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गलवान संघर्ष के बाद चीन ने नहीं बदली सेना की पोजीशन, सीमा पार बढ़ा रहा ताकत... पेंटागन की रिपोर्ट

भारत भले ही चीन के साथ 6 प्वाइंट्स पर समझौता करके आया हो. लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की रिपोर्ट खतरनाक खुलासा करती है. 2020 के विवाद के बाद चीन ने अब तक LAC की दूसरी तरफ सैन्य ताकत बढ़ाई है. एयरबेस और सड़कें बनाई हैं. उसकी तैयारी लंबे समय की दिख रही है.

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चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग के काशगर स्थित खुंजेराब पास के पेट्रोलिंग करते चीन के सैनिक. (फाइल फोटोः AFP)
चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग के काशगर स्थित खुंजेराब पास के पेट्रोलिंग करते चीन के सैनिक. (फाइल फोटोः AFP)

चीन लगातार लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) की तरफ मिलिट्री बिल्ड अप बढ़ा रहा है. यानी सैन्य ताकत और ढांचागत निर्माण. ये खुलासा हुआ है अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस ने 2024 की सालाना रिपोर्ट में.इसमें कहा गया है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) लगातार अपनी सेना की ताकत को LAC के आसपास बढ़ा रहा है. साल 2020 में गलवान संघर्ष के बाद ये बढ़ते जा रहे हैं. उसने अपनी सेना पीछे नहीं खींची है. 

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रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की सबसे बड़ी कमांड है वेस्टर्न थियेटर कमांड (WTC). ये लद्दाख के पास वाली कमांड है. यहां पर सीमा के पास चीन अपनी ताकत को मजबूती से बढ़ा रहा है. यहां पर बीजिंग में मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर दिया है. सड़कें बनाई हैं. एयरबेस बनाए हैं. लॉजिस्टिक फैसिलिटी बनाई है. 

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India-China Border Dispute
गलवान के नजदीक कोंगका पास के बना चीन का सैन्य बेस. (फाइल फोटोः एपी/मैक्सार)

चीन इनकी मदद से LAC पर तैनात कई ब्रिगेड्स को सहायता प्रदान कर सकता है. या नए ब्रिगेड तैनात कर सकता है. इस हरकत से पता चलता है कि चीन विवादित सीमा और इलाके को लेकर क्या तैयारी कर रहा है. ताकि भारत के डिफेंसिव मैकेनिज्म को काउंटर कर सके. 

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पेंटागन की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु

1. 2020 के बाद से निर्माण...  भारत और चीन के बीच 21 दौर की कोर कमांडर-स्तर की वार्ता के बावजूद, चीन की सेना ने 2020 के बाद से स्थापित अपनी अग्रिम स्थिति बनाए रखी है. इसमें डी-एस्केलेशन के कोई संकेत नहीं हैं.

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2. सैन्य बुनियादी ढांचे में वृद्धि... रिपोर्ट में सीमा क्षेत्रों में PLA की लंबे समय तक तैनाती को सक्षम करने वाले बेस, एयरफील्ड और अन्य लॉजिस्टिक नोड्स के निर्माण का विवरण दिया गया है. 

3. वेस्टर्न थिएटर कमांड पर फोकस... WTC का प्राथमिक मिशन तिब्बत और शिनजियांग में भारत के साथ चीन की सीमा की सुरक्षा करना है. इसमें संयुक्त हथियार ब्रिगेड, यूएवी यूनिट और मिसाइल बेसों सहित अपने शस्त्रागार को आधुनिक बनाना शामिल है. 

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4. आतंकवाद विरोधी और क्षेत्रीय स्थिरता...  घरेलू स्तर पर, WTCको तिब्बत और शिनजियांग में कथित अलगाववाद और आतंकवाद को दबाने का काम सौंपा गया है.

5. शी जिनपिंग के निर्देश... रिपोर्ट में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस्लाम को कम करने और शिनजियांग में धार्मिक और जातीय गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण पर जोर देने का उल्लेख किया गया है. 

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भौगोलिक और रणनीतिक तौर पर क्या असर होगा? 

पेंटागन रिपोर्ट में भारत-चीन सीमा पर बढ़ते तनाव पर जोर दिया गया है, जहां चीन की सेना अपनी उपस्थिति को मजबूत करने और भारतीय सैन्य अभियानों को रोकने के लिए निरंतर निर्माण कर रहा है. चीन ने सीमा क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है, जिसमें सड़कें, एयरफील्ड और लॉजिस्टिक सुविधाएं शामिल हैं. 

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गलवान घाटी में मौजूद चीन का पोस्ट. (फाइल फोटोः एपी)

यह निर्माण चीन की लंबे समय तक तैनाती के लिए तैयारी को दर्शाता है, जिससे भविष्य में झड़पों की संभावना के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं. इस बीच, भारत भी एलएसी के साथ अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं और सैन्य तैनाती शामिल हैं. 

यह स्थिति चीन-भारत संबंधों में एक महत्वपूर्ण फ्लैशपॉइंट बनी हुई है, जिसके क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए जरूरी हैं. इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को हल करने के लिए निरंतर सावधानी और कूटनीति की आवश्यकता है. 

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