आज से ठीक 21 साल पहले 1999 में जब पूरा देश नये साल के जश्न में डूबने की तैयारी कर रहा था. 24 दिसंबर की शाम एक मनहूस खबर लेकर आई. ये खबर थी- आईसी 814 फ्लाइट के अचानक शाम को मिस हो जाने की. बता दें कि 24 दिसंबर शाम साढे चार बजे काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडियन एयरलाइंस की फ़्लाइट संख्या आईसी 814 नई दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. शाम पांच बजे जैसे ही विमान भारतीय वायु क्षेत्र में दाखिल हुआ, अपहरणकर्ताओं ने फ़्लाइट को पाकिस्तान ले जाने की मांग रख दी थी. आइए जानते हैं, क्या थी पूरी घटना.
थोडी ही देर में दुनिया को पता लग चुका था कि भारतीय विमान हाइजैक किया गया है. शाम छह बजे विमान अमृतसर में थोड़ी देर के लिए रुककर लाहौर के लिए रवाना हो गया. लेकिन पाकिस्तान की सरकार से अनुमति के बगैर विमान रात आठ बजकर सात मिनट पर लाहौर में लैंड हुआ. यहां लाहौर से दुबई के रास्ते होते हुए इंडियन एयरलाइंस का ये अपहृत विमान अगले दिन सुबह के तकरीबन साढ़े आठ बजे अफगानिस्तान में कंधार में लैंड हुआ.
180 यात्रियों से भरी इस एअरबस के हाइजैक होने की खबर से पूरे देश में सनसनी मच गई थी. हाइजेकिंग के कुछ ही घंटों बाद आतंकवादी अपनी मांग रख चुके थे. इससे पहले वो एक यात्री 25 साल के रूपन कात्याल चाकू से गोदकर मार चुके थे. रात के पौने दो बजे के करीब ये विमान दुबई पहुंचा.
वहां ईंधन भरे जाने के एवज में कुछ यात्रियों की रिहाई पर समझौता हुआ. तब दुबई में 27 यात्री रिहा किए गए, इनमें ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. इसके एक दिन बाद डायबिटीज़ से पीड़ित एक व्यक्ति को रिहा कर दिया गया. कंधार में पेट के कैंसर से पीड़ित सिमोन बरार नाम की एक महिला को कंधार में इलाज के लिए सिर्फ़ 90 मिनट के लिए विमान से बाहर जाने की इजाजत दी गई.
हाईजैक से भारत सरकार की मुश्किलें बढ़ रही थीं. मीडिया में आ रही खबरें और दबाव बना रही थीं. यात्रियों के परिजन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इन सब के बीच अपरहरणकर्ताओं ने अपने 36 आतंकी साथियों की रिहाई के साथ ही 20 करोड़ अमरीकी डॉलर की फिरौती की मांग रखी थी.
अपहरणकर्ता एक कश्मीरी अलगाववादी के शव को सौंपे जाने की मांग पर भी अड़े थे. फिर तालिबान के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने पैसे और शव की मांग छोड़ दी. लेकिन भारतीय जेलों में बंद आतंकियों की रिहाई की मांग मनवाने के लिए वे लोग बुरी तरह अड़े हुए थे.
पहले लगा कि तालिबान कोई सख्त कदम उठा सकता है. लेकिन बाद में तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि तालिबान ने ये कहकर सकारात्मक रवैया दिखाया है कि कंधार में कोई रक्तपात नहीं होना चाहिए नहीं तो वे अपहृत विमान पर धावा बोल देंगे. इससे अपहरणकर्ता अपनी मांग से पीछे हटने को मजबूर हुए.
हाइजैक हुए विमान में भारतीय यात्री ज्यादा थे लेकिन इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, इटली, जापान, स्पेन और अमेरिका के नागरिक भी इसमें सवार थे. सरकार पर इस घटना का दबाव इस कदर था कि तत्कालीन एनडीए सरकार को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए तीन आतंकियों को कंधार ले जाकर रिहा करना पड़ा था.
तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री जसवंत सिंह ख़ुद तीन आतंकियों को अपने साथ कंधार ले गए थे. छोड़े गए चरमपंथियों में जैश-ए -मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद शामिल थे.
कंधार हाईजैकिंग कांड में आतंकियों के सामने झुकने के लिए अटल बिहारी बाजपेयी सरकार की आज भी आलोचना होती है या यूं कहे कंधार हाईजैकिंग आज भी वाजपेयी सरकार की सबसे दुखती रग है लेकिन ये वो समय था, जब सरकार के सामने कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था. 31 दिसंबर को सरकार और अपहरणकर्ताओं के बीच समझौते के बाद दक्षिणी अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट पर अगवा रखे गए सभी 155 बंधकों को रिहा कर दिया गया.