ट्विटर पर एक बार फिर गुजरात के शहर अहमदबाद का नाम कर्णावती रखने की मांग तेज हो गई है. बुधवार को ट्विटर पर #WeWantKarnavati ट्रेंड कर रहा है. नेटिजंस का कहना था कि अहमदाबाद की नींव अहमदशाह ने नहीं बल्कि राजा कर्णदेव ने रखी थी. इसलिए शहर का नाम उन्हीं के नाम पर होना चाहिए. इसका नाम रखने और अब फिर बदलने के पीछे का इतिहास आइए आपको बताते हैं.
अहमदाबाद के इतिहास के बारे में बात करें तो ये ग्यारहवीं शताब्दी से शुरू होता है. ये वो दौर था जब सोलंकी वंश के शासक राजा कर्णदेव-प्रथम थे. उन्होंने भील राजा अशपाल या अशावल से जंग लड़ी. कर्णदेव युद्ध में जीते और साबरमती नदी के किनारे कर्णावती नाम का शहर बसाया. सोलंकी शासन तेरहवीं शताब्दी तक चला. इसके बाद गुजरात द्वारका के वाघेला वंश के नियंत्रण में आ गया.
इतिहासकार बताते हैं कि 13वीं शताब्दी गुजरते गुजरते गुजरात दिल्ली की सल्तनत का हिस्सा बन चुका था. फिर सन् 1411 में तत्कालीन सुल्तान अहमद शाह ने कर्णावती के पास अहमदाबाद शहर को बसाया. 1487 में अहमद शाह के पोते महमूद बेगाड़ा ने शहर के चारों ओर बाहरी दीवार बनवाई और इसमें 12 द्वार, 189 बुर्ज और और 6,000 से ज्यादा जंगी मोर्चे वाली चहारदीवारी बनवाई.
इस शहर को प्राचीन इंडो-आर्य परंपरा से प्लांड तरीके से बनाया गया था. इसमें राजधानी की ओर जाने वाली मुख्य सड़कें, चौराहे और सहायक सड़कें बनाई गई थी. गुजरात के सुल्तानों की देखरेख में अहमदाबाद नदी के दोनों किनारों विस्तार होता गया. विस्तार में रिहायशी और कारोबारी इलाके बनते गए, इनमें महल, मकान, मकबरे, जलाशय, झीलों वाली मस्जिदें और बाग-बगीचे शामिल हैं. इन्हें सुल्तानों, दरबारियों और राजधानी के अमीर व्यापारियों ने बनवाया था.
बताते हैं कि अंतिम सुल्तान मुज़फ्फ़र तृतीय के समय शहर में स्थितियां अराजकता हो गई थीं. गुजरात को मुगल सम्राट अकबर ने 1573 में जीत लिया. मुगल शासनकाल के दौरान, अहमदाबाद व्यापार के संपन्न केन्द्रों में से एक बन गया. यह शहर वस्त्र उद्योग का केन्द्र बना, जहां यूरोप तक निर्यात किया जाने लगा. साल 1630 में अकाल ने शहर को तबाह कर दिया. फिर 1753 में मराठा जनरल रघुनाथ राव और दामजी गायकवाड़ की सेनाओं ने शहर पर कब्जा कर लिया और अहमदाबाद में मुगल शासन को खत्म कर दिया. 1630 के अकाल ने पेशवा और गायकवाड़ के शासन ने शहर को नष्ट कर दिया.
अब सोशल मीडिया पर कई लोग महात्मा गांधी की कर्मभूमि और प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य के इस बड़े शहर के नाम को ऐतिहासिक भूल बता रहे हैं. लोग गृहमंत्री से मांग कर रहे हैं कि इस शहर का नाम बदलकर अब ऐतिहासिक भूल को सुधारा जाए. इस मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका भी देश के गृहमंत्री को भेजी गई है जिसमें उनसे नाम बदलने की मांग की जा रही है.