आज स्पेस में भारत का झंडा फहराने वाली कल्पना चावला का जन्मदिन है. इसे देश कल्पना चावला जयंती के तौर पर मना रहा है. अगर आपकी बेटी भी सितारों के बीच स्पेस में एक एस्ट्रोनॉट बनकर जाने का सपना देखती है तो आप उसकी कुछ इस तरह मदद कर सकते हैं. जानिए-कल्पना चावला ने कौन सी पढ़ाई के जरिये अपना सपना पूरा किया था.
हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना चावला बचपन से उड़ने का सपना देखती थीं. उन्हें बैक-पैकिंग करके लंबी पैदल यात्रा पर निकल पड़ना, हाइकिंग और पढ़ना बहुत पसंद था. उन्होंने स्पेस में जाने से पहले एअरप्लेन और ग्लाइडर रेटिंग्स में सर्टिफिकेटेड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर का लाइसेंस हासिल किया था. इसके अलावा उन्होंने पास सिंगल और मल्टी इंजन लैंड एंड सी प्लेंस का कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल किया था. जानिए कैसे?
कल्पना चावला ने टैगोर स्कूल, करनाल से स्नातक करने के बाद 1976 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एअरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस डिग्री हासिल की. फिर 1982 से 1984 के बीच टेक्सास अर्लिंग्टन यूनिवर्सिटी से एअरो स्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री ली. फिर 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट ऑफ फिलॉस्फी की डिग्री हासिल की.
1988 में कल्पना चावला ने नासा एम्स रिसर्च सेंटर में पावर्ड-लिफ्ट कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनामिक्स के क्षेत्र में काम शुरू किया. उनका शोध जटिल वायु प्रवाह के अनुकरण पर केंद्रित था, जो एयरर जैसे "ग्राउंड-इफ़ेक्ट" में हैरियर के आसपास था. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद उन्होंने समानांतर कंप्यूटरों के लिए प्रवाह सॉल्वरों की मैपिंग में अनुसंधान का समर्थन किया, और इन सॉल्वरों का परीक्षण करके पावर्ड लिफ्ट कम्पनों को पूरा किया.
1993 में कल्पना चावला ओवरसीज मेथड्स इंक, लॉस अल्टोस, कैलिफ़ोर्निया में वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में शामिल हुईं और उन्होंने कई शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक टीम बनाई, जिसने मल्टीपल बॉडी प्रॉब्लम्स पर काम किया. वो एअरोस्पेस की पढ़ाई की दिशा में लगभग वो मुकाम पा चुकी थीं कि उनके भीतर का आत्मबल बहुत बढ़ गया था. अब वो स्पेस में जाने का अपना सपना पूरा कर सकती थीं.
इन सरकारी संस्थानों में होती है एअरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
आईआईटी बैंगलोर
आईआईटी बॉम्बे
आईआईटी कानपुर
आईआईटी मद्रास
आईआईटी खड़गपुर
(12वीं में साइंस की पढ़ाई करके जेईई एडवांस्ड परीक्षा पास करने के बाद आईआईटी में दाखिला पा सकते हैं.)
बता दें कि कल्पना ने न सिर्फ अंतरिक्ष की दुनिया में उपलब्धियां हासिल कीं, बल्कि तमाम छात्र-छात्राओं को सपनों को जीना सिखाया. भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल हैं. उनके वे शब्द सत्य हो गए जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं.
जानें- कल्पना चावला से जुड़ी ये खास बातें
कल्पना के पिता उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाना चाहते थे. परिजनों के अुनसार बचपन से ही कल्पना की दिलचस्पी अंतरिक्ष और खगोलीय परिवर्तन में थी. वह अक्सर अपने पिता से पूछा करती थीं कि ये अंतरिक्षयान आकाश में कैसे उड़ते हैं? क्या मैं भी उड़ सकती हूं? पिता उनकी इस बात को हंसकर टाल दिया करते थे.
- साल 1988 में वो नासा अनुसंधान के साथ जुड़ीं. जिसके बाद 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना चावला का चयन किया.
- उन्होंने अंतरिक्ष की प्रथम उड़ान एस टी एस 87 कोलंबिया शटल से संपन्न की. इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी.
- अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की.- इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी.
- कल्पना की दूसरी और आखिरी उड़ान 16 जनवरी, 2003 को स्पेस शटल कोलम्बिया से शुरू हुई. यह 16 दिन का अंतरिक्ष मिशन था, जो पूरी तरह से विज्ञान और अनुसंधान पर आधारित था.
- 1 फरवरी 2003 को धरती पर वापस आने के क्रम में यह यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया.
- 2003 में इस घटना में कल्पना के साथ 6 अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की भी मौत हो गई थी.