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आग के गोले, जलते हुए तीर और विस्फोटक कॉकटेल्स ... प्राचीन हथियार क्यों दाग रहे हैं इजरायली सैनिक, देखिए Video

Israel के सैनिक लेबनान की सीमा पर 'बाहुबली' फिल्म में दिखाए गए हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. जैसे आग के गोले फेंकने वाले गुलेल, आग लगी तीर और मोल्तोव कॉकटेल्स. आइए जानते हैं इन हथियारों का इस्तेमाल क्यों हो रहा है? देखिए इनके इस्तेमाल का Video...

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तीन तस्वीरों के कॉम्बों में बाएं... आग का गोला फेंकता गुलेल, ऊपर जलती तीर दागत सैनिक और नीचे दाएं मोल्तोव कॉकटेल्स दागते सैनिक.
तीन तस्वीरों के कॉम्बों में बाएं... आग का गोला फेंकता गुलेल, ऊपर जलती तीर दागत सैनिक और नीचे दाएं मोल्तोव कॉकटेल्स दागते सैनिक.

आजकल इजरायली सैनिक आधुनिक हथियारों को छोड़कर मध्यकालीन युग के हथियराों का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं. वो ट्रेबुचेट से आग के गोले फेंक रहे हैं. ट्रेबुचेट यानी मध्यकालीन समय में जंग के दौरान पत्थर या आग लगे पत्थर फेंकने वाला यंत्र. आग लगी तीर दाग रहे हैं यानी फ्लेमिंग ऐरो. 

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इतना ही नहीं मोर्टार दागने वाली बंदूकों जैसी प्रेशर पाइप से मोल्तोव कॉकेटेल्स यानी आग पकड़ने वाले तरल पदार्थों से भरी बोतलें दाग रहे हैं. जब इस बारे में मीडिया ने इजरायली फोर्सेस और डिफेंस एक्सपर्ट्स से बात की तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ. असल में इन हथियारों का इस्तेमाल ज्यादातर लेबनान बॉर्डर पर दिखाई दे रहा है. 

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डिफेंस एक्सपर्ट्स ने बताया कि लेबनान की सीमा बड़े-बड़े पत्थरों से ढंकी है. बड़े पैमाने पर पत्थर ही पत्थर हैं. कई जगहों पर कंटीली झाड़ियां हैं. ऐसे में इजरायली सैनिकों को तैनाती में दिक्कत आती है. इसलिए उत्तरी सीमा पर तैनात इजरायली सैनिकों ने मध्यकालीन समय के हथियारों को फिर से बनाकर उनका इस्तेमाल करना शुरू किया है. 

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क्या हैं ये मध्यकालीन हथियार? 

जैसे ट्रेबुचेट... मध्यकालीन समय का आर्टिलरी हथियार था. जिसमें यंत्रों से चलने वाले गुलेल में पत्थर या जलते हुए पत्थर रखकर दुश्मन की तरफ फेंके जाते थे. ताकि सूखी जगहों पर आग लग जाए और दुश्मन आगे बढ़ने से रुके. या फिर इतना धुआं हो कि उससे अपने बंकरों, सैनिकों और पोस्ट की सुरक्षा की जा सके. 

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बिना धमाके या विस्फोट के दागे जाते हैं

तेल अवीव यूनिवर्सिटी के मिलिट्री आर्कियोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. गाय स्टीबल ने बताया कि ट्रेबुचेट बहुत ज्यादा ताकत पैदा करता है. ये आग के गोले दीवार के अंदर से फेंके जाते हैं. इसलिए इनका सही लोकेशन नहीं मिलता. दुश्मन को इनके आने का पता तब चलता है, जब ये आसमान में होते हैं. कई बार पता भी नहीं चलता क्योंकि इन्हें दागने में धमाका या विस्फोट नहीं होता. दुश्मन दीवार के पीछे ही रहता है. 

झाड़ियों को जलाकर खत्म करने के लिए 

डॉ. गाय ने बताया कि इन हथियारों से ऐसी जगहों पर भी हमला किया जा सकता है, जो दीवार के पीछे से नहीं दिखते. बस उन्हें सटीक कोण पर रखकर दागना होता है. इससे अपने बंकर और पोस्ट की किलेबंदी भी होती है. इजरायली सैनिक इनका इस्तेमाल जमीन खाली कराने के लिए करते हैं. ताकि ऊंची-ऊंची सूखी और कंटीली झाड़ियां जलकर खत्म हो जाएं. साथ ही इन हथियारों की मदद से किलेबंदी भी की जा सकती है. 

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इन सभी हथियारों का इस्तेमाल असल में सूखी कंटीली झाड़ियों में आग लगाकर उन्हें साफ करने के लिए किया जा रहा है. ताकि सैनिक मौका पड़ने पर लेबनान की सीमा पर हमला कर सके. डॉ. गाय ने कहा कि सिर्फ ट्रेबुचेट ही नहीं बल्कि आग वाले तीर और मोल्तोव कॉकटेल्स भी इस काम में काफी ज्यादा मदद कर सकते हैं.

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