भारतीय नौसेना की सर्विलांस और घातक-सटीक हमला करने की ताकत को बढ़ाने के लिए अमेरिका से 31 MQ-9B हंटर किलर ड्रोन की डील हो रही है. इस डील की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2024 है. अगर उस दिन तक डील पर हस्ताक्षर नहीं होते हैं तो ये डील क्लोज हो जाएगी. फिर से सारे दस्तावेज बनाने होंगे. इसमें काफी देर हो सकती है.
रक्षा सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि अमेरिका की तरफ से मिले प्रस्ताव की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2024 है. भारत 31 ड्रोन के लिए 32 हजार करोड़ रुपए देगा. हस्ताक्षर दोनों देशों के अधिकारियों को करनी है. नौसेना की तैयारी ये है कि वो आखिरी तारीख से पहले सभी पेपरवर्क पूरा कर ले. डील पर हस्ताक्षर हो जाए.
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पिछली साल 21 से 24 जून के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका यात्रा पर गए थे. उस दौरान अमेरिका ने 31 HALE ड्रोन का प्रस्ताव दिया था. HALE यानी हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस. मतलब ये MQ-9B हंटर किलर ड्रोन अधिक ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भर सकता है. इसे प्रिडेटर या रीपर भी बुलाते हैं.
प्लान है जल्द से जल्द डील फाइनल करने का
भारत की तीनों सेनाओं की प्लानिंग ये है कि वो इन 31 प्रिडेटर ड्रोन्स को स्वदेशी हथियारों से लैस करेंगी. ड्रोन्स को भारत में ही असेंबल करने की भी तैयारी है. लेकिन अभी इस प्लान को टाल दिया गया है, ताकि ड्रोन्स की डील जल्दी फाइनल हों. क्योंकि इसे बनाने वाली अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नहीं करना चाहती.
इसके अलावा अमेरिका ने यह प्रस्ताव दिया है कि भारत जब कभी अपना HALE ड्रोन बनाएगा तो अमेरिकी एक्सपर्ट उसकी मदद करेंगे. इस ड्रोन के लिए तीन हब बनाए जाएंगे. एक उत्तर भारत में, दूसरा दक्षिण में और तीसरा उत्तर-पूर्व में. फिलहाल चेन्नई के आईएनएस राजाली में दो लीज पर लिए गए प्रिडेटर ड्रोन तैनात हैं.
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अब जानिए इस ड्रोन की खासियत...
दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन है MQ-9B Predator. इससे पहले यह खबर आई थी कि इन ड्रोन्स को चार जगहों पर तैनात किया जाएगा. चेन्नई में आईएनएस राजाली, गुजरात के पोरबंदर में. इनका संचालन भारतीय नौसेना करेगी. वायुसेना और आर्मी इन्हें गोरखपुर और सरसावा एयरफोर्स बेस पर संचालित करेंगे. क्योंकि इतना लंबा रनवे यही है.
गोरखपुर और सरसावा बेस से चीन के लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश पर निगरानी रखना आसान हो जाएगा. 15 ड्रोन्स समुद्री इलाकों की निगरानी के लिए होंगे. बाकी चीन और पाकिस्तान की सीमाओं की निगरानी के लिए तैनात किए जाएंगे.
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इसी ड्रोन से अलकायदा के सरगना अयमान अल-जवाहिरी को मारा गया था. यह किसी भी तरह के मिशन के लिए भेजा जा सकता है. जैसे- सर्विलांस, जासूसी, सूचना जमा करना या फिर दुश्मन के ठिकाने पर चुपके से हमला करना. ज्यादा समय तक और ज्यादा ऊंचाई से निगरानी करने में सक्षम हैं.
1900 km की रेंज, 1700 kg के हथियारों के साथ उड़ान
इसकी रेंज 1900 KM है. यह अपने साथ 1700 KG वजन का हथियार लेकर जा सकता है. इसे दो कंप्यूटर ऑपरेटर्स ग्राउंड स्टेशन पर बैठकर वीडियो गेम की तरह इसे चलाते हैं. इस ड्रोन की लंबाई 36.1 फीट, विंगस्पैन 65.7 फीट, ऊंचाई 12.6 फीट होती है. ड्रोन का खाली वजन 2223 Kg होता है.
ड्रोन में 1800 किलोग्राम ईंधन की क्षमता होती है. इसकी गति 482 km/hr है. जो 50 हजार फीट की ऊंचाई से दुश्मन को देखकर उसपर मिसाइल से हमला कर सकता है. आमतौर पर 25 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ाया जाता है.
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सात हार्डप्वाइंट... मिसाइल लगाएं या बम, या दोनों
एमक्यू 9 प्रीडेटर पर हथियारों के नाम पर मिसाइल लगाए जाते हैं. इसमें सात हार्ड प्वाइंट होते हैं, दो इनबोर्ड स्टेशन, दो मिडल स्टेशन एक आउटबोर्ड स्टेशन और सेंटर स्टेशन. इसमें 4 AGM-114 Hellfire मिसाइलें लगी होती हैं, ये हवा से जमीन पर सटीकता से हमला करती हैं.
इसके अलावा दो लेजर गाइडेड GBU-12 Paveway II बम भी लगाए जाते हैं. इन दोनों के बजाय आप इस ड्रोन पर अलग-अलग तरीके के हथियारों का उपयोग कर सकते हैं. जैसे- GBU-38, जो एक ज्वाइंट डायरेक्ट अटैक एम्यूनिशन है. इसके अलावा ब्रिमस्टोन मिसाइल भी लगाए जा सकते हैं. सभी मिसाइलों और बमों का उपयोग जरूरत के मुताबिक होता है.