15 अगस्त को लालकिले में होने वाले झंडारोहण कार्यक्रम की सीटिंग अरेंजमेंट चर्चा में है. दरअसल, लालकिले में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पांचवीं लिस्ट में बैठे नजर आए और उनके पास ओलंपिक खिलाड़ी बैठे थे. राहुल गांधी को पीछे की सीट पर बैठाए जाने को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है. यह पहली बार था जब राहुल गांधी बतौर नेता प्रतिपक्ष लाल किले पर आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पहुंचे थे. अब सोशल मीडिया से लेकर कांग्रेस नेता सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर सवाल उठा रहे हैं. साथ ही कई लोगों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष की सीट आगे होती है.
ऐसे में सवाल है कि आखिर लालकिले पर होने वाले 15 अगस्त के झंडारोहण कार्यक्रम में कौन-कहां बैठेगा, ये कैसे तय होता है? अगर नॉर्मल प्रोटोकॉल के हिसाब से देखें तो नेता प्रतिपक्ष का स्थान वरिष्ठ लोगों में कहां आता है.
कैसे तय होता है?
आपको बता दें कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों के आयोजन और इस तरह के आयोजन में बैठने की व्यवस्था का काम रक्षा मंत्रालय का होता है. हर कार्यक्रम में वरिष्ठता के आधार पर सीट अरेंजमेंट किया जाता है. वरिष्ठता का फैसला गृह मंत्रालय की टेबल ऑफ प्रेसेडेंस (Tables Of Precedence) लिस्ट के आधार पर किया जाता है. इसके आधार पर ही प्रोटोकॉल तय होता है और राजनेताओं, अधिकारियों की वरिष्ठता तय होती है.
कितने नंबर पर है नेता प्रतिपक्ष का पद?
राष्ट्रपति की ओर से निर्धारित इस लिस्ट में सबसे पहले स्थान भारत के राष्ट्रपति का होता है. इसके बाद क्रमश: भारत के उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यों के राज्यपाल, पूर्व राष्ट्रपति, उप-प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, लोकसभा स्पीकर आदि का पद आता है. फिर केंद्रीय मंत्री, केंद्रीय राज्य मंत्री, नीति आयोग के डेप्यूटी चेयरमैन, पूर्व प्रधानमंत्री और राज्यसभा-लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद आते हैं.
टेबल ऑफ प्रेसेडेंस के अनुसार, केंद्रीय मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष को बराबर का दर्जा दिया गया है. इन पदों के बाद भारत रत्न प्राप्त लोग, मुख्यमंत्री आदि आते हैं. कई बार विशेष आयोजनों में इसमें बदलाव भी किया जाता है. जैसे इस बार ओलंपिक खिलाड़ियों को खास स्थान दिया गया था. आप भी इस लिस्ट में देख सकते हैं कि कौनसा पद वरिष्ठता के आधार पर कहां आता है.
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
राहुल गांधी की सीट पर हुए विवाद के बाद रक्षा मंत्रालय ने भी इसका जवाब दिया है. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान आगे की पंक्तियों में ओलंपिक मेडल विजेता खिलाड़ियों के बैठने का इंतजाम किया गया था, जिस वजह से राहुल गांधी को पीछे की पंक्ति में बैठाया गया. अन्यथा प्रोटोकॉल के मुताबिक विपक्ष के नेता को आगे की पंक्ति में बैठाया जाता है.
बता दें कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान उस समय विपक्ष की नेता के तौर पर सोनिया गांधी को हमेशा इस तरह के आयोजनों में सबसे आगे की पंक्ति में बैठाया जाता था. वहीं, 10 साल से नेता प्रतिपक्ष का पद खाली होने की वजह से किसी के लिए इंतजाम भी नहीं किया गया था.