भारत के टॉप बिजनेस कॉलेजों में MBA के लिए एडमिशन का सीज़न शुरू हो गया है. CAT के रजिस्ट्रेशन जारी हैं और 14 सितंबर को बंद होंगे. उम्मीदवार पहले से ही मैनेजमेंट एंट्री एग्जाम्स की तैयारी के लिए कमर कस रहे हैं और MBA या PGDM कॉलेजों की तलाश कर रहे हैं. मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (PGDM) के बीच अंतर को जाने बिना कॉलेजों को शॉर्टलिस्ट करना उम्मीदवारों के लिए मुश्किल हो सकता है. आइये जानते हैं दोनो कोर्सेज़ में फर्क क्या है.
क्या है MBA?
MBA एक 2 वर्ष का पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स है जो कई स्पेशलाइज़ेशन प्रदान करता है. यह कोर्स भविष्य के बिजनेस लीडर्स और आंत्रेपेन्योर्स में बिजनेस और मैनेजमेंट स्किल्स विकसित करने में मदद करता है. दो साल के मैनेजमेंट कोर्स करने वाले छात्रों को MBA की डिग्री प्रदान की जाती है. इस कोर्स को अच्छे रिजल्ट के साथ पूरा करने वाले उम्मीदवारों को अपने पसंद के स्ट्रीम में करियर बनाना आसान हो जाता है.
क्या है PGDM?
PGDM भी एक बिजनेस मैनेजमेंट कोर्स है जो AICTE से मान्यताप्राप्त ऑटोनॉमस B-स्कूलों द्वारा ऑफर किया जाता है. इन संस्थानों को किसी भी विश्वविद्यालय से संबद्ध होने की आवश्यकता नहीं है. चयनित कोर्स के आधार पर PGDM कोर्स 1 वर्ष या 2 वर्ष का हो सकता है. हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि PGDM कोर्स को MBA के समकक्ष होने के लिए 2 साल का होना चाहिए.
यह कोर्स इंडस्ट्री की आवश्यकताओं को पूरा करता है और हार्ड और सॉफ्ट स्किल विकसित करके मैनेजमेंट के इच्छुक उम्मीदवारों को मैनेजमेंट प्रोफेश्नल्स में बदल देता है. भले ही PGDM एक डिप्लोमा कोर्स है और डिग्री कोर्स नहीं है, फिर भी इसे भारत और विदेश दोनों में MBA के समान वैल्यू दी जाती है.
क्या है दोनो में अंतर?
दोनो कोर्सेज़ के बीच मूलभूत अंतर यह है कि MBA एक डिग्री कोर्स है और PGDM एक डिप्लोमा कोर्स है. पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स होने के नाते, MBA और PGDM दोनों के लिए कैंडिडेट्स को क्रमशः 50 प्रतिशत और 45 प्रतिशत न्यूनतम नंबरों के साथ किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएट होना जरूरी है.
कैसे पाते हैं एडमिशन
MBA एडमिशन के लिए उम्मीदवारों को प्रवेश परीक्षा देनी होती है जबकि PGDM के लिए कभी प्रवेश परीक्षा आयोजित होती है तो कुछ संस्थान अपनी परीक्षा के आधार पर सीधे एडमिशन की भी अनुमति देते हैं.
एक जैसे हैं सिलेबस
MBA और PGDM दोनों के लिए सिलेबस समान है. हालांकि, MBA का सिलेबस यूनिवर्सिटी पर निर्भर करता है और पाठ्यक्रम को अक्सर संशोधित नहीं किया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि कॉलेज यूनिवर्सिटी की सहमति के बिना सिलेबस में बदलावा नहीं कर सकते. दूसरी ओर, PGDM कोर्स काफी लचीले होते हैं क्योंकि वे स्वायत्त संस्थानों द्वारा पेश किए जाते हैं जो शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कोर्स के सिलेबस में बदलाव कर सकते हैं.
किसकी है ज्यादा फीस
PGDM कोर्स की तुलना में MBA कोर्स अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं. चूंकि MBA पाठ्यक्रम यूनिवर्सिटी से संबद्ध हैं, इसलिए विश्वविद्यालय को मिलने वाला अनुदान छात्रों के लिए कोर्स की लागत की भरपाई करने में मदद करता है. PGDM कोर्स में, पूरी लागत छात्रों को ही वहन करनी पड़ती है, क्योंकि अधिकांश संस्थानों को कोई अनुदान नहीं मिलता है. इसी के कारण PGDM महंगा कोर्स है.
कौन सा कोर्स है बेहतर
MBA और PGDM दोनों ही एक जैसे मैनेजमेंट कोर्स हैं जिन्हें दुनिया भर में एक जैसी वैल्यू दी जाती है. दोनो में मुख्य अंतर कोर्स और फीस स्ट्रक्चर में ही है. दोनों में से किस कोर्स को करने से छात्रों को अच्छी नौकरी के अवसर मिल सकते हैं, यह उनके अकादमिक प्रदर्शन पर निर्भर करता है. दोनो के बाद ही नौकरी के मौके एक समान ही हैं.