बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेताओं में से एक दिलीप कुमार आज अपना 98वां जन्मदिन मना रहे हैं. हालांकि, इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते अपने दो भाइयों को खो चुके दिलीप कुमार कोई जश्न तो नहीं मनाने वाले, मगर बॉलीवुड ने उन्हें बधाइयां भेजने में कोई कसर नहीं छोड़ी. अपने दमदार अभिनय से कभी सिनेमा जगत पर राज करने वाले दिलीप एक समय नौकरी की तलाश में भटकते थे. बचपन के दोस्त राज कपूर के साथ ने उन्हें रास्ता दिखाया था.
दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान में हुआ था और उनका पहला नाम यूसुफ खान था. बाद में उन्हें पर्दे पर दिलीप कुमार के नाम से शोहरत मिली. उन्होंने अपनी पढ़ाई महाराष्ट्र से की और अपना बचपन यहीं गुज़ारा. वे नासिक के बार्न्स स्कूल, देवलाली में डे-स्कॉलर के तौर पर पढ़े. अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि दिलीप कुमार बन जाने के बाद वे दोबारा देवालाली लौटे थे जब उन्हें अपनी 'गंगा-जमुना' फिल्म की शूटिंग के लिए लोकेशन की तलाश थी.
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी ढ़ूंढ़ना शुरू किया. उनके एक परिवार के व्यक्ति ने एक बार उन्हें 'बॉम्बे टॉकीज़ स्टूडियो' में 'देविका रानी' से मिलवाया. देविका उनकी कद-काठी और पर्सनैलिटी से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्हें 1250 रुपये महीने की सैलरी पर एक्टिंग करने का ऑफर दे दिया. उस समय के लिए यह काफी बड़ी रकम थी इसलिए दिलीप जरा घबराए और अपने मित्र से पूछा कि कहीं उन्होंने गलत तो नहीं सुन लिया. कहीं पैसे का यह ऑफर एक महीने के बजाय एक साल को तो नहीं. बाद में गलतफहमी दूर हुई और युसुफ, दिलीप कुमार बनने की राह पर चल पड़े.
अभिनय की तरफ जाने के लिए उन्हें उनके बचपन के दोस्त राज कपूर ने बहुत प्रेरित किया. फिल्मफेयर के दौरान दिलीप ने बताया था कि वे और राज कपूर भाइयों के जैसे थे. वह दोनो फुटबॉल खेलने के शौकीन थे और राज कपूर के घर में भी उनका स्वागत बेटे जैसा ही होता था. राज कपूर ने उनसे कई बार कहा कि वह बेहद अच्छे दिखते हैं इसलिए उन्हें हीरो बनने के बारे में सोचना चाहिए. दिलीप कुमार को यह लगता था कि राज खुद पृथ्वीराज कपूर के बेटे हैं इसलिए एक्टिंग उनके जीन्स में हैं, मगर खुद को लेकर वह इतने श्योर नहीं थे.
अपने दमदार किरदारों के चलते वह इंडस्ट्री के 'ट्रेजडी किंग' कहे जाने लगे थे. वह बताते हैं कि करियर के उस दौर में उनकी उम्र 30 वर्ष से भी कम थी और ऐसे ट्रेजडी रोल्स करने का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ने लगा था. इंग्लैंड में उनके ड्रामा कोच ने उन्हें कॉमेडी या दूसरे रोल्स भी करने की सलाह दी.