IIT दिल्ली के DRDO इंडस्ट्री अकेडमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (DIA-CoE) ने 'एडवांस्ड बैलिस्टिक्स फॉर हाई एनर्जी डीफीट' यानी ABHED नाम की बुलेटप्रूफ जैकेट बनाई है. इसे प्रोफेसर नरेश भटनागर और उनकी टीम ने डेवलप किया है. यह जैकेट दुनिया की सबसे हल्की बुलेट प्रूफ जैकेट्स में से एक है. ये बेहतरीन काम है लेकिन असल सवाल ये है कि ये बुलेटप्रूफ जैकेट किस तरह की बंदूकों की गोली रोक लेगा. या ग्रैनेड के छर्रे. या स्नाइपर.
पहले जानिए किस तरह की बंदूकों की गोली इस पर असर नहीं करेगी ...
- 7.62 mm कैलिबर वाली AK सीरीज की बंदूकों और स्नाइपर को गोली.
- 5.56 mm कैलिबर वाली स्टैंडर्ड असॉल्ट राइफल जैसे एसएलआर या थ्रीनॉटथ्री.
- 9 mm कैलिबर वाली हैंडगन्स, सबमशीन गन या पिस्टल जैसे- ग्लॉक, रिवॉल्वर, उजी.
- इतना ही नहीं... ये ग्रैनेड्स और अन्य विस्फोटकों के छर्रों से भी जवानों को बचा सकती है. उन हमलों पर भी प्रभावी है.
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ये सभी हाई-वेलोसिटी फायरआर्म्स में आती है. यानी अभेद बुलेटप्रूफ जैकेट हमारे जवानों को कई तरह की गोलियों से बचाएगी. ये जैकेट कई तरह के जंगी माहौल में जवानों को सुरक्षित रखेगी. जैसे क्लोज कॉम्बैट, शहरी वॉरफेयर या लंबी दूरी से चुपके से हमला करने वाले स्नाइपर. इन सभी तरह की गोलियों से ये जैकेट बचाएगी. पर क्यों?
क्योंकि इसमें लगे हैं एडवांस मैटेरियल...
इस जैकेट में बैलिस्टिक प्लेट्स लगी हैं. जो सिरेमिक (Ceramic) और अल्ट्रा-हाई मॉलिक्यूलर वेट पॉलीइथाईलीन (UHMWPE) को मिलाकर बनाई गई है. ये मिश्रण जैकेट को हल्का और मजबूत बनाता है. दोनों का मॉड्यूलर डिजाइन इस जैकेट को कई बार गोलियों की मार सहने की क्षमता देता है.
सिरेमिक लेयर... आसानी से टूटती नहीं. गोली की मार सहकर खुद को डिफॉर्म करती है.
UHMWPE... आती हुई गोली का दबाव सहकर उसे पूरे जैकेट में बांट देती है. इससे गोली जैकेट को छेद नहीं पाती.
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कम वजन और आसानी से ढोने लायक
पिछली पीढ़ी की बुलेटप्रूफ जैकेट्स भारी होती थी. इस वजह से उन्हें पहनकर चलने और ऑपरेशन में दिक्कत होती थी. अभेद जैकेट मात्र 9 किलोग्राम की है. पिछले जैकेटों की तुलना में इसका वजन 20-30 फीसदी कम किया गया है. पुरानी जैकेट्स 11 से 14 किलोग्राम वजनी होती थी. हल्के वजन की जैकेट का फायदा ये है कि जवान तेजी से मूव कर सकता है. जैकेट की वजह से बंधा हुआ महसूस नहीं करता.
कस्टमाइज करने लायक डिजाइन
अभेद जैकेट की डिजाइन बेहद मॉड्यूलर है. यानी सैनिक इसे मिशन के अनुसार इसके जैकेट को अपने हिसाब से बदल सकते हैं. जैसे- फ्रंट और बैक प्लेट्स जवान की छाती, फेफड़े, पीठ और पसलियों को हाई-रिस्क मिशन में पूरी सुरक्षा देते हैं. साइड प्लेट्स से दिल, पसलियां और पेट सुरक्षित रहता है. इसके अलावा निचले हिस्से को कवर करने वाला और गले को बचाने की वैकल्पिक व्यवस्था भी इस जैकेट में है. यानी आधा शरीर सुरक्षित.
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कई बार गोली सहने की क्षमता
अभेद कवच की बैलिस्टिक प्लेट्स उसे कई बार गोली सहने की क्षमता देती है. अगर शुरूआत में कुछ गोलियां लग भी जाती हैं, तो भी यह जवान को काफी देर तक और हिट्स से बचाए रखने की क्षमता रखती है. यह कई बार गोलियों की मार सह सकती है. यानी भयावह फायरिंग के बीच भी जवान सुरक्षित रह सकता है.
टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन
बैलिस्टिक प्लेट्स की खतरनाक टेस्टिंग की गई है. वो भी बेहद एक्स्ट्रीम कंडीशन में. इस पर लाइव फायर ट्रायल्स किए गए हैं. ये ट्रायल्स हाई-वेलोसिटी राउंड्स से किए गए. जिसमें असॉल्ट राइफल्स और स्नाइपर राइफल्स शामिल हैं. मौसम के अनुसार भी टेस्टिंग की गई. इसकी टेस्टिंग लद्दाख में जीरो डिग्री के नीचे और राजस्थान के रेगिस्तान में अधिकतम तापमान में की गई है. वहां भी इसने अपनी क्षमता प्रदर्शित की है.
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सबसे बड़ा फायदा कहां होगा
अभेद को अगर भारतीय जवानों को दिया जाए तो इसका सबसे बड़ा फायदा हाई-रिस्क जोन्स में ज्यादा होगा. जैसे- जम्मू और कश्मीर में आतंक विरोधी अभियानों में या फिर चीन से सटी LAC के आसपास. ये सिर्फ गोलियों से नहीं बचाती बल्कि डंडे, रॉड, हथौड़े जैसे हथियारों की मार भी सह सकती है. किसी भी तरह के पत्थर या अन्य टक्कर की काइनेटिक एनर्जी से भी जवान के शरीर को बचाती है.