भारतीय सेना ने हाल ही में अपने एक शानदार हथियार का प्रदर्शन किया. यह लाया तो गया था सोवियत संघ से लेकर इसे भारत में ही अपग्रेड करके और खतरनाक बना दिया गया है. इस दोनाली ऑटोकैनन का नाम है जेनिटनाया उस्तानोवका (Zenitnaya Ustanovka- ZU). भारतीय सेना के पास ऐसे करीब 470 हथियार हैं.
इन्हें सोवियत संघ से खरीदने के बाद भारत में ही अपग्रेड किया गया. इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया. ताकि यह दुश्मन को ट्रैक कर सके. पहचान सके. हमला कर सके. भारतीय सेना ने उसका वीडियो जारी किया है.
यह भी पढ़ें: पहली उड़ान के लिए तैयार नया Tejas... पाकिस्तान की हालत होने वाली है खराब
इसका पूरा नाम ZU-23 MM Anti Aircraft Gun System है. इससे कम ऊंचाई पर उड़ रहे आसमानी खतरों को खत्म किया जा सकता है. यह गन सिस्टम गैस ऑरपरेटेड एक्शन पर काम करती है. एक ऑटोकैनन सिस्टम का वजन 0.95 टन है. लंबाई 10 फीट होती है.
चारों तरफ घूमकर कर सकता है तेजी से हमला
इसमें नली की लंबाई 6.5 फीट है. यानी लंबी दूरी तक इसके गोले हमला कर सकते हैं. पूरे सिस्टम की चौड़ाई 9.5 फीट है. ऊंचाई चार फीट है. इसे चलाने के लिए दो लोगों की जरूरत होती है. एक गनर और दूसरा कमांडर.
इसमें 23 मिलिमीटर कैलिबर के गोले लगते हैं.
यह भी पढ़ें: सरकार ने 5th जेनरेशन के स्टेल्थ फाइटर जेट को दी मंजूरी, खौफ में आ जाएंगे चीन-PAK?
यह माइनस 10 डिग्री से लेकर प्लास 90 डिग्री तक के कोण पर दुश्मन पर हमला कर सकता है. वह भी 360 डिग्री घूमते हुए. यह हथियार एक मिनट में 2000 गोलियां दागता है. ढाई किलोमीटर तक यह एकदम सटीक हमला करता है. गोलियां 50 राउंड की बेल्ट के तौर पर लगाई जाती हैं.
कहीं भी ले जा सकते हैं, तैनाती बेहद आसान
इसमें चार तरह की गोलियां लगाई जा सकती हैं. जैसे BZT, OFZ, OFZT और APDS-T. इसमें सबसे कम स्पीड में BZT चलती है. वह 970 मीटर प्रति सेकेंड की गति से दुश्मन की तरफ बढ़ती है. वहीं OFZ और OFZT 980 मीटर प्रति सेकेंड की स्पीड से, जबकि सबसे तेज गोली APDS-T है. यह 1220 मीटर प्रति सेकेंड की गति से दुश्मन की ओर बढ़ती है.
यह भी पढ़ें: अग्नि-3, अग्नि-4 और K4... मिसाइलों को लेकर DRDO का बड़ा प्लान, चीन-PAK की बढ़ेगी टेंशन
अच्छी बात ये है कि इसे किसी भी गाड़ी पर लगाया जा सकता है. या फिर इसे आप सीमा पर तैनात कर दो. ट्रक से बांधकर ले जा सकते हैं. या फिर विमान में लोडकर करके ऊंचाई वाले स्थानों पर पहुंचा सकते हैं. भारत में मौजूद इस हथियार में से 320 तो खींचकर तैनात करने वाले सिस्टम है. जबकि बाकी बचे हथियार ट्रकों पर तैनात हैं.