International Traffic Light Day 2022: आज हमने 108 साल पूरे कर लिए हैं जब पहला इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम (Electric Traffic Signal System) लगाया गया था. 5 अगस्त, 1914 को यूक्लिड एवेन्यू के कोने पर और ओहियो के क्लीवलैंड में ईस्ट 105वीं स्ट्रीट पर लगाया गया था. इसे जेम्स होगे द्वारा डिजाइन किया गया था और 1918 में पेटेंट कराया गया था. यहां यह जान लेना दिलचस्प होगा कि उस समय इसमें केवल हरी और लाल रंग की लाइट ही लगाई गई थी, जिसमें एक रूकने के लिए थी और दूसरी चलने के लिए. बाद में इसमें सावधानी सूचक तीसरी पीली लाइट भी लगाई गई.
सड़क पर चलते हुए आपने जगह जगह ट्रैफिक संकेत लगे देखे होंगे, जो छोटे-बड़े सभी वाहनों के चलने के लिए बेहद जरूरी है. वाहन चलाने वाले लोगों को इन सिग्नलों का खास ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि इनका पालन न करने पर जुर्माने का प्रावधान है. आइए आज हम ट्रैफिक संकेत के बारे में जरूरी बातें जानते हैं जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
भारत में पांच तरह के ट्रैफिक संकेत हैं-
1. आदेशात्मक सड़क चिन्ह (Mandatory Road Signs)
2. सतर्क यातायात संकेत या सचेतक सड़क चिन्ह (Cautionary Road Signs)
3. सूचनात्मक यातायात संकेत (Informative Road Signs)
4. सड़क संकेत (Road Signs)
5. सड़क मार्किंग (Road Marking)
आने वाले वाहन को प्राथमिकता दें
सड़क पर यह संकेत यह बताता है कि पहले सामने से आने वाले वाहन को निकलेन का रास्ता दें. यह संकेत ऐसी जगहों पर लगा होता है जहां सड़क के एक संकरे भाग, जहां से आने व जाने वाले यातायात का एक साथ निकलपाना मुश्किल या अंसभव होता है. जिस ओर संकेत लगा हो वहां से आने वाला ट्रैफिक तभी निकल पाएगा जब आपके सामने से कोई वाहन नहीं आ रहा हो.
चौड़ाई सीमा (Width Limit)
यह संकेत वाहन की चौड़ाई दर्शाता है, जिसे चिन्ह के स्थान के पास जाने के क्षेत्र में प्रवेश के लिए अनुमित दी जाती है. इस क्षेत्र में 2 मीटर से ज्यादा चौड़ाई वाले वाहन की एंट्री पर रोक होती है. यह कोई पुल या संकरा रास्ता हो सकता है.
एक्सल भार सीमा (Axle Load Limit)
आमतौर पर किसी पुल से पहले यह चिन्ह लगाया जाता है. यह पुल द्वारा भार झेलने की क्षमता को दर्शाता है. इस चिन्ह की भार सीमा 4 टन है. यह दर्शाता है कि सिर्फ 4 टन या उससे कम एक्सल भार वाले वाहन ही इस पुल से गुजर सकते हैं.