इजरायल के ऊपर ईरान ने 200 मिसाइलें दागीं. जिसमें से कुछ बैलिस्टिक तो कुछ हाइपरसोनिक थीं. इन मिसाइलों को इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ने फेल किया. कई मिसाइलें जमीन पर गिरी भीं. लेकिन एयर डिफेंस सिस्टम ने संभाल लिया. इनके बारे में बता रहे हैं रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक कुमार जो अभी CENJOWS के डायरेक्टर जनरल हैं.
अशोक कुमार ने बताया कि जब जंग के मैदान में आसमान से ढेर सारे रॉकेट्स या मिसाइलों से हमला होता है, तब कई बार ऐसे एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर पड़ते हैं. लेकिन कई मिसाइलों को मार गिराया जाता है. इजरायल का मिसाइल डिफेंस सिस्टम बेहद सक्रिय और तेज है. इससे नुकसान कम हो जाता है.
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आइए जानते हैं इजरायल की ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम के बारे में...
आयरन डोम... इजरायल की सबसे खतरनाक मिसाइल प्रणाली
हर बार जब भी इजरायल पर चारों तरफ से रॉकेट, ड्रोन या मिसाइल हमला होता है तब आयरन डोम उसे बचाता है. इजरायल का बनाया हुआ दुनिया का सबसे सटीक और कारगर एयर डिफेंस सिस्टम. साल 2011 में इजरायल ने Iron Dome को अपने देश में तैनात किया. तब से यह हवाई रक्षा प्रणाली इजरायल के लोगों को हमास और अन्य फिलिस्तीनी आतंकी समूहों के रॉकेट हमले से बचा रहा है.
अगर आयरन डोम अपनी तरफ 100 रॉकेट आता देखता है, तो वह 90 को हवा में ही नष्ट कर देता है. इसे बनाने की शुरूआत 2006 में हुई, जब हिजबुल्लाह आतंकियों ने इजरायल पर हजारों रॉकेट दागे. नतीजा बहुत बुरा था. इजरायल में सैकड़ों लोग मारे गए. हजारों देश छोड़कर भाग गए. काफी ज्यादा नुकसान हुआ.
इसके बाद इजरायल ने स्वदेशी मिसाइल डिफेंस शील्ड (Missile Defence Shield) बनाया. उसे नाम दिया आयरन डोम. आयरन डोम की रेंज अब 150 वर्ग km से बढ़कर 250 वर्ग km हो चुकी है. यह अब दो दिशाओं से आने वाले दुश्मन रॉकेटों पर हमला कर सकता है.
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मिसाइल फायरिंग यूनिट में तामीर इंटरसेप्टर मिसाइल होती है. जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सेंसर्स से लैस होती है. स्टीयरिंग फिन्स लगी होती है. एक बैट्री में तीन-चार लॉन्चर होते हैं. हर लॉन्चर में 20 मिसाइलें होती हैं.
डेविड स्लिंग... आयरन डोम का दमदार साथी है ये हथियार
इजरायल की ताकतवर मध्यम से लंबी दूरी वाली हवाई सुरक्षा प्रणाली. डेविड स्लिंग को मैजिक वांड (Magic Wand) भी कहते हैं. यह सतह से हवा में मार करने वाली और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर है. इसे इजरायल और अमेरिका ने मिल कर बनाया है. इससे आमतौर पर ड्रोन्स, टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल, रॉकेट्स और क्रूज मिसाइलों को मार कर गिराया जा सकता है. या फिर हवा में नष्ट कर दिया जाता है.
40 से 300 km दूर से आने वाले हथियारों को नष्ट कर सकती है डेविड स्लिंग मिसाइल. यह दो स्टेज की मिसाइल है. इसकी गति 9261 km/hr है. यह इजरायल के कई लेयर वाली एयर डिफेंस सिस्टम का प्रमुख हिस्सा है. आयरन डोम के साथ मिलकर यह इजरायल की राजधानी तेल अवीव की सुरक्षा में तैनात है.
