इजरायल पर हमास भी हमला करता है. लेबनॉन भी करता है. हिजबुल्लाह भी हमला करता है. अब ईरान से तो लगभग जंग चल ही रही है. इन आतंकी समूहों और ताकतवर देशों के हवाई हमलों से बचने के लिए इजरायल ने अपने पूरे देश को एक अदृश्य हवाई कवच से घेर रखा है. कई लेयर और रेंज की मिसाइलों का घेरा बना रखा है.
इसमें सबसे ज्यादा ताकतवर और क्लोज-एंड वेपन सिस्टम है आयरन डोम. साल 2011 में इजरायल ने Iron Dome को अपने देश में तैनात किया. तब से यह हवाई रक्षा प्रणाली इजरायल के लोगों को हवाई हमलों बचा रहा है. अगर आयरन डोम अपनी तरफ 100 रॉकेट आता देखता है, तो वह 90 को हवा में ही नष्ट कर देता है.
इसे बनाने की शुरूआत 2006 में हुई, जब हिजबुल्लाह आतंकियों ने इजरायल पर हजारों रॉकेट दागे. नतीजा बहुत बुरा था. इजरायल में सैकड़ों लोग मारे गए. हजारों देश छोड़कर भाग गए. काफी ज्यादा नुकसान हुआ. इसके बाद इजरायल ने स्वदेशी मिसाइल डिफेंस शील्ड (Missile Defence Shield) बनाया. उसे नाम दिया आयरन डोम.
कैसे काम करता है Iron Dome?
जैसे ही दुश्मन अपना रॉकेट दागता है. आयरन डोम में लगा राडार सिस्टम उसे पहचानता है. ट्रैक करता है. फिर कंट्रोल सिस्टम इम्पैक्ट प्वाइंट का पता करता है. यानी रॉकेट गिरा तो कितना नुकसान होगा. उसे हवा में मार गिराएं तो कितनी दूर फटेगा. ताकि नुकसान न हो. इसके बाद कंट्रोल सिस्टम से मिले कमांड पर लॉन्चर से मिसाइल दागी जाती है. जिसे इंटरसेप्टर कहते हैं. इजरायल के लोग उसे तामीर (Tamir) बुलाते हैं. मिसाइल दुश्मन रॉकेट पास जाकर फट जाती है, इससे वह भी ध्वस्त हो जाता है.
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क्या इस बार फेल हो गया आयरन डोम?
साल 2011 में इसे पहली बार तैनात किया गया. तैनाती के 24 घंटे बाद ही इसने गाजा से दागे गए एक रॉकेट को हवा में ध्वस्त कर दिया. इसके बाद आयरन डोम बैटरी को पूरे देश में फैलान शुरू किया गया. मार्च 2012 में आयरन डोम ने गाजा की तरफ से दागे गए 99 रॉकेटों में से 25 को मार गिराया था. 2013 के अंत तक इसकी इंटरसेप्शन की ताकत 85 फीसदी बढ़ गई थी.
2014 के अंत तक यह बढ़कर 90 फीसदी हो गई. 2021 में भी इसने यही क्षमता दिखाई. ज्यादा मात्रा में मिसाइलें और रॉकेट्स आते हैं तो उनकी ट्रैजेक्टरी समझने में आयरन डोम को दिक्कत होती है. इसलिए वो कुछ हमले नहीं रोक पाता. गाजा के साथ हुए तीन संघर्षों में इजरायल ने आयरन डोम का इस्तेमाल किया है. ये युद्ध 2011, 2012 और 2021 में हुए थे.
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इजरायल का सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम
इसके अलावा इजरायल ने इस खास हथियार का इस्तेमाल ऑपरेशन पिलर ऑफ डिफेंस, ऑपरेशन प्रोटेक्टिव एज, सिनाई इंसर्जेंसी, 2021 इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष, ऑपरेशन ब्रेकिंग डॉन और ऑपरेशन शील्ड एंड ऐरो में किया है.
आयरन डोम की रेंज अब 150 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 250 वर्ग किलोमीटर हो चुकी है. यह अब दो दिशाओं से आने वाले दुश्मन रॉकेटों पर हमला कर सकता है. मिसाइल फायरिंग यूनिट में तामीर इंटरसेप्टर मिसाइल होती है. जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सेंसर्स से लैस होती है. स्टीयरिंग फिन्स लगी होती है. एक बैट्री में तीन-चार लॉन्चर होते हैं. हर लॉन्चर में 20 मिसाइलें होती हैं.
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ऐरो-2... 9000 km/hr की स्पीड से बढ़ती है दुश्मन की तरफ
इजरायल की एरो मिसाइल फैमिली. यानी इजरायल की हवाई सुरक्षा के लिए तैयार किया गया मिसाइल सिस्टम. इसे हत्ज (Hetz) के नाम से भी बुलाते हैं. मिसाइल का वजन 1300 किलोग्राम है. इसके तीन वैरिएंट्स हैं. जो 22 से 23 फीट ऊंचे हैं. इन मिसाइलों में विग्ंस भी हैं, ताकि हवा में ग्लाइड करते समय दिक्कत न हो. इनमें 150 किलोग्राम वजनी वॉरहेड लगाया जाता है. जो डायरेक्टेड हाई एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन होता है.
