उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार मंगलवार को यूपी पुलिस की उपलब्धियां गिना रहे थे. ठीक उसी वक्त कानपुर देहात से आई एक ख़बर ने फिर खाकी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया. दरअसल, संजीत अपहरण हत्या कांड का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि कानपुर देहात में अपहरण के बाद एक शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी गई. बदमाशों ने फिरौती में 20 लाख रूपये की मांग की थी. इस मामले में अपहरणकर्ताओं और पीड़ित परिवार की बातचीत का ऑडियो क्लिप भी वायरल हो गया था.
यूपी पर अपहरण प्रदेश का तमगा लग गया है. एक बाद एक अपहरण की घटनाएं यूपी पुलिस पर सवालिया निशान लगा रही हैं. ये मामला कानपुर देहात के देवराहट थाना क्षेत्र का है. जहां 16 जुलाई की रात कान्हाखेड़ा गांव के पास भोगनीपुर से धर्मकांटे के कर्मचारी ब्रजेश पाल को अगवा कर लिया गया था. घरवालों ने उसे गांव और आस-पास के इलाके में तलाश किया लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला.
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परेशान हाल घरवाले थाने पहुंचे और पुलिस से शिकायत की. पुलिस ने खानापूर्ति कर उन्हें वापस लौटा दिया. इसी दौरान बदमाशों ने ब्रजेश पाल के घरवालों को फोन किया और उसे छोड़ने की एवज में 20 लाख की फिरौती मांगी. साथ में उन्हें धमकी भी दी कि अगर पुलिस के पास गए तो अंजाम अच्छा नहीं होगा. पुलिस को बताने पर उन्होंने जान से मारने की धमकी दी.
परेशान परिवार ने इस बात की जानकारी फौरन थाने जाकर पुलिस को दी. उन्होंने अपहरणकर्ताओं से बातबीत का ऑडियो भी पुलिस को सुनाया. जिस नंबर से बदमाशों का फोन आया था, वो भी पुलिस को सौंप दिया. लेकिन पुलिस ने इस दिशा में कार्यवाई करने की बजाय ब्रजेश की बुआ और मौसी के बेटे को उठा लिया और उनकी जमकर पिटाई की. पुलिस ने उन दोनों को इस कदर पीटा कि ब्रजेश की बुआ के लड़के मुकेश का हाथ टूट गया. जबकि मौसी के लड़के अखिलेश को गंभीर चोट आई.
परिजनों का आरोप है कि पुलिस मामले को टालने की कोशिश कर रही थी. जब ज्यादा गुहार लगाई तो उन लोगों ने रिश्तेदारों पर शक की बात कहकर उनको प्रताड़ित किया. पुलिस की जांच का दायरा ब्रजेश के रिश्तेदारों तक घूमता रहा. इसी दौरान पुलिस ने मंगलवार को देवराहट में ही एक कुएं से एक शख्स की लाश बरामद की. जिसका चेहरा पहचान पाना मुश्किल था. लाश फूल चुकी थी. इस बात की सूचना पुलिस ने ब्रजेश को घरवालों को दी. ताकि वो आकर शिनाख्त कर सकें.
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पुलिस की सूचना पाकर ब्रजेश के घरवाले शिनाख्त के लिए पहुंचे. जब उन्होंने उसके कपड़े आदि गौर से देखे तो अंडर वियर से ब्रजेश पाल की शिनाख्त हो गई. घरवालों ने इस बात की तस्दीक कर दी कि शव ब्रजेश पाल का ही था. इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. ब्रजेश की मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया.
परिजनों का आरोप है कि अपहरणकर्ताओं की कॉल मिलते ही उन्होंने पुलिस को सारी जानकारी दे दी थी. लेकिन पुलिस ने उनके रिश्तेदारों को उठाकर ही पीटना शुरू कर दिया. घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अपहरणकर्ताओं तक नहीं पहुंच सकी. परिजनों ने कानपुर देहात पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर अपहरणकर्ता के पास पहुंच जाती तो ब्रजेश की जान बच सकती थी.