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Israel Under Attack: हूती विद्रोहियों ने दिखाया नई हाइपरसोनिक मिसाइल Palestine-2 का Video, इसी से हुआ था इजरायल पर हमला

यमन के हूती विद्रोहियों ने उस नई हाइपरसोनिक मिसाइल का वीडियो जारी कर दिया है, जिसने मात्र 11 मिनट में 2040 किलोमीटर की यात्रा की. इसकी अधिकतम स्पीड 19756 km/hr है. यानी इसे रोक पाना बेहद मुश्किल है. इसलिए इसने सऊदी अरब, अमेरिका के 3 युद्धपोतों और इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दिया.

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ये वीडियोग्रैब हूती विद्रोहियो द्वारा जारी वीडियो से लिया गया है.
ये वीडियोग्रैब हूती विद्रोहियो द्वारा जारी वीडियो से लिया गया है.

यमन के हूती विद्रोहियों ने अपनी उस हाइपरसोनिक मिसाइल से पर्दा हटा दिया है, जिससे उसने इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर हमला किया था. सतह से सतह पर मार करने वाली इस नई मिसाइल का नाम है Palestine-2. इस मिसाइल की अधिकतम गति 19756 km/hr है. इसकी रेंज 2150 km बताई जा रही है. 

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यह दो स्टेज की सॉलिड फ्यूल ईंधन से चलने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल हैं. इसे हाल ही में यमनी सेना में शामिल किया गया है. इसकी गति मैक 16 है. यानी 19756 किलोमीटर प्रतिघंटा. इस गति में चलने वाली मिसाइल को रोक पाना दुनिया की किसी एयर डिफेंस सिस्टम के बस का नहीं है. इसके अलावा यह मिसाइल अत्यधिक मैन्यूवरेबल हैं. 

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यहां नीचे देखिए इस नई मिसाइल का वीडियो

यानी यह बीच रास्ते में दिशा बदल सकती है. मतलब एयर डिफेंस सिस्टम से आने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों को हवा में ही धोखा देकर तेज गति से आगे बढ़ सकती है. इस मिसाइल की जो खासियतें बताई जा रही है, उसके मुताबिक इजरायल, मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी बेस, जंगी जहाजों और व्यापारिक जहाजों के लिए ये खतरनाक हो सकती है. 

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15 सितंबर को हुआ था इजरायल में इस मिसाइल से हमला

हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर 15 सितंबर 2024 को हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला किया था. मिसाइलों ने 2040 km की दूरी मात्र साढ़े 11 मिनट में तय पूरी की. पूरे एक दिन दुनिया इस बात से हैरान थी कि हूती विद्रोहियों के पास यह टेक्नोलॉजी कहां से आई. फिलहाल दावा ये किया जा रहा है कि हूती विद्रोहियों ने इस मिसाइल को विकसित किया है.  

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इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने दी यमन को धमकी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हूती विद्रोहियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. पहले ये शक था कि यमन के हूती विद्रोहियों को इस तरह की ताकतवर बैलिस्टिक मिसाइलें ईरान से मिल सकती हैं. लेकिन ईरान के आकाओं ने इस बात से मना कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि ऐसी कोई मिसाइल या तकनीक यमन को नहीं दी गई है. ईरान के पास भी 1400 km की फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइल हैं. इतनी दूर नहीं जा सकतीं.  

इजरायल का दावा- कुछ देर के लिए हाइपरसोनिक गति मिली

इस बीच इजरायल ने कहा कि किसी भी तरह के हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल ने हमें नुकसान नहीं पहुंचाया है. ये सारी मिसाइलें बैलिस्टिक थीं, लेकिन अपने रास्ते में इसने कुछ देर के लिए हाइपरसोनिक गति हासिल की थी. जितनी मिसाइलें आईं उनमें से सिर्फ 20 ही गिरी, लेकिन खुले इलाकों में. किसी को नुकसान नहीं हुआ. 

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ये है रूस के फाइटर जेट Su-35 के नीचे लगी किंझल हाइपरसोनिक मिसाइल. (फोटोः गेटी)

दिक्कत ये है कि यमन से इजरायल तक जाने के दौरान मिसाइल को लाल सागर में मौजूद अमेरिकी युद्धपोत माइकल मर्फी और फ्रैंक ई पीटरसर जूनियर और एफएस चेवालियर पॉल न रोक पाए. न इजरायल और सऊदी अरब का एयर डिफेंस सिस्टम रोक पाया. 

क्या होती हैं हाइपरसोनिक मिसाइल? 

हाइपरसोनिक मिसाइल वो हथियार होती हैं, जो ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा गति में चले. यानी कम से कम मैक 5. साधारण भाषा में इनकी गति 6100 km/hr या उससे ज्यादा होती है. इनकी गति और दिशा में बदलाव करने की क्षमता इतनी ज्यादा सटीक और ताकतवर होती हैं कि इन्हें ट्रैक करना और मार गिराना असंभव होता है. 

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ये है चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल डीएफ-17. 

क्या सभी मिसाइलें हाइपरसोनिक हो सकती हैं? 

आमतौर पर क्रूज मिसाइल या बैलिस्टिक मिसाइलों की गति काफी ज्यादा तेज होती है. लेकिन इनकी तय दिशा और यात्रा मार्ग से इन्हें ट्रैक कर सकतें हैं. इन्हें मारकर गिरा सकते हैं. अगर इनकी गति 6100 km/hr कर दी जाए, साथ ही दिशा बदलने लायक यंत्र लगा दें तो ये भी हाइपरसोनिक हो जाएंगी.  

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हाइपरसोनिक हथियार कितने प्रकार के होते हैं? 

हाइपरसोनिक हथियार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं. पहला- ग्लाइड व्हीकल्स यानी हवा में तैरने वाले. दूसरा- क्रूज मिसाइल. अभी दुनिया का फोकस ग्लाइड व्हीकल्स पर है. जिसके पीछे छोटी मिसाइल लगाई जाती है. फिर उसे मिसाइल लॉन्चर से छोड़ा जाता है. एक निश्चित दूरी तय करने के बाद मिसाइल अलग हो जाती है. उसके बाद ग्लाइड व्हीकल्स आसानी से उड़ते हुए टारगेट पर हमला करता है. इन हथियारों में आमतौर पर स्क्रैमजेट इंजन लगा होता है, जो हवा में मौजूद ऑक्सीजन का उपयोग करके तेजी से उड़ता है. इससे उसे एक तय गति और ऊंचाई मिलती है. 

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