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Pantsir Air Defence System: पुतिन की सुरक्षा में लगा 'महाहथियार' आएगा भारत, डील डन

यूक्रेन के ड्रोन, मिसाइल और हवाई हमले से बचने के लिए जो हथियार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के घर के चारों तरफ लगा है, अब वही हथियार भारत आएगा. यह एक खास तरह का एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसकी मारक क्षमता की कायल पूरी दुनिया है. आइए जानते हैं Pantsir Air Defence System के बारे में...

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ये है रूस का पंतसिर एयर डिफेंस सिस्टम, जो मध्यम दूरी के किसी भी हवाई हमले को रोकने में सक्षम है.
ये है रूस का पंतसिर एयर डिफेंस सिस्टम, जो मध्यम दूरी के किसी भी हवाई हमले को रोकने में सक्षम है.

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और रूसी हथियार कंपनी Rosoboronexport के बीच उस हथियार को लाने की डील हुई है, जो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा में तैनात है. इस हथियार का नाम है पंतसिर एयर डिफेंस सिस्टम (Pantsir Air Defence SYstem). ये हथियार पुतिन के घर से करीब 3.7 km दूर लगा है, जो किसी भी तरह के हवाई हमले को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है. 

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यह डील इंडिया-रसिया इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन की पांचवीं सबग्रुप मीटिंग में गोवा में हुई. पुतिन के वालदाई लेक के पास स्थित मकान से 3.7 km दूर Pantsir-S1 एयर डिफेंस सिस्टम लगाया गया है. ताकि यूक्रेन से आने वाले किसी भी हवाई हमले का करारा जवाब दिया जा सके. 

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पंतसिर एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल रूस अपने बेहद संवेदनशील इमारतों, महत्वपूर्ण संस्थानों, राष्ट्रीय मूल्य की जगहों और व्यक्तियों की हिफाजत के लिए करता है. इसका असली नाम SA-22 Greyhound है. लेकिन इसे पंतसिर के नाम से जानते हैं. यह सेल्फ प्रोपेल्ड एंटी-एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम है. 

कहां-कहां होता है इस्तेमाल?

मीडियम रेंज वाला यह डिफेंस सिस्टम सतह से हवा में मार करने के लिए बनाया गया है. इसका इस्तेमाल एंटी-एयरक्राफ्ट आर्टिलरी सिस्टम के तौर पर भी करते हैं. रूस इसका इस्तेमाल साल 2012 से करता आ रहा है. सीरिया, यूक्रेन, लीबिया की जंगों में इस्तेमाल हो चुका है. 

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4 सेकेंड में कर लेता है दुश्मन की पहचान

अब तक 200 से ज्यादा मिसाइल सिस्टम बनाए गए हैं. इसे तीन लोग मिलकर चला सकते हैं. इसमें 5 तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा सकता है. ज्यादातर रूस में ही विकसित हैं. ये 4-6 सेकेंड में ही दुश्मन टारगेट को पहचान कर मिसाइल दाग देता है. 

छह वैरिएंट्स हैं, अलग-अलग तरह का इस्तेमाल

इसके कुल मिलाकर छह वैरिएंट्स हैं. जिनका इस्तेमाल रेंज और स्पीड के मुताबिक करते है. इसकी रेंज 15 से लेकर 75 km तक होती है. यह माइनस 50 डिग्री सेल्सियस में भी काम करता है. इसमें मौजूद मिसाइल का वजन 76 से 94 kg तक होता है. लंबाई 10.37 फीट होती है. 

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नए तरह के हथियार से लोडेड है ये डिफेंस सिस्टम

इसमें वॉरहेड के तौर पर मल्टिपल कॉन्टीन्यूअस रॉड लगाए जाते हैं. यानी टक्कर के साथ ही विस्फोट करके फटते रहते हैं. इन हथियारों का वजन 20 kg होता है. जिसमें 5 kg विस्फोटक भी शामिल है. यह मिसाइल अधिकतम 15 km की ऊंचाई तक जा सकती है. इसकी गति 4692 km/hr है. 

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एक मिनट में 700 गोलियां दागने वाली ऑटोमैटिक तोप से लैस

मिसाइल सिस्टम की एक यूनिट पर 30 मिलिमीटर की ऑटोकैनन लगी होती है. आमतौर पर ड्यूल 2A38M कैनन का इस्तेमाल होता है. यह कैनन एक मिनट में 700 राउंड फायर करता है. इसकी रेंज 4 किलोमीटर तक है. 

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