नागपुर की एक सत्र अदालत ने बीते साल एक सितंबर को आठ वर्षीय बच्चे को अगवा करने और उसकी हत्या के मामले में दो छात्रों को फांसी की सजा सुनाई है. सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश किशोर के. सोनावाने ने राजेश डी.दावड़े (19) और अरविंद ए.सिंह (23) को दोषी ठहराया था.
जानकारी के मुताबिक, दोनों शहर के पीडब्ल्यूएस कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स में बी.कॉम के छात्र हैं, जिन्हें अपहरण करने और नृशंसता से स्कूली छात्र की हत्या करने के मामले में आरोपित किया गया था. उन्होंने बच्चे के शरीर पर लगभग 26 वार किए थे. शहर से दूर शव बरामद किया गया था.
पीड़ित के पिता डॉक्टर मुकेश चांडक ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह समाज को कड़ा संदेश देने का काम करेगा. उन्होंने कहा, 'हम फैसले का स्वागत करते हैं. इस बात से संतुष्ट हैं कि न्याय हुआ. हमारा बच्चा अब वापस लौटकर नहीं आएगा, लेकिन इससे भविष्य में ऐसे अपराध रुकेंगे.'
प्रधान न्यायाधीश सोनावाने ने बुधवार को दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 364A (फिरौती के लिए अपहरण), 120B (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत दोषी पाया और सजा पर फैसला गुरुवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया.
बचाव पक्ष के वकीलों प्रदीप अग्रवाल और मनमोहन उपाध्याय द्वारा दोषियों को आजीवन कारावास देने की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि भले ही यह पहला अपराध था, लेकिन यह दुर्घटनावश नहीं हुआ. अपराध को सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया है.
न्यायाधीश सोनावाने ने कहा, 'उनके युवा होने से अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती. इसलिए उनसे उदारता बरतने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.' इस अपराध को बदले की भावना के तौर पर अंजाम दिया गया. दावड़े चांडक के कार्यालय में एक अकाउंटैंट के तौर पर काम करता था.
हादसे वाले दिन युग (8) शाम लगभग पांच बजे स्कूल से लौटा और बिल्डिंग के सुरक्षा कार्यालय में अपना बैग रखकर खेलने चला गया. दावड़े और सिंह इमारत के दरवाजे के बाहर मोटरसाइकिल पर उसका इंतजार कर रहे थे. उनसे कुछ बातचीत कर युग उनके साथ चला गया.
उस रात वह घर नहीं लौटा और अगले दिन सुबह में उसकी तलाश शुरू की गई. काफी तलाशी के बाद पुलिस ने नागपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर बाहरी इलाके में लोंखेरी गांव के निकट एक गटर से बच्चे का शव बरामद किया. इस केस में 50 लोगों की गवाही हुई है.