेज से ही अपराध और राजनीति की दुनिया में कदम रखा था.

जुर्म की दुनिया में पहला कदम
किसी फिल्मी किरदार से दिखने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन की कहानी भी फिल्मी सी लगती है. उन्होंने कुछ ही वर्षों में अपराध और राजनीति में काफी नाम कमाया. अस्सी के दशक में शहाबुद्दीन का नाम पहली बार आपराधिक मामले में सामने आया था. 1986 में उनके खिलाफ पहला आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ था. इसके बाद मुकदमों की फेहरिस्त लंबी होती गई.

 

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