उत्तर कोरिया ने 11 फरवरी 2024 को अपने अत्याधुनिक 240 मिलिमीटर मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का सटीक परीक्षण किया. देश की मीडिया KCNA ने एक दिन बाद इस टेस्टिंग की जानकारी दुनिया के सामने रखी. इस सिस्टम के बारे में उत्तर कोरिया ने ज्यादा खुलासा नहीं किया है. न ही इस सिस्टम का नाम बताया है.
लेकिन इस रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के विकसित होने से उत्तर कोरिया की ताकत में इजाफा हुआ है. परीक्षण के दौरान लॉन्चर सिस्टम, 240mm कंट्रोल्ड रॉकेट्स और बैलिस्टिक कंट्रोल सिस्टम की भी टेस्टिंग की गई. जो तस्वीरें साझा की गई हैं, उससे पता चलता है कि यह ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर से दागने वाले रॉकेट्स हैं.
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हर लॉन्चर में 22 ट्यूब्स होते हैं. यह ठीक वैसे ही हैं, जैसे उत्तर कोरिया के पास पहले से मौजूद 240 मिलिमीटर के रॉकेट लॉन्चर सिस्टम हैं. इस सिस्टम के परीक्षण से यह बात तो साफ हो जाती है कि उत्तर कोरिया DMZ के पास दक्षिण कोरिया के सामने अपने ज्यादा ताकतवर और नए हथियारों की तैनाती करने की सोच रहा है.
एक्सपर्ट बोले- उत्तर कोरिया तेजी से बढ़ा रहा अपनी ताकत
दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में मौजूद असान इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज के मिलिट्री एक्सपर्ट यांग उक ने कहा कि नया रॉकेट लॉन्चर सिस्टम नॉर्थ कोरिया की आर्टिलरी ताकत बढ़ा रहा है. डर इस बात का है कि कहीं इससे वह मिलिट्री ही नहीं बल्कि दक्षिण कोरिया के आम नागरिकों वाले इलाकों में हमला न कर दे.
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दक्षिण कोरिया को एयर डिफेंस सिस्टम अपडेट करना होगा
यांग ने बताया कि उत्तर कोरिया के पास पहले ही KN-23 नाम का कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल और 600 मिलिमीटर की आर्टिलरी सिस्टम है. नया हथियार बना लेने से उसकी ताकत जरूर बढ़ती है लेकिन दक्षिण कोरिया को खतरा नहीं है. दक्षिण कोरिया के पास भी काफी खतरनाक हथियार हैं. हालांकि साउथ कोरिया को अपने एयर डिफेंस सिस्टम को अपडेट करने की जरूरत है. ताकि कम ऊंचाई से होने वाले मिसाइल या रॉकेट हमले को रोका जा सके.
हथियारों के विकास और खरीद-फरोख्त में रूस का भी हाथ!
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस हथियार के पीछे रूस (Russia) का भी हाथ हो सकता है. क्योंकि इसी तरह के हथियार रूस के पास भी हैं. उत्तर कोरिया अपने इन हथियारों को रूस को बेचकर आर्थिक रूप से मजबूत होने की कोशिश करने का प्रयास कर रहा है. इसलिए वह अपने हथियारों की टेस्टिंग कर रहा है.