यह एक दो स्टेज का सॉलिड प्रोपेलेंट वाली मिसाइल है. जो वायुमंडल के बाहर तक जाने की क्षमता रखती है. इसकी गति ही सबसे खतरनाक है. यह एक सेकेंड में 2.5 किलोमीटर चली जाती है. यानी एक घंटे में 9000 किलोमीटर की स्पीड. इसे दागने के लिए ट्रक जैसे वाहन का इस्तेमाल होता है. जिसमें छह कैनिस्टर होते हैं. उनमें से ही ये मिसाइलें निकलती हैं.
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ऐरो-3 ... अंतरिक्ष में किसी भी सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता
एरो-3 मिसाइल सिस्टम इजरायल को वायुमंडल के ऊपर से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई मिसाइल है. इजरायल की सरकार ने कभी यह नहीं बताया कि इसकी मारक क्षमता, गति और सटीकता कितनी है. लेकिन दावा किया है कि यह एरो-2 मिसाइल से ज्यादा तेज गति में चलती है. अंतरिक्ष में किसी भी सैटेलाइट को मार गिराने में सक्षम है. इसे इजरायल की सुरक्षा में 2017 से तैनात कर दिया गया है. इस मिसाइल की बदौलत इजरायल दुनिया के गिने-चुने देशों में शामिल हो चुका है, जिनके पास अंतरिक्ष में उड़ रहे सैटेलाइट्स को मार गिराने की क्षमता है.
डेविड स्लिंग ... आयरन डोम का दमदार साथी है ये हथियार
इजरायल का ताकतवर मध्यम से लंबी दूरी वाली हवाई सुरक्षा प्रणाली. डेविड स्लिंग को मैजिक वांड (Magic Wand) भी कहते हैं. यह सतह से हवा में मार करने वाली और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर है. इसे इजरायल और अमेरिका ने मिल कर बनाया है. इससे आमतौर पर ड्रोन्स, टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल, रॉकेट्स और क्रूज मिसाइलों को मार कर गिराया जा सकता है. या फिर हवा में नष्ट कर दिया जाता है.
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40 से 300 किलोमीटर दूर से आने वाले हथियारों को नष्ट कर सकती है डेविड स्लिंग मिसाइल. यह दो स्टेज की मिसाइल है. इसकी गति 9261 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह इजरायल के कई लेयर वाली एयर डिफेंस सिस्टम का प्रमुख हिस्सा है. आयरन डोम के साथ मिलकर यह इजरायल की राजधानी तेल अवीव की सुरक्षा में तैनात है.
लाइट ब्लेड... छोटे हथियारों पर हमले के लिए कारगर
इजरायल का सबसे विचित्र एयर डिफेंस सिस्टम. गाजा की सीमा पर तैनात है. यह लेजर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम है. इसके जरिए खतरनाक गुब्बारों, पतंगों, छोटे ड्रोन्स, रॉकेट, मोर्टार और तोप के गोलों को आसमान में मार गिराया जाता है. इसे तीन साल पहले इजरायल ने तैनात किया था. इसे ऑप्टी डिफेंस कंपनी ने बनाया. इसके बारे में ज्यादा जानकारी शेयर नहीं की गई है.
आयरन बीम ... ताकतवर लेजर से भष्म हो जाते दुश्मन के रॉकेट
इजरायल अब हमास के रॉकेटों, ग्रैनेड्स और मोर्टार को गिराने के लिए लेजर अटैक कर रहा है. पहली बार इजरायल ने अपने Iron Beam Laser Point Defence System को एक्टिवेट किया है. यह सिस्टम काफी दूर से ही ड्रोन्स, रॉकेट्स, मिसाइल, मोर्टार को आते देखकर उन्हें आसमान में ही खत्म कर देता है.
इस लेजर हथियार को इजरायल ने पूरे देश में तैनात कर दिया है. अभी इसे कुछ साल तैनात नहीं करने की योजना थी लेकिन हमास के हमलों को देखते हुए इजरायल ने इसे पहले ही एक्टिवेट कर दिया. Iron Beam लेजर एयर डिफेंस सिस्टम ने मध्य इजरायल के ऊपर हमास के कई रॉकेट्स को मार गिराया है. इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है.
इसकी अधिकतम क्षमता 10 किलोमीटर है. आयरन बीम से जब एक लेजर निकल कर दुश्मन पर हमला करती है. तब उसकी लागत आती है मात्र 2000 डॉलर यानी 1.66 लाख रुपए. जबकि, आयरन डोम से निकलने वाली एक मिसाइल की कीमत करीब 8 लाख रुपए है. इसमें गोलियां, गोले या रॉकेट नहीं होते. इसलिए जितना मन करे उतना दागो. यानी इसकी मैगजीन खाली नहीं होती.