हिजबुल्लाह और इजरायल में भयानक रॉकेटबाजी चल रही है. मिसाइलें दागी जा रही हैं. बम गिराए जा रहे हैं. हिजबुल्लाह का प्रमुख अड्डा दक्षिणी लेबनान है. जिसकी सीमा इजरायल से लगती है. इस सीमा पर भारतीय सेना के 600 जवान तैनात हैं. इन्हें यूनाइटेड नेशंश इंटरिम फोर्स इन लेबनान (UNFIL) मिशन में तैनात किया गया है. (प्रतीकात्मक फाइल फोटोः AFP)
कैसे बनी ब्लू लाइन? ... इजरायल ने 2000 में लेबनान पर अटैक किया था. बाद में इस मामले में यूएन ने दखल दिया और वॉर रुक गया. जिस जगह से इजरायली सेना ने वापसी की थी, उसी जगह को यूएन ने अपनी कस्टडी में ले लिया था. यह इलाका अब भी संयुक्त राष्ट्र के कब्जे में है. यहां पीस कीपिंग का काम देखने के लिए UNIFIL की नियुक्ति की गई थी. फिलहाल UNIFIL ही यह काम कर रही है. यह करीब 120 किलोमीटर लंबी है. यहीं भारतीय जवान तैनात हैं. (फाइल फोटोः एपी)
हजारों पेजर और वॉकी-टॉकी में विस्फोट के बाद इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष बढ़ गया है. हिजबुल्लाह बड़े हमले की फिराक में है. बीच-बीच में अपने रॉकेट्स, मिसाइल और ड्रोन्स के जरिए इजरायल पर हमला करता रहता है. उधर, इजरायली डिफेंस फोर्सेस एयरस्ट्राइक कर रही है. उसने हिजबुल्लाह के कई रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन तबाह कर दिए. दावा है कि इस एयरस्ट्राइक में 100 लॉन्चर्स बर्बाद किए गए. जिससे 1000 रॉकेट लॉन्च होते. (फाइल फोटोः रॉयटर्स)
संयुक्त राष्ट्र ने साल 2000 में UNFIL की स्थापना की थी. ताकि ब्लू लाइन पर दोनों देशों की तरफ से किसी तरह के उकसावे और संघर्ष की स्थिति पैदा न हो. इस सीमा पर UNFIL के सेना खड़ी रहती है. ताकि शांति बरकरार रहे. इसमें कई अन्य देशों के जवान भी होते हैं. असल में ब्लू लाइन सीमा नहीं बल्कि एक बफर जोन है. (फाइल फोटोः रॉयटर्स)
इस बफर जोन में यूएन पीसकीपर्स पेट्रोलिंग करते हैं. दशकों से भारतीय जवान इस सीमा पर तैनात होते आ रहे हैं. ब्लू लाइन असल में दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने का जरिया है. जहां संयुक्त राष्ट्र की सेना शांति स्थापित करने के लिए हमेशा प्रयास करती रहती है. भारतीय जवान सीधे तौर पर दोनों देशों के संघर्ष में शामिल नहीं हैं. (फाइल फोटोः एपी)
UNFIL के तहत भारतीय जवानों का मुख्य काम ये है कि इस बफर जोन में किसी तरह की हिंसा न भड़के. लेकिन इस बफर जोन से सटा लेबनान का Tyre और Sidon संवेदनशील इलाका है. यहां पर ज्यादातर शिया आबादी है. इसके समर्थन में ईरान हमेशा खड़ा रहता है. यहीं पर हजारों फिलिस्तीन रेफ्यूजी भी हैं. (फाइल फोटोः रॉयटर्स)
यह इलाका हिजबुल्लाह का मजबूत गढ़ है. कुछ इलाकों में हिजबुल्लाह की मजबूती नहीं है लेकिन उसके लोग फैले हुए हैं. ये लोग UNFIL के लिए मुसीबत खड़ी करते हैं. ये शांति भंग करने का काम करते हैं. इसलिए बफर जोन से सटे ऐसे इलाकों में संयुक्त राष्ट्र की सेना में शामिल भारतीय जवानों का काम बढ़ जाता है. जिम्मेदारी बढ़ जाती है. (फाइल फोटोः एपी)
लेबनान की आबादी में कई धर्मों के लोग हैं. 67 फीसदी मुस्लिम हैं. जो शिया और सुन्नी में बंटे हैं. इसके अलावा 32 फीसदी आबादी ईसाइयों, द्रुज और यहूदी हैं. या कुछ और अल्पसंख्यक समुदाय. फिलिस्तीनी रेफ्यूजी कैंप भी महत्वपूर्ण जगह है, जहां ज्यादातर लोग हिजबुल्लाह के मददगार हैं. उन्हें समर्थन देते हैं. (फाइल फोटोः एपी)
UNFIL की फोर्स दो हिस्सों में बंटी है. पूर्व और पश्चिम. इसमें ब्रिगेड्स हैं. यानी दोनों सेक्टर में तीन से चार बटालियन तैनात है. भारतीय बटालियन पूर्वी सेक्टर में गोलन हाइट्स के पास तैनात हैं. रॉकेट हमले और एयरस्ट्राइक के बावजूद भारतीय जवान सुरक्षित हैं. UNFIL का मुख्यालय ब्लू लाइन के पास नकोरा में है. (फोटोः एपी)
UNFIL इस इलाके में यह प्रयास करती है कि यहां किसी भी तरह की हिंसा न भड़के. इस काम में भारतीय जवान माहिर हैं. जब इजरायल बफर जोन के आसपास एयरस्ट्राइक करने का ऐलान करता है, वह पहले ही UNFIL को सूचित कर देता है. वहां से भारतीय जवानों समेत अन्य सैनिकों को हटा लिया जाता है. (फोटोः एपी)