हिज्बुल्लाह का लीडर हसन नसरल्लाह जहां मारा गया. वो इलाका घनी आबादी वाला इलाका था. आसपास मार्केट, यूनिवर्सिटी, स्कूल और न जाने क्या क्या. यहां कई महंगे होटल हैं. विदेशी फील वाले रेस्टोरेंट हैं. फिर भी इजरायल ने सटीक हमला करके नसरल्लाह जिस इमारत में छिपा था, उसे जमींदोज कर दिया.
ये इलाका कहलाता है हरेत हरीक (Haret Hreik). जहां हिज्बुल्लाह कमांडर नसरल्लाह का अड्डा था, उसके आसपास कई कैफे, स्पा सेंटर, कार क्लीनिंग वाले सेंटर्स भी थे. इसके बावजूद सड़कें काफी चौड़ी. कोई सोच भी नहीं सकता था कि बेरूत के इस इलाके में इजरायल का सबसे बड़ा दुश्मन रहता है.
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ये वही इलाका है जहां पर इजरायल ने 27 सितंबर को हवाई हमला करके हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह को खत्म कर दिया. इसके बाद से ईरान समर्थित आतंकी गुटों और इजरायल के बीच जंग की कंडिशन बहुत तेजी से बढ़ गई है.
हरेत हरीक मध्य बेरूत से करीब 8 किलोमीटर दूर है. यहां पहले पुरानी फ्रेंच कॉलोनी थी, जहां पर पर्यटकों का आना-जाना सबसे ज्यादा था. क्योंकि यहीं पर खूबसूरत समुद्री तट हैं. साथ ही गजब की स्थापत्य कला का नजारा. हरेत हरीक को बाहर से देखने पर लगता है कि ये बेरूत के किसी अन्य पड़ोसी इलाके जैसा ही है.
जैसे ही आप इस इलाके के अंदर जाएंगे, आपको अलग नजारा देखने को मिलेगा. हाथ में असॉल्ट राइफल्स लिए लोग. कैमोफ्लॉज यूनिफॉर्म में लोग. अरबी भाषा में रेजिसटेंस के साथ काम करने वालों की तारीफ. चारों तरफ काली पगड़ी पहने हुए हसन नसरल्लाह के पोस्टर और बैनर. ये आपको हर जगह देखने को मिल जाएंगे.
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हरेत हरीक में पर्टयक अगर चाहें भी तो हिज्बुल्लाह के किसी दफ्तर को नहीं खोज सकते. लेकिन आपको हादी हसन नसरल्लाह स्ट्रीट के पास मौजूद स्क्वायर ऑफ रेजिसेंटस मार्टियर्स पर जाने से कोई नहीं रोकता. इजरायल और पश्चिमी देशों के लोग कहते हैं कि हरेत हरीक शिया बाहुल्य इलाका है. ये बेरूत एयरपोर्ट से मात्र साढ़े चार किलोमीटर दूर है. इजरायल ने इस इलाके में पहले भी एयरस्ट्राइक किए हैं.
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1985 में हिज्बुल्लाह की स्थापना हुई. इसे कहा गया कि ये लेबनान की पैरलल सरकार है. यानी स्टेट विद इन द स्टेट. इसके लड़ाके लेबनानी पुलिस या सेना से ज्यादा खतरनाक और आधुनिक हथियार लेकर चलते थे. उन्हें ज्यादा ताकतवर माना जाता था. इसके सदस्य लेबनान की संसद में थे. यहां तक की सीरिया में भी.
अक्टूबर 2023 में हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर कम ताकत वाले रॉकेट्स दागे. ताकि फिलिस्तीनी आतंकी संगठन को उनके मिशन में सपोर्ट कर पाएं. लेकिन इजरायल ने ऐसा होने नहीं दिया. गाजा से हजारों लाखों विस्थापित हुए. इजरायल ने हमास आतंकियों को जमीन के अंदर से निकाल-निकाल कर मारा. नहीं तो वहीं बंकर बस्टर बम गिरा दिया, ताकि सुरंगों में ही उनकी कब्र बन जाए. इजरायल ने इस महीने के शुरूआत से पहले लेबनान के हमलों का सही से जवाब दे नहीं रहा था. लेकिन फिर दिया...
17 अक्टूबर को इजरायल ने हिज्बुल्लाह के हजारों लड़ाकों को जख्मी किया. कई मारे गए. क्योंकि जिस चीज की उम्मीद नहीं थी, वो हुआ था. लड़ाकों के पेजर्स में धमाके हुए थे. अगले दिन वॉकी-टॉकी और अन्य यंत्रों में धमाके हुए. सैटेलाइट फोन्स उड़ गए. सैकड़ों लोग मारे गए. इसके बाद घातक एयर स्ट्राइक शुरू कर दिए गए.
नसरल्लाह का मारा जाना हिज्बुल्लाह के लिए नुकसानदेह हो सकता है. लेकिन ये दर्द ज्यादा दिन तक वो सहेंगे नहीं. वो बदला लेने के लिए जाने जाते हैं. अब ईरान और उसके समर्थन वाले आतंकी समूह इजरायल पर मिलकर खुलेआम युद्ध का ऐलान कर सकते हैं.