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कौन हैं प्रो. योगेश सिंह? 77 साल के इतिहास में लगातार दूसरी बार बने DU के वीसी, जानें उनका सफर

प्रो. योगेश सिंह ने लगातार दूसरी बार दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के वीसी की कमान संभालकर इतिहास रच दिया है. 77 सालों में पूरे कार्यकाल के लिए दोबारा चुने जाने वाले वे पहले कुलपति हैं. अब अक्टूबर 2031 तक उनके नेतृत्व में डीयू एनईपी और सीयूईटी जैसे बड़े रिफॉर्म्स के नए दौर में प्रवेश करेगा. पढ़िए उनके एकेडमिक सफर के बारे में...

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति योगेश सिंह की दूसरी पारी शुरू, जानिए क्यों है यह खास
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति योगेश सिंह की दूसरी पारी शुरू, जानिए क्यों है यह खास

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से आई इस खबर ने पूरे देश के एजुकेशन कॉरिडोर में हलचल मचा दी है. प्रोफेसर योगेश सिंह ने लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए डीयू के कुलपति की कमान संभाल ली है. और यह कोई आम री-अपॉइंटमेंट नहीं है, असल में यह 77 साल पुराना इतिहास बदलने वाला फैसला बताया जा रहा है. आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब दिल्ली यूनिवर्सिटी के किसी वीसी को लगातार दूसरे 5 साल के पूरे कार्यकाल के लिए चुना गया है.

इतना ही नहीं, प्रो. योगेश सिंह इस वक्त देश की तकनीकी शिक्षा की सबसे बड़ी संस्था AICTE (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) के चेयरमैन की कुर्सी भी संभाल रहे हैं. आइए जानते हैं उनके एकेडमिक सफर के बारे में... 

77 साल पुराना कानून बदला और रच दिया इतिहास

आखिर ऐसा क्या हुआ कि डीयू को 77 साल पुराना नियम बदलना पड़ा? आइए आपको इस फैसले के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी बताते हैं. आध‍िकार‍िक डेटा के अनुसार डीयू के रिकॉर्ड में ब्रिटिश काल में सर मौरिस ग्वेयर (1938 से 1950) करीब 12 साल तक वीसी रहे थे. उनके बाद एस.एन. सेन (1950-1953) के बाद से आज तक कोई भी वीसी 5 साल से ज्यादा नहीं टिक पाया. लेकिन प्रो. योगेश सिंह का यह नया कार्यकाल अब उन्हें अक्टूबर 2031 तक यानी पूरे एक दशक (10 साल) के लिए डीयू के शीर्ष पर बनाए रख सकता है.

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बता दें कि पहले डीयू के नियमों (Statute 11-F(4)) के मुताबिक किसी भी वीसी को दोबारा मौका देने का प्रावधान ही नहीं था. लेकिन अक्टूबर 2023 में केंद्र सरकार ने इस कानून में संशोधन किया और री-अपॉइंटमेंट का रास्ता साफ कर दिया. प्रो. योगेश सिंह इस नए कानून के तहत दूसरा कार्यकाल पाने वाले पहले कुलपति बन गए हैं.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई से यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के 'मास्टर' बनने तक

प्रोफेसर योगेश सिंह की असली ताकत उनका मजबूत अकादमिक और तकनीकी बैकग्राउंड भी है. उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में एमटेक और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में पीएचडी की है. डीयू की कुर्सी संभालने से पहले वे एमएस यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा (2011-2014) और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के वीसी रह चुके हैं. दिलचस्प बात यह है कि बड़ौदा और डीटीयू दोनों ही जगहों पर प्रशासन ने उनके काम को देखते हुए उन्हें दूसरा कार्यकाल दिया था!

CUET से FYUP तक: डीयू को दिए ऐतिहासिक रिफॉर्म्स

8 अक्टूबर 2021 को जब योगेश सिंह ने डीयू की कमान संभाली थी, तब से लेकर आज तक उन्होंने यूनिवर्सिटी की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी:

कट-ऑफ के झंझट से मुक्ति (CUET): साल 2022 में उन्होंने 12वीं के बोर्ड मार्क्स वाली विवादास्पद कट-ऑफ प्रणाली को खत्म कर पूरे देश के लिए 'CUET (Common University Entrance Test)' लागू कराया. हालांकि, उन्होंने खुद यह माना था कि एनसीईआरटी सिलेबस पर आधारित होने की वजह से सीबीएसई के छात्रों को इसमें थोड़ा एज मिल जाता है.

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4 साल का ग्रेजुएशन (FYUP): राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उन्होंने डीयू में चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (UGCF 2022) लागू किया, जिससे अब छात्रों के पास रिसर्च और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट के बेहतरीन मौके हैं.

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