एरो-2 और एरो-3... 9000 km/hr की स्पीड से अंतरिक्ष तक हमला करने की क्षमता
इजरायल की एरो मिसाइल फैमिली. यानी इजरायल की हवाई सुरक्षा के लिए तैयार किया गया मिसाइल सिस्टम. इसे हत्ज (Hetz) के नाम से भी बुलाते हैं. मिसाइल का वजन 1300 किलोग्राम है. इसके तीन वैरिएंट्स हैं. जो 22 से 23 फीट ऊंचे हैं. इन मिसाइलों में विग्ंस भी हैं, ताकि हवा में ग्लाइड करते समय दिक्कत न हो. इनमें 150 किलोग्राम वजनी वॉरहेड लगाया जाता है. जो डायरेक्टेड हाई एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन होता है.
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यह एक दो स्टेज का सॉलिड प्रोपेलेंट वाली मिसाइल है. जो वायुमंडल के बाहर तक जाने की क्षमता रखती है. इसकी गति ही सबसे खतरनाक है. यह एक सेकेंड में 2.5 किलोमीटर चली जाती है. यानी एक घंटे में 9000 किलोमीटर की स्पीड. इसे दागने के लिए ट्रक जैसे वाहन का इस्तेमाल होता है. जिसमें छह कैनिस्टर होते हैं. उनमें से ही ये मिसाइलें निकलती हैं.
एरो-3 मिसाइल सिस्टम इजरायल को वायुमंडल के ऊपर से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई मिसाइल है. इजरायल की सरकार ने कभी यह नहीं बताया कि इसकी मारक क्षमता, गति और सटीकता कितनी है. लेकिन दावा किया है कि यह एरो-2 मिसाइल से ज्यादा तेज गति में चलती है. अंतरिक्ष में किसी भी सैटेलाइट को मार गिराने में सक्षम है. इसे इजरायल की सुरक्षा में 2017 से तैनात कर दिया गया है. इस मिसाइल की बदौलत इजरायल दुनिया के गिने-चुने देशों में शामिल हो चुका है, जिनके पास अंतरिक्ष में उड़ रहे सैटेलाइट्स को मार गिराने की क्षमता है.
अब जानते हैं कि क्या कहना है हमारे एक्सपर्ट का?
हमास के शुरुआती हमले... मेजर जनरल अशोक कुमार के मुताबिक आयरन डोम शांति समझौते और शांति के माहौल में हमास के हमलों को रोक नहीं पा रहा था. लेकिन बाद में इजरायल ने इन्हें एक्टिव किया. जब ईरान ने हमला किया तो इसने रोक दिया. कुछ मिसाइलें जमीन पर गिरीं लेकिन आयरन डोम की वजह से नुकसान कम हुआ.
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अंतरराष्ट्रीय मदद... अशोक कुमार कहते हैं कि इजरायल को अमेरिका और यूके से लगातार मदद मिलती रहती है. इन दोनों देशों ने इजरायल के दुश्मनों और खतरों को कम करने के लिए काफी मदद की है. हथियारों से. यंत्रों से. तकनीक से. जैसे मिसाइल की जानकारी देने वाला अर्ली वॉर्निंग सिस्टम.
सुपरसोनिक मिसाइल की चुनौती... बड़ा खतरा सुपरसोनिक मिसाइलों का है. अगर ये ज्यादा मात्रा और ज्यादा गति में इजरायल की तरफ आती हैं तो एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बढ़ जाएगी. ऐसे में डेविड स्लिंग और एरो सिस्टम को दिक्कत होगी. क्योंकि वो इंटरसेप्शन नहीं कर पाएंगे ढंग से.
भारत से तुलना... भारत में कई लेयर का एयर डिफेंस सिस्टम लगा रहा है. कई लेयर वाली सुरक्षा प्रणाली पर भरोसा करता है. लेकिन भारत को ज्यादा जरूरत है ऐसी तकनीक और हथियारों की. क्योंकि इसका भौगोलिक क्षेत्रफल बहुत ज्यादा है. पूरे देश में ऐसी रक्षा प्रणाली लगाना बेहद मुश्किल काम है.