भारतीय नौसेना अगले हफ्ते कोच्चि में नौसैनिक बेस पर चार MH-60R हेलिकॉप्टर को आधिकारिक तौर पर शामिल करने जा रही है. यह हेलिकॉप्टर का R यानी रोमियो है. यह एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वॉरफेयर क्षमता से लैस हेलिकॉप्टर है.
2025 तक भारतीय नौसेना को 24 रोमियो हेलिकॉप्टर मिल जाएंगे. इसे भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत INS Vikrant पर तैनात करने की भी योजना है. इसे फ्रिगेट, कॉर्वेट या डेस्ट्रॉयर्स से भी ऑपरेट किया जा सकता है.
रोमियो को अमेरिकी कंपनी स्कोरस्की बनाती है. रोमियो के कुल 5 वैरिएंट्स हैं. इनका इस्तेमाल निगरानी, जासूसी, वीआईपी मूवमेंट, हमला, सबमरीन खोजना और उसे बर्बाद करने में काम आ सकता है. इसे कई तरह के कामों में लगा सकते हैं.
रोमियो हेलिकॉप्टर पर दर्जनों सेंसर्स और रडार लगे हैं जो दुश्मन के हर हमले की जानकारी देते हैं. इसे उड़ाने के लिए 3 से 4 क्रू मेंबर्स की जरूरत होती है. इनके अलावा इसमें 5 लोग बैठ सकते हैं. इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 10,433 kg है. यानी पूरे हथियारों, यंत्रों और सैनिकों के साथ. इसकी लंबाई 64.8 फीट है. ऊंचाई 17.23 फीट है.
MH-60R हेलिकॉप्टर में दो जनरल इलेक्ट्रिक के टर्बोशैफ्ट इंजन लगे हैं. जो टेकऑफ के समय 1410x2 किलोवॉट की ताकत पैदा करते हैं. इसके मुख्य पंखे का व्यास 53.8 फीट है. यह हेलिकॉप्टर की एक बार में 830 km तक की दूरी तय कर सकता है. अधिकतम 12 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है. सीधे उठने की गति 1650 फीट प्रति मिनट है.
रोमियो हेलिकॉप्टर अधिकतम 270 km की गति से उड़ सकता है. जरूरत पड़ने पर गति को बढ़ाकर 330 km/hr तक ले जाया जा सकता है. इससे अधिक नहीं. अब आपको बताते हैं कि इस पर किस तरह के हथियार लगाए जा सकते हैं. इस पर दो मार्क 46 टॉरपीडो या MK 50 या MK 54s टॉरपीडो लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा 4 से 8 AGM-114 Hellfire Missile लगाए जा सकते हैं.
इस हेलिकॉप्टर पर APKWS यानी एडवांस्ड प्रेसिसिशन किल वेपन सिस्टम लगा सकते हैं. इस हेलिकॉप्टर पर चार प्रकार की हैवी मशीन गन लगाई जा सकती है. जिनसे दुश्मन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना आसान हो जाता है. इसके अलावा रैपिड एयरबॉर्न माइन क्लियरेंस सिस्टम (RAMICS) और 30 मिमी की Mk 44 Mod 0 तोप लगाई जा सकती है.
रोमियो का एमएच 60आर वर्जन आमतौर पर एंटी-सबमरीन वर्जन है. भारतीय नौसेना इनका उपयोग हिंद महासागर क्षेत्र में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और जरुरत पड़ने पर उन्हें नष्ट करने के करेगी. इस हेलिकॉप्टर को अमेरिकी नौसेना, ऑस्ट्रेलियन नौसेना, तुर्की की नौसेना और हेलिएनिक नौसेना उपयोग कर रही हैं. 1979 से अब तक ऐसे 938 हेलिकॉप्टर बने हैं.