दिल्ली की एक कोर्ट ने शुक्रवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की सुनंदा पुष्कर की मौत मामले में दायर याचिका खारिज कर दी है. सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में साक्ष्यों से कथित रूप से छेड़छाड़ पर विजिलेंस रिपोर्ट रिकार्ड में लेने के लिए पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.
स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने स्वामी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है. पूर्व केन्द्रीय मंत्री थरूर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला से क्रूरता) और 306 (खुदकुशी के लिए उकसाना) के तहत आरोप लगे हैं.
अपने आदेश में जज ने कहा, ‘न तो आवेदक का इस मामले से कोई संबंध है और ना ही यह अदालत इस मामले में आगे की जांच के लिए कोई निर्देश दे सकती है क्योंकि संज्ञान पहले ही लिया जा चुका है और आरोपी को सुनवाई का सामना करने के लिए तलब किया जा चुका है.’ सुनंदा 17 जनवरी 2014 की रात को शहर के एक होटल के कमरे में मृत मिली थीं.
बता दें कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर को खुदकुशी करने के लिए लिए उकसाने और उनका मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप है. 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के पांच सितारा होटल में शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी. मौत से एक दिन पहले कथित तौर पर सुनंदा पुष्कर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच ट्विटर पर बहस हुई थी. वहीं इससे कुछ ही दिन पहले उन्होंने थरूर पर पाकिस्तानी पत्रकार के साथ अंतरंग संबंध होने के आरोप लगाए थे.
मामले में पिछले साल दिल्ली पुलिस की तरफ से शशि थरूर को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में 3000 पन्नों की लंबी चार्जशीट दाखिल की गई. पुलिस ने 14 मई 2018 को थरूर के खिलाफ पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने और क्रूरता से संबंधित भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत चार्जशीट दायर की. वहीं दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने चार्जशीट के आधार पर थरूर को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी माना है.