गाजा का आतंकी संगठन हमास इजरायल पर 9/11 जैसा हमला करने की फिराक में था. तैयारी भी हो रखी थी. हमले की. साजिश की. तैयारी की. हर एक चीज की जानकारी ईरान को थी. यह खुलासा हुआ है लीक हुए कुछ दस्तावेजों से जिसे इजरायली डिफेंस फोर्सेस ने खान युनूस की सुरंगों से हासिल किया था.
द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंग्टन पोस्ट ने इन दस्तावेजों के आधार पर खबरें बनाई हैं. 10 महीने से इजरायल के पास ये दस्तावेज थे, तो ये इस समय क्यों और कैसे लीक हुए. कहा जा रहा है कि इजरायल ने जानबूझकर इन दस्तावेजों का कुछ हिस्सा लीक किया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमास-हिज्बुल्लाह और ईरान के खिलाफ मत बनाया जा सके.
कुछ लोगों का मानना है कि दस्तावेज जारी करने की वजह ये भी हो सकती है कि जब इजरायल ईरान पर हमला करे तो दुनिया उसके साथ रहे. क्योंकि ईरान ने हाल ही में 180 बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल पर दागी थीं. इजरायल ये बताना चाहता है कि हमास के हमले की जानकारी ईरान को बखूबी थी. वह उसे सपोर्ट कर रहा था.
क्या लिखा है दस्तावेजों में?
दस्तावेजों से ये बात साबित होती है कि ईरान को हमास के हमले की जानकारी थी. क्योंकि ईरान और उसका आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह भी हमास के साथ मिलकर इजरायल को खत्म करना चाहते हैं.
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द टाइम्स ने रिपोर्ट छापी है कि अगस्त 2023 में हमास प्रमुख याह्या सिनवार का डिप्टी खलील अल हाया ने अपना प्लान अक्तूबर के हमले से एक महीने पहले ही IRGC के लेबनान कमांडर मोहम्मद सैद इजादी को बता चुका था. इजादी फिलिस्तीनी आतंकी संगठन और ईरानी सरकार के बीच की कड़ी है. जो दोनों की डील कराता है.
ईरान ने हिज्बुल्लाह को सौंपी कमान
हिज्बुल्लाह के इस 9/11 जैसे हमले के प्लान का हिज्बुल्लाह और ईरान ने स्वागत किया था. हमास ने इस प्लान को सफल बनाने के लिए ईरान से पैसे भी मांगे थे. साथ ही इस हमले में शामिल होने का न्यौता भी दिया था. इसके बाद ईरान ने हमास के हमले के समय हिज्बुल्लाह से रॉकेट और मिसाइल दागने को कहा था. खुद नहीं किया.
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हमास असल में 2022 में ये हमला करना चाहा था. जब इजरायल के प्रधानमंत्री याइर लापिड थे. उस समय नेतन्याहू ज्यूडिशियल रिफॉर्म प्लान में लगे थे. उस समय इजरायल में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही थी. साढ़े तीन साल में पांचवीं बार चुनाव हो रहे थे. हमास चाहता था कि हिज्बुल्लाह उसके साथ हमले में रहे. हिज्बुल्लाह ने हमास के हमले के समय इजरायल पर काफी रॉकेट दागे थे.