हाल के सालों में हिंद महासागर में चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों की मौजूदगी में भारी बढ़ोतरी हुई है. चीन इनकी संख्या को सर्वेक्षणों और समुद्री लुटेरों के खिलाफ ऑपरेशन की आड़ में बढ़ाता जा रहा है. चीनी नौसैनिक गतिविधियों पर भारतीय नौसेना की कड़ी नजर रहती है और अब भारत की निगरानी क्षमता में और अधिक विस्तार होने वाला है. भारतीय नौसैना में अब छह नए पी-8आई (P-8I) समुद्री गश्ती विमान शामिल होने वाले हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे में भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में जानकारी दी गई है कि इन छह पी-8आई विमानों को लेकर समझौता लगभग पूरा होने वाला है. बिक्री के लिए सभी शर्तों पर भी सहमति बन गई है.
नौसेना में शामिल 6 विमानों की खेप भारत की समुद्री क्षमता मजबूत करेगी, खासकर हिंद महासागर में. इन विमानों के आने से प्रतिकूल गतिविधियों की निगरानी करने और उनका मुकाबला करने की नौसैना की क्षमता बढ़ेगी.
भारत के पास वर्तमान में कितने P-8I विमान?
वर्तमान में भारत के पास 12 P-8I विमान हैं. आठ विमानों के पहले बैच को 2009 में नौसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद 2016 में चार और नए विमान खरीदे गए थे. नौसैना ने 10 अतिरिक्त विमानों का अनुरोध किया था लेकिन उसे पूरा कोटा नहीं मिल सका.
नवंबर 2019 में छह नए पी-8आई के लिए मंजूरी दे दी गई. इस निर्णय को मई 2021 में अमेरिकी विदेश विभाग से मंजूरी मिली. इन विमानों को विशेष रूप से लंबी दूरी की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है और ये बहुत गहराई पर भी पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं और उन्हें बेअसर कर सकते हैं.
पी-8आई में लगी एडवांस टेक्नोलॉजी विमान को समुद्र में गहराई तक स्कैन करने के साथ-साथ 41,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता देता है. यह एक बार में 8,300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है और इसमें 11 हार्ड पॉइंट लगे हैं, जिनमें एंटी-शिप मिसाइल, क्रूज मिसाइल, हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन वारफेयर चार्ज शामिल हैं.
पी-8आई के साथ-साथ भारतीय नौसेना में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए एमक्यू-9बी ड्रोन को भी शामिल किया जा रहा है. 2029 तक अमेरिका 31 एमक्यू-9बी ड्रोन की डिलीवरी करेगा. ये ड्रोन हिंद महासागर की निगरानी करेंगे जहां 50 से अधिक नौसैनिक जहाज और 20,000 कमर्शियल जहाज मौजूद रहते हैं.
पी-8आई और एमक्यू-9बी ड्रोन मिलकर भारतीय नौसेना की सामरिक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेंगे और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों को सुरक्षित करेंगे.