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कौन हैं थारु आदिवासी, जो वर्षों से कर रहे 60 दिन के लॉकडाउन का पालन, PM मोदी ने किया जिक्र

PM नरेंद्र मोदी ने मन की बात में थारु आदिवासी समाज के बारे में जिक्र किया, जो सालों से 60 दिन के लॉकडाउन का पालन करते आ रहे हैं. जानें- आखिर ये समाज ऐसा क्यों करता है.

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पीएम मोदी
पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने बिहार के पश्चिमी चंपारण के थारु आदिवासी समाज के बरना त्योहार का जिक्र किया.  बिहार के पश्चिमी चंपारण में सदियों से थारु आदिवासी समाज के लोग 60 घंटे के लॉकडाउन का पालन करते हैं. यहां पर 'बरना' नाम से एक त्योहार मनाया जाता है जो प्रकृति के प्रेम को दर्शाता है.

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क्यों मनाया जाता है बरना त्योहार

प्रकृति की रक्षा के लिए बरना त्योहार का आयोजन किया जाता है. अब ये  थारू समाज के लोगों की परंपरा का हिस्सा बन गया है. जिसमें थारू आदिवासी समाज के लोग 60 घंटे के लॉकडाउन या कहें 60 घंटे के बरना का पालन करते हैं. इस दौरान न कोई गांव में आता है न ही कोई अपने घरों से बाहर निकलता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया, थारु समाज के लोगों का मानना है अगर बरना त्योहार के दौरान वह घर से बाहर निकले या कोई बाहर से आया तो उनके आने-जाने से और होने वाली रोजमर्रा की गतिविधियों से, नए पेड़-पौधों को नुकसान हो सकता है.  जिससे प्रकृति की हानि हो सकती है.

खिलौनों को लेकर ये बोले पीएम मोदी

पीएम मोदी ने मन की बात में खिलौनों के बारे में जिक्र किया. उन्होंने कहा, लोकल खिलौनों को वोकल बनना है. पीएम मोदी ने कहा, बच्चों के जीवन के अलग-अलग पहलू पर खिलौनों का जो प्रभाव है, इस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी बहुत ध्यान दिया गया है. खेल-खेल में सीखना, खिलौने बनाना सीखना, खिलौने जहां बनते हैं, वहां की विजिट करना, इन सबको करिकुलम का हिस्सा बनाया गया है.

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पीएम मोदी ने बताया,  ग्लोबल टॉय इंडस्ट्री 7 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है.  इतना बड़ा कारोबार लेकिन भारत का उसमें हिस्सा बहुत ही कम है.  मैं अपने स्टार्ट अप मित्रों, नए उद्यमियों से कहता हूं 'टीम अप फॉर टॉएज', आइए मिलकर खिलौने बनाएं. अब सभी के लिए लोकल खिलौनों के लिए वोकल होने का समय आ गया है.

खिलौने जहां एक्टिविटी को बढ़ाने के लिए होते हैं, वहीं खिलौने बच्चों की आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं.  खिलौने केवल मन ही नहीं बहलाते, खिलौने मन बनाते भी हैं.  हमारे देश में लोकल खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है. कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं. भारत के कुछ क्षेत्र खिलौनों के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं.

 

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