
CUET 2023: 12वीं के बाद हायर एजुकेशन के लिए कॉलेजों में दाखिले की दौड़ शुरू गई है. कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यूजी (CUET UG) का रिजल्ट जारी होने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (यूजी) के दूसरे चरण के तगह CSAS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिए हैं. जो छात्र पहले चरण यानी सीयूईटी यूजी में क्वालीफाई हुए हैं, वे दूसरे चरण में पात्रता मानदंडों के अनुसार अपने पसंदीदा प्रोग्राम और कॉलेज संयोजन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का मौका दिया है. छात्र डीयू एडमिशन के ऑफिशियल वेबसाइट ugadmission.uod.ac.in के माध्यम से 24 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. अगर सीयूईटी को लेकर कोई कन्फ्यूजन है तो इस खबर में दी गई जानकारी आपके डाउट्स क्लियर कर सकती है.
क्या है सीयूईटी?
यह एक कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) है जिसका स्कोर आपको स्नातक दाखिला दिलाएगा. ये टेस्ट राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाती है. यूजीसी के अनुसार राज्यों के विश्वविद्यालय, प्राइवेट विश्वविद्यालय और डीम्ड विश्वविद्यालय भी इस प्रवेश परीक्षा के आधार पर अपने यहां एडमिशन दे सकते है.
कॉलेज में एडमिशन कैसे होगा?
सीयूईटी के जरिए देश की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लिए जाएंगे. इनमें सेंट्रल यूनिवर्सिटी, डीम्ड यूनिवर्सिटी, प्राइवेट यूनिवर्सिटी और स्टेट यूनिवर्सिटी शामिल हैं. जेएनयू, जामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत सभी विश्वविद्यालय अपनी अलग अलग काउंसलिंग कराएंगे. सीयूईटी रिजल्ट आने के बाद आपको अपने CUET पर्सेंटाइट के आधार पर यूनिवर्सिटीज में अप्लाई करना होगा. हर यूनिवर्सिटी कॉलेज वाइज और कोर्स वाइज अपना अलग-अलग कट-ऑफ जारी करेगी. अगर आप उस कट ऑफ में आते हैं तो आपको एडमिशन मिलेगा. यूनिवर्सिटीज अपने स्तर पर लिस्ट तैयार करेंगी.
CSAS के माध्यम से DU में एडमिशन तीन फेज में आयोजित किया जाएगा. दूसरा चरण में CSAS 2022 एप्लीकेशन फॉर्म जमा करना होगा और तीसरे चरण में प्रोग्राम का चयन, चॉइस फिलिंग या प्रेफरेंस भरना, सीट अलॉटमेंट और कॉलेज एडमिशन होगा.
पर्सेंटाइल निकालने का तरीका क्या है?
100 में से 80 मार्क्स मिलना परसेंटेज है लेकिन पर्सेंटाइल का मतलब है कि आपको कितने छात्रों से ज्यादा नंबर मिले हैं. मान लीजिए आपको 80 पर्सेंटाइल मिला है तो इसका मतलब है कि आपने 80 छात्रों से ज्यादा मार्क्स हासिल किए हैं. इसे निकालने के लिए एक उदाहरण से समझते हैं- माना कि एक शिफ्ट में किसी छात्र को 80 मार्क्स मिले हैं और 80 प्रतिशत मार्क्स लाने वाले छात्रों की संख्या 20,000 है जबकि शिफ्ट में कुल छात्रों की संख्या 50,000 थी तो 100x20,000/50,000= 40 पर्सेंटाइल.
equi-percentile क्या है?
इस बार यूजी कोर्स में एडमिशन के लिए एक कदम बढ़ाकर नियोजित सम-प्रतिशत प्रणाली (equi-percentile system) के जरिए सीयूईटी पर्सेंटाइल निकाला गया है. परीक्षा देने वाले छात्रों की बड़ी संख्या, कई शिफ्ट और कई सेट के चलते इस यूनिक नॉर्मलाइज्ड सिस्टम को लागू किया गया है. सीयूईटी-यूजी में इक्यू-पर्सेंटाइल मैथेज में एक ही सेशन के अंदर दूसरों के रॉ स्कोर की तुलना में प्रत्येक उम्मीदवार के लिए उनके रॉ स्कोर के आधार पर प्रतिशत की गणना करना शामिल है.
कितने CUET पासिंग मार्क्स से कहां, किस कोर्स में मिल सकता है एडमिशन
सामान्य वर्ग के लिए (संभावित)
कॉलेज | CUET पासिंग मार्क्स | कोर्स |
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) | 400-500 | बीए (एच) राजनीति विज्ञान, बीए (एच) इतिहास, बीए (एच) संस्कृत |
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) | 170-200 | बीए (एच), बीएससी जीवविज्ञान |
बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली | 120-300 | बीबीए, बीए (एच) हिंदी, बीए (एच) इतिहास |
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (एयू) | 400-500 | बीकॉम, बीए एलएलबी, बीएफए |
ओबीसी के लिए (संभावित)
कॉलेज | CUET पासिंग मार्क्स | कोर्स |
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) | 200-300 | बीए (ऑनर्स |
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) | 147-200 | बीएससी जीवविज्ञान, बीए (एच), एलएलबी |
बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली | 100-300 | बीए (हिंदी), बीए (एच) समाजशास्त्र, बीए (एच) अर्थशास्त्र |
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (एयू) | 300-400 | बीकॉम, बीए अरबी, बीए उर्दू |
(नोट: ये दोनों तालिकाएं बीते वर्ष की दाखिला प्रक्रिया के आधार पर समझाने के लिए यहां दी गई हैं)
आपका कितना स्कोर है?
