यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर 15 सितंबर 2024 को मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमला किया. कहा जा रहा है कि हमला हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों से किया गया. मिसाइलों ने 2040 किलोमीटर की दूरी मात्र साढ़े 11 मिनट में तय पूरा किया. अब दुनिया हैरान इस बात से है कि हूती विद्रोहियों के पास ये टेक्नोलॉजी कहां से आई?
हूती मिलिट्री के प्रवक्ता ने याहया सरिया ने कहा कि हमारी मिसाइलों ने इजरायल को टारगेट किया है. इजरायल की फोर्सेस ने कहा कि एयर सायरन बज रहे थे. साथ ही धमाकों के आवाज आ रहे थे. कई मिसाइलों को आयरन डोम और ऐरो एयर डिफेंस सिस्टम ने आसमान में ही ध्वस्त कर दिया. लेकिन कुछ गिरे. हालांकि नुकसान नहीं हुआ.
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यहां देखिए हूती विद्रोहियों द्वारा मिसाइल जारी Video
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हूती विद्रोहियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि ऐसी मिसाइलें यमन के पास कहां से आईं. यमन के हूती विद्रोहियों को इस तरह की ताकतवर बैलिस्टिक मिसाइलें ईरान से मिल सकती हैं. लेकिन ईरान के पास भी 1400 किलोमीटर की फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइल हैं. इतनी दूर नहीं जा सकतीं.
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हूती विद्रोहियों ने वीडियो जारी किया पर मिसाइल का नाम नहीं बताया
याहया ने कहा कि हमारी मिसाइलों ने इजरायल के याफा इलाके में मिलिट्री टारगेट पर 11 मिनट में हमला किया. जबकि दूरी 2040 किलोमीटर थी. इन मिसाइलों से 20 लाख इजरायली लोगों में डर बैठ गया. याहया ने इस मिसाइल का नाम तो नहीं बताया. लेकिन इसके वीडियो जारी किए हैं.
इस बीच इजरायल ने कहा कि किसी भी तरह के हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल ने हमें नुकसान नहीं पहुंचाया है. ये सारी मिसाइलें बैलिस्टिक थीं, लेकिन अपने रास्ते में इसने कुछ देर के लिए हाइपरसोनिक गति हासिल की थी. जितनी मिसाइलें आईं उनमें से सिर्फ 20 ही गिरी, लेकिन खुले इलाकों में. किसी को नुकसान नहीं हुआ.
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मिसाइलों को ट्रैक नहीं कर पाए अमेरिकी युद्धपोत और सऊदी अरब
दिक्कत ये है कि यमन से इजरायल तक जाने के दौरान मिसाइल को लाल सागर में मौजूद अमेरिकी युद्धपोत माइकल मर्फी और फ्रैंक ई पीटरसर जूनियर और एफएस चेवालियर पॉल न रोक पाए. न इजरायल और सऊदी अरब का एयर डिफेंस सिस्टम रोक पाया.