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DBO Ladakh: ये है दुनिया का सबसे ऊंचा एयरफील्ड... जानिए क्यों डरते हैं पड़ोसी देश इससे?

16,700 फीट की ऊंचाई पर बना है दुनिया का सबसे ऊंचा एयरफील्ड. नाम है DBO Ladakh. ये वही जगह है जिसकी वजह से पाकिस्तान और चीन की हालत खराब रहती है. यहीं से भारतीय सेना सियाचिन ग्लेशियर और अन्य फॉरवर्ड पोस्ट पर सैनिक भेजती है. हथियार तैनात करती है. देश की सीमा की सुरक्षा करती है.

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World's Highest Airfield
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लद्दाख के उत्तरी हिस्से में मौजूद है दुनिया का सबसे ऊंचा एयरफील्ड. भारतीय सेना इसे DBO Ladakh बुलाती है. लेकिन पूरा नाम है दौलत बेग ओल्डी (Daulat Beg Oldi). ऊंचाई है 16,700 फीट. यानी 5100 मीटर. काराकोरम रेंज और उत्तरी लद्दाख की पहाड़ियों के बीच मौजूद तारीम बेसिन (Tarim Basin) में बनी यह एयरफील्ड भारत की सुरक्षा के हिसाब से बेहद महत्वपूर्ण है. यहीं से भारतीय सेना पाकिस्तान और चीन पर कड़ी निगरानी रखती है. 

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यहां पर 1960 में भारतीय सेना ने अपना आउटपोस्ट बनाया था. इसके बाद यहां पर एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) बनाया गया. DBO को अब सड़क से भी जोड़ दिया गया है. ये 235 किलोमीटर लंबी सड़क दारबुक-श्योक-डीबीओ रोड के नाम से जानी जाती है. इसे बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन ने 2019 में बनाया था. 

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दौलत बेग ओल्डी से LAC 8 किलोमीटर और चीन के नियंत्रण वाला अक्साई चिन मात्र 9 किलोमीटर दूर है. यहां पर तापमान माइनस 55 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है. मौसम किसी भी समय बदल जाता है. बेहद ठंडी हवाएं चलती हैं. डीबीओ के आसपास कोई जंगल या पेड़-पौधे नहीं हैं. जो हैं भी वो बेहद कम मात्रा में. यहां फोन नेटवर्क भी नहीं है. 

क्या है एडवांस लैंडिंग ग्राउंड? 

भारतीय सेना (Indian Army) और भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) यहां पर मिट्टी वाले एयरस्ट्रिप को संचालित करती है. यहां पर पहली लैंडिंग भारत-चीन युद्ध के समय 1962 में स्क्वॉड्रन लीडर सीकेएस राजे ने की थी. इसके बाद 2008 में इंडियन एयरफोर्स के An-32 कार्गो प्लेन की लैंडिंग कराई गई. क्योंकि बीच में आए भूकंप की वजह से ग्राउंड की मिट्टी कमजोर हो गई थी. फिर उसे ठीक किया गया. इसके बाद यहां पर C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान को उतारा गया. 

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13 हजार से 16 हजार फीट की ऊंचाई पर है 235 km लंबी सड़क

2001 में भारत सरकार ने योजना बनाई की लेह से डीबीओ तक कार चलाने लायक सड़क बनाई जाए. यह सड़क बनकर तैयार हुई 2019 में. ये 235 किलोमीटर लंबी सड़क दारबुक-श्योक-डीबीओ रोड के नाम से जाती है. यह रोड 13 हजार फीट से लेकर 16 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाई गई है. जिसमें श्योक नदी की घाटी पूरी होती है. बीच में मुर्गो, बुर्त्सा नाला और देपसांग के मैदानी इलाके पड़ते हैं.  

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