उदाहरण- 1 (कम स्कोर)
आपको ऊपर रॉ स्कोर समझाया गया है. अब मान लीजिए सीयूईटी में 1000 में से आपका रॉ स्कोर 400 से नीचे है. तो सीयूईटी रिजल्ट एनालिसिस में आप लो स्कोर में गिने जाएंगे. क्योंकि 400 रॉ स्कोर पर आपका नॉर्मलाइज्ड स्कोर 130 से नीचे होगा. सीयूईटी 2023 में इसे कम स्कोर माना जाता है. अब आप सोच रहे होंगे कि इसे कम स्कोर क्यों माना जाता है तो इसकी वजह ये है कि किसी पाठ्यक्रम और कॉलेज के अनुसार जैसे सबकी कट ऑफ अलग होती है, ठीक वैसे ही स्कोर की गणना करके दाखिला दिया जाता है.
कम स्कोर पर कहां एडमिशन
सीयूईटी 2023 में इस स्कोर रेंज के भीतर स्कोर करने वाले छात्रों के पास बीए/बीए (ऑनर्स) के कुछ पाठ्यक्रमों में प्रवेश की संभावना है. ऐसे छात्र निजी और राज्य विश्वविद्यालयों के कॉलेजों में बी.एससी/ बी.एससी (ऑनर्स) में दाखिला मिल सकता है.
उदाहरण- 2 (औसत स्कोर)
CUET 2023 में 400-600 के बीच की स्कोर रेंज को औसत स्कोर के रूप में लिया जा सकता है. अगर आपके नंबर इस रेंज के बीच हैं तो आप भारत के किसी अच्छे कॉलेज में प्रवेश की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे ये टॉप यूनिवर्सिटीज के टॉप कॉलेज नहीं होंगे. इस स्कोर पर आपको डीयू के कुछ कॉलेज मिल सकते हैं, लेकिन यहां के टॉप कॉलेजेज के लिए आपका स्कोर कट ऑफ से मेल नहीं खाएगा.
उदाहरण- 3 (टॉप स्कोर)
सीयूईटी में 700 से ऊपर स्कोर करने वाले छात्रों के पास दाखिले के विकल्प सबसे अच्छे होते हैं. आपको डीयू, जेएनयू, बीएचयू और बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के शीर्ष रैंक वाले कॉलेजों से बी.टेक/ बी.कॉम (ऑनर्स)/ बीए एलएलबी पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने की अधिक संभावना है.
डीयू के लिए CUET पासिंग मार्क्स
डीयू के लिए सीयूईटी उत्तीर्ण अंक डीयू द्वारा ही तय किए जाते हैं. इसके अलावा, डीयू से संबद्ध कॉलेज सीयूईटी 2023 रिजल्ट के आधार पर अपना स्वयं का कट ऑफ स्कोर निर्धारित करते हैं. डीयू के सीयूईटी उत्तीर्ण अंक सीयूईटी परीक्षा में प्राप्त 400-500 अंकों के बीच कहीं भी हो सकते हैं. डीयू के टॉप रैंक वाले कॉलेज जैसे हिंदू कॉलेज, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, मिरांडा हाउस और लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वुमेन सीयूईटी में 700 से ऊपर का स्कोर स्वीकार करते हैं.
12वीं के नंबर कैसे काम आएंगे?
क्या इसका मतलब ये है कि यूनिवर्सिटीज में दाखिले के लिए 12वें के नंबर पूरी तरह से अप्रासंगिक नहीं होंगे? इस सवाल के जवाब में यूजीसी चेयरमैन ने कहा कि कोई भी 12वीं पास छात्र सीयूईटी एग्जाम में शरीक हो सकता है लेकिन किसी खास विश्वविद्यालय के खास अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए फलां यूनिवर्सिटी 12वीं में न्यूनतम पर्सेंटेज का मापदंड लागू कर सकती है. उदाहरण के तौर पर यूनिवर्सिटी A यह कह सकती है कि यूजी प्रोग्राम में दाखिले के लिए सीयूईटी स्कोर के साथ-साथ 12वीं में न्यूनतम 60 फीसदी अंक जरूरी हैं. वहीं, यूनिवर्सिटी B सीयूईटी स्कोर के साथ-साथ 12वीं में न्यूनतम 70 फीसदी का मापदंड अपना सकती है. यानी विश्वविद्यालय अपने विवेक से यह पैमाना तय कर सकेंगे.