अमेरिका ने 5 अप्रैल 2024 को अपने पूर्वी तट पर सेकेंड मरीन एयरक्राफ्ट विंग के तहत F-35 Lightning II फाइटर जेट का पहला स्क्वॉड्रन तैनात कर दिया है. इसका नाम मरीन फाइटर अटैक स्क्वॉड्रन है. यह स्क्वॉड्रन अब अपनी पूरी क्षमता के साथ अमेरिका के पूर्वी तट की निगरानी और सुरक्षा करेगा.
साथ ही प्रशांत महासागर में रूस, चीन और इस्लामिक आतंकियों की हरकतों पर नजर रखेगा. जरूरत पड़ने पर उनकी किसी भी तरह के उकसावे वाली कार्रवाई को करारा जवाब देगा. अमेरिका की योजना है कि पूर्वी तट पर स्क्वॉड्रन एक्टिव करने के बाद इस शानदार फाइटर जेट को पूरी दुनिया में तैनात किया जाएगा.
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इसके जरिए मरीन एयर-ग्राउंड टास्क फोर्स नजदीकी हवाई सपोर्ट दे सकता है. स्ट्राइक ऑपरेशन कर सकता है. रीकॉनसेंस कर सकता है. एंटी-एयर वॉरफेयर में भाग ले सकता है. दुश्मन के हवाई हमले का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है. इलेक्ट्रॉनिक अटैक, सपोर्ट और एक्टिव एयर डिफेंस में मदद कर सकता है.
ये फाइटर जेट इतना जरूरी क्यों है?
अमेरिका के फाइटर जेट का पूरा नाम है F-35 लाइटनिंग 2. यह हर मौसम में उड़ान भरने वाला स्टेल्थ मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. यह एयरसुपीरियरिटी और स्ट्राइक मिशन के लिए बनाया गया है. यह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, जासूसी, सर्विलांस, रीकॉन्सेंस जैसे मिशन को भी पूरा कर सकता है.
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इसके तीन वैरिएंट मौजूद हैं- पहला कन्वेंशनल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (CTOL). इसे F-35A कहते हैं. दूसरा है शॉर्ट टेक-ऑफ एंड वर्टिकल लैंडिंग (STOVL). इसे F-35B कहते हैं. तीसरा है- कैरियर बैस्ड. यानी F-35C. इसे अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन कंपनी बनाती है.
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गति और छिपकर हमला इसकी ताकत
इसे एक ही पायलट उड़ाता है. लंबाई 51.4 फीट, विंगस्पैन 35 फीट और ऊंचाई 14.4 फीट है. अधिकतम गति 1976 KM/घंटा है. कॉम्बैट रेंज 1239 KM है. अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें 4 बैरल वाली 25 मिमी की रोटरी कैनन लगी है. जो एक मिनट में 180 गोलियां दागती है. इसमें चार अंदरूनी और छह बाहरी हार्डप्वाइंट्स हैं. हवा से हवा, हवा से सतह, हवा से शिप और एंटी-शिप मिसाइलें तैनात की जा सकती है. इसके अलावा चार तरीके के बम लगाए जा सकते हैं.