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भारतीय नौसेना को INS Tushil से क्या फायदा होगा... ये जंगी जहाज देश के लिए कितना जरूरी?

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 9 दिसंबर 2024 को रूस में भारतीय नौसेना के नए जंगी जहाज INS Tushil को कमीशन किया. ये जंगी जहाज एडवांस स्टेल्थ क्लास मिसाइल फ्रिगेट है. लेकिन इससे भारत और भारतीय नौसेना को किस तरह से फायदा होगा? आइए जानते हैं कि ये युद्धपोत भारत के लिए कितना जरूरी है?

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ये है आईएनएस तुशिल स्टेल्थ मिसाइल फ्रिगेट जिसे 9 दिसंबर को राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना में कमीशन किया है.
ये है आईएनएस तुशिल स्टेल्थ मिसाइल फ्रिगेट जिसे 9 दिसंबर को राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना में कमीशन किया है.

INS Tushil रूस से भारत को मिलने वाला एडवांस युद्धपोत है. तुशिल के आने से भारतीय नौसेना की ताकत इंडो-पैसिफिक रीजन में बढ़ेगी. तुशिल इस काम में महत्वपूर्ण योगदान देगा. इसके जरिए भारत की जियोपॉलिटिकल इंट्रेस्ट को सुरक्षित रखा जा सकता है. साथ ही देश के समंदर और इंडियन ओशन रीजन को. 

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तुशिल एक मिसाइल फ्रिगेट है. यानी इसमें ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें लगी हैं. ये दुनिया की सबसे तेज चलने वाली क्रूज मिसाइल है. जिसे रूस और भारत ने मिलकर बनाया है. इस मिसाइल से भारत के मेक इन इंडिया मुहिम को बढ़ावा मिलता है. इस युद्धपोत में इस मिसाइल की तैनाती से दुश्मन की रूह भी कांपेगी. 

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इस जंगी जहाज में हथियारों को बेहतरीन संतुलन है. इसमें स्टेल्थ तकनीक है. यह दुश्मन के राडार पर आसानी से नहीं दिखेगा. इसकी डिजाइन ऐसी है कि ये लो-राडार विजिबिलिटी को फॉलो करता है. इतना ही नहीं अगर जरूरत पड़ी तो यह जहाज ऑटोमैटिकली ऑपरेट कर सकता है. यानी संचालन, हमला और बचाव आदि. 

INS Tushil, Indian Navy, Russia

भारत ने इसके लिए रूस को ही क्यों चुना? 

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भारत चाहता तो अमेरिका, फ्रांस या इजरायल या किसी अन्य देश से युद्धपोत बनवा सकता था. लेकिन रूस के अलावा कोई भी देश अपनी तकनीकी भारत के साथ शेयर करना नहीं चाहता था. इसलिए भारत ने रूस को चुना. रूस ने भी पुराने दोस्त को एडवांस मिलिट्री टेक्नोलॉजी दी. 

दूसरी बात ये है कि भारत को पता है कि रूस के पास दुनिया की सबसे एडवांस शिपबिल्डिंग तकनीक है. रूस भारत के मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत मदद करने के लिए भी तैयार रहता है. ब्रह्मोस मिसाइल इसी का नतीजा है. इसके अलावा असॉल्ट राइफल और टैंक जैसे कई हथियार ऐसे ही बन रहे हैं. 

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तुशिल का मतलब है अभेद्य कवचम

इसके नाम यानी तुशिल का मतलब होता है अभेद्य कवचम. यानी प्रोटेक्टर शील्ड. इसका ध्येय वाक्य है- निर्भय, अभेद्य और बलशील. यह भारतीय नौसेना की ताकत और समुद्री दमखम को दिखाती है. इसे क्रिवाक क्लास-3 फ्रिगेट यानी प्रोजेक्ट 1135.6 के तहत बनाया गया है. जो तलवार क्लास का अपग्रेडेड वर्जन है. 

INS Tushil, Indian Navy, Russia

अब जानते हैं इस युद्धपोत की ताकत

आईएनएस तुशिल का समंदर में डिस्प्लेसमेंट 3850 टन है. इसकी लंबाई 409.5 फीट, बीम 49.10 फीट और ड्रॉट 13.9 फीट है. ये समंदर में अधिकतम 59 km/hr की रफ्तार से चल सकता है. गति को 26 km/hr किया जाए तो ये 4850 km की रेंज कवर कर सकता है. 56 km/hr की स्पीड से चले तो 2600 km तक जा सकते हैं.

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180 नौसैनिकों के साथ 30 दिन समंदर में रह सकता है  

यह जंगी जहाज 18 अधिकारियों समेत 180 सैनिकों को लेकर 30 दिन तक समंदर में तैनात रह सकता है. उसके बाद इसमें रसद और ईंधन डलवाना पड़ता है. ये जंगी जहाज इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस हैं. साथ ही 4 केटी-216 डिकॉय लॉन्चर्स लगे हैं. इसमें 24 Shtil-1 मीडियम रेंज की मिसाइलें तैनात हैं. 

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ऐसे हथियारों से लैस, जो दुश्मन की हेकड़ी निकाल दें

8 इगला-1ई, 8 वर्टिकल लॉन्च एंटी-शिप मिसाइल क्लब, 8 वर्टिकल लॉन्च एंटी-शिप और लैंड अटैक ब्रह्मोस मिसाइल भी तैनात है. इसमें एक 100 मिलिमीटर की A-190E नेवल गन लगी है. इसके अलावा एक 76 mm की ओटो मेलारा नेवल गन लगी है. 2 AK-630 CIWS और 2 काश्तान CIWS गन लगी हैं. इन खतरनाक बंदूकों के अलावा दो 533 मिलिमीटर की टॉरपीडो ट्यूब्स हैं. एक रॉकेट लॉन्चर भी तैनात किया गया है. इस जंगी जहाज पर एक कामोव-28 या एक कामोव-31 या ध्रुव हेलिकॉप्टर लैस हो सकता है.

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