scorecardresearch
 
Advertisement
डिफेंस न्यूज

लिटिल बॉय और फैट मैन... तस्वीरें गवाह हैं रूस-यूक्रेन जंग में परमाणु बम फटा तो कितनी तबाही मचेगी

World's Only Atomic Attack
  • 1/13

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन चुनाव हार चुके हैं. जनवरी में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता संभालेंगे. लेकिन आरोप ये लग रहा है कि बाइडेन जाते-जाते यूक्रेन और रूस के युद्ध में पेट्रोल डाल रहे हैं. उन्होंने लंबी दूरी की मिसाइलों, एंटी-पर्सनल बारूदी सुरंगों के इस्तेमाल की अनुमति यूक्रेन को दे दी है. जिससे रूस काफी ज्यादा नाराज है. (फोटोः AFP)

World's Only Atomic Attack
  • 2/13

रूस ने भी अपनी परमाणु नीति में बदलाव कर दिया है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट तौर पर चेतावनी दी है कि अगर लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन, अमेरिका, नाटो करता है, तो खामियाजा बुरा होगा. रूस ताकतवर हमला करेगा. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी कर सकता है. (फोटोः गेटी)

World's Only Atomic Attack
  • 3/13

रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने तो तीसरे विश्व युद्ध की चेतावनी दे डाली. मुद्दा ये है कि 95 साल पहले अमेरिका ने जिस परमाणु युद्ध की शुरूआत की थी. अगर वो काम रूस ने कर दिया तो भयानक तबाही होगी. तब दुनिया सिर्फ सहमी थी. अब तो खून के आंसू रोएगी. आप देखिए कि कैसे अमेरिका ने लिटिल बॉय और फैट मैन एटम बमों से जापान में तबाही मचाई थी. (फोटोः गेटी)

Advertisement
World's Only Atomic Attack
  • 4/13

26 जुलाई 1945 को जापान को आखिरी चेतावनी दी गई. जापानी नरेश ने ऐलान किया कि आखिरी दम तक जापानी लड़ेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन ने एटम बम के लिए कोई लिखित या मौखिक आदेश नहीं दिया लेकिन उन्होंने कहा कि सैन्य लीडरशिप के किसी फैसले में वे रोड़ा नहीं बनेंगे. इनडायरेक्टली ये ग्रीन सिग्नल था. (फोटोः AFP)

World's Only Atomic Attack
  • 5/13

उसी वक्त नया-नया यूरेनियम बम 'लिटिल बॉय' तैयार होकर आया था. यह गोल न होकर किसी रॉकेट की तरह दिखता था. इसका परीक्षण नहीं हुआ था लेकिन भरोसा था कि काम तो करेगा ही. 6 अगस्त 1945 की सुबह 8.15 पर एक अमेरिकी B29 जहाज ने हिरोशिमा शहर पर यह 'लिटिल बॉय' गिरा दिया. (फोटोः गेटी)

World's Only Atomic Attack
  • 6/13

लगभग तीन-चौथाई मील तक फैले इस विस्फोट की कंपन पूरे जापान में महसूस की गई. इस एक बम से 80,000 लोगों की उसी क्षण मृत्यु हो गई. रूसी सेना भी जापान में घुस गई, लेकिन जापान फिर भी रुकने को तैयार नहीं था. दो दिन बाद फिर जापान को चेतावनी दी गई. लेकिन जापान फिर भी तैयार नहीं हुआ. (फोटोः AFP)

World's Only Atomic Attack
  • 7/13

9 अगस्त, 1945 की सुबह एक और B29 जापान के काकुरो शहर की तरफ उड़ा. लेकिन वहां घने बादल होने की वजह से दूसरे शहर नागासाकी पर 'फैट मैन' बम गिराकर लौट आया. इस बम से 80 हजार लोग और मरे. एटम बम के अटैक और रूसी सेना के हमले के बावजूद जापानी सरेंडर करने को तैयार नहीं हुआ. (फोटोः AFP)

World's Only Atomic Attack
  • 8/13

दुनिया भर में इतने बड़े नरसंहार के लिए अमेरिका की आलोचना हो रही थी. उसी वक्त ट्रूमैन ने मुंह खोला- बस, अब और नहीं. अब एक भी बम बिना मेरी मर्जी के नहीं गिराया जाएगा. इस फोटो में मौजूद टीम ने नही गिराए थे दोनों बम.  

World's Only Atomic Attack
  • 9/13

उधर तबाही से जापान का मन भी बदल रहा था. अब जापान इस शर्त पर सरेंडर को तैयार हुआ कि हमारे राजा बने रहेंगे. बात बन गई. दूसरा विश्वयुद्ध खत्म हो गया था और उसका श्रेय गया महाविनाश के हथियार एटम बम को. दुनिया में इतने बड़े विनाश के लिए अमेरिका को खलनायक के रूप में देखा गया. (फोटोः AFP)

Advertisement
World's Only Atomic Attack
  • 10/13

लेकिन अमेरिका का उसकी धरती पर स्वागत हुआ. अगले साल बिकिनी द्वीप पर समंदर के अंदर एटम बम का फिर परीक्षण किया गया. पानी हजारों फीट तक उछला और लोगों ने इसकी तस्वीरें लीं. ओपेनहाइमर हीरो बन गए और अमेरिका दुनिया का सुपरपावर. (फोटोः गेटी)

World's Only Atomic Attack
  • 11/13

अमेरिका ने खुद परमाणु बम का इस्तेमाल करने के बाद UN में प्रस्ताव रखा कि अब कोई देश एटम बम न बनाए, लेकिन रूस ने इसे खारिज कर दिया. उधर स्टालिन ने हिरोशिमा की तस्वीरें देखी और रूस भी सीक्रेट रूप से एटम बम बनाने में जुट गया. (फोटोः AFP)

World's Only Atomic Attack
  • 12/13

इस बीच, अमेरिका ने एक दांव खेला. संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखा कि अब कोई भी देश एटम बम न बनाए. स्टालिन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. 1949 में एक एटम बम विस्फोट अमेरिका से मीलों दूर कजाखस्तान में हुआ. सोवियत भी एटम बम बना चुका था. (फोटोः गेटी)

World's Only Atomic Attack
  • 13/13

यहीं से शुरुआत हुई अमेरिका और रूस के बीच कोल्ड वॉर की. जिसकी जद में पूरी दुनिया आने वाली थी और अगले कई दशक तक जो जारी रहने वाली थी. (फोटोः AFP)

Advertisement
Advertisement