आज के दिन ही 28 नवंबर 1520 फर्डिनेंड मैगेलन नाम के नाविक प्रशांत महासागर पहुंचे थे. अमेरिका की खोज होने के बाद भी लोग अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर के समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर रहे थे. एक पुर्तगाली नाविक फर्डिनेंड मैगेलन ने इंडोनेशिया के मसाला द्वीपों के लिए नए समुद्री मार्ग खोजने की ठानी.
इस दौरान फर्डिनेंड मैगेलन तीन जहाजों के साथ दक्षिण अमेरिका के खतरनाक जलडमरूमध्य (जो अब उनके नाम पर है) तक जा पहुंचा. इससे होकर ही उसने प्रशांत महासागर के अंदर प्रवेश किया और अटलांटिक से प्रशांत महासागर तक पहुंचने वाला पहला यूरोपीय खोजकर्ता बन गए.
1519 में हुई थी अभियान की शुरुआत
20 सितंबर, 1519 को मैगेलन ने इंडोनेशिया के समृद्ध मसाला द्वीपों के लिए एक पश्चिमी समुद्री मार्ग खोजने का प्रयास शुरू किया था. उसने स्पेन से यात्रा शुरू की. पांच जहाजों और 270 लोगों के साथ मैगेलन ने पश्चिमी अफ्रीका और फिर ब्राजील की यात्रा की. वहां उन्होंने दक्षिण अमेरिकी तट पर एक जलडमरूमध्य की खोज की जो उन्हें प्रशांत महासागर तक ले गया.
ऐसे मिला प्रशांत महासागर तक जाने का रास्ता
उन्होंने ब्राजील के दक्षिण में एक बड़े मुहाने, रियो डे ला प्लाटा में एक रास्ता खोजा. यहां से वे पैटागोनिया के तट के साथ दक्षिण की ओर बढ़ते रहे. मार्च 1520 के अंत में पोर्ट सेंट जूलियन में उन्होंने शीतकालीन क्वार्टर स्थापित किए. ईस्टर के दिन आधी रात को, स्पेनिश कप्तानों ने अपने पुर्तगाली कप्तान के खिलाफ विद्रोह कर दिया, लेकिन मैगेलन ने विद्रोह को कुचल दिया.
सिर्फ तीन जहाजों के साथ आगे बढ़े मैगेलन
इस दौरान एक कप्तान को मार डाला और दूसरे को किनारे पर छोड़ दिया. जब उनका जहाज अगस्त में सेंट जूलियन से रवाना हुआ. 21 अक्टूबर को, उन्होंने आखिरकार उस जलडमरूमध्य को खोज लिया जिसकी उन्हें तलाश थी. ये आज मैगेलन जलडमरूमध्य कहलाता है. यह दक्षिण अमेरिका के सिरे के पास स्थित है, जो टिएरा डेल फ्यूगो और महाद्वीपीय मुख्य भूमि को अलग करता है.
शांत पानी होने की वजह से नाम दिया 'पैसिफिक'
केवल तीन जहाज ही इस मार्ग में प्रवेश कर पाए. एक जहाज बर्बाद हो गया था और दूसरे जहाज पर कोई नहीं बचा था. इस खतरनाक जलडमरूमध्य को पार करने में 38 दिन लगे और जब दूसरे छोर पर समुद्र दिखाई दिया तो मैगेलन खुशी से रो पड़े. उनके बेड़े ने 99 दिनों में समुद्र के पश्चिम की ओर पार कर लिया. ये दिन था 28 नवंबर 1520. पानी इतना शांत था कि इस महासागर का नाम 'पैसिफिक' रखा गया, जो लैटिन शब्द पैसिफिकस से लिया गया है. जिसका अर्थ है 'शांत.
प्रशांत महासागर पहुंचने पर नाविकों के खत्म हो गए थे भोजन
अंत तक लोगों के पास भोजन नहीं था और उन्होंने खुद को जीवित रखने के लिए अपने गियर के चमड़े के हिस्सों को चबाया. 6 मार्च, 1521 को नाविकों का दल गुआम द्वीप पर उतरा. दस दिन बाद, उन्होंने सेबू के फिलीपीन द्वीप पर लंगर डाला - वे स्पाइस द्वीप से केवल 400 मील की दूरी पर थे. मैगेलन ने सेबू के प्रमुख से मुलाकात की, जिन्होंने ईसाई धर्म अपनाने के बाद यूरोपीय लोगों को पड़ोसी द्वीप मैकटन पर एक प्रतिद्वंद्वी जनजाति को जीतने में उनकी सहायता करने के लिए राजी किया.
बीच अभियान में मैगेलन की हो गई मृत्यु
27 अप्रैल को लड़ाई में, मैगेलन को एक जहरीला तीर लगा और उसके पीछे हटने वाले साथियों ने उसे मरने के लिए छोड़ दिया. मैगेलन की मृत्यु के बाद, बचे हुए लोग दो जहाजों में सवार होकर मोलुकास की ओर रवाना हुए और उनके पतवारों में मसाला भर दिया. एक जहाज ने प्रशांत महासागर पार करके लौटने का असफल प्रयास किया.
एक जहाज हिंद महासागर से होते हुए अटलांटिक सागर को पार कर पहुंचा स्पेन
दूसरा जहाज, विटोरिया, बास्क नाविक जुआन सेबेस्टियन डी एल्कानो की कमान में पश्चिम की ओर बढ़ता रहा. जहाज ने हिंद महासागर को पार किया, केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाया और 6 सितंबर, 1522 को स्पेन के सैनलुकर डे बारामेडा बंदरगाह पर पहुंचा, जो दुनिया की परिक्रमा करने वाला पहला जहाज बन गया और जुआन सेबेस्टियन दुनिया की परिक्रमा करने वाले पहले नाविक बनें.
मैगेलन ने नहीं की थी दुनिया की पहली परिक्रमा
पुर्तगाली खोजकर्ता फर्डिनेंड मैगेलन को अक्सर दुनिया की परिक्रमा करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में श्रेय दिया जाता है, लेकिन मैगेलन ने पहली बार सितंबर 1519 में आधुनिक इंडोनेशिया में मसाला-समृद्ध ईस्ट इंडीज के लिए एक पश्चिमी मार्ग खोजने के प्रयास के हिस्से के रूप में समुद्री यात्रा शुरू की थी. इस यात्रा के मध्य में ही मैकटन के फिलीपीन द्वीप पर मूल निवासियों के साथ झड़प में मारे गए. जैसा कि ऊपर जिक्र किया गया है.
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ये शख्स बना दुनिया की परिक्रमा करने वाला पहला इंसान
मैगेलन की मृत्यु का मतलब था कि वह व्यक्तिगत रूप से दुनिया का चक्कर लगाने में विफल रहे, लेकिन उनका अभियान उनके बिना जारी रहा. सितंबर 1522 में उसका एक जहाज दुनिया का सफल चक्कर लगाकर सुरक्षित रूप से स्पेन वापस आ गया. मिशन के 260 मूल चालक दल के सदस्यों में से केवल 18 ही तीन साल की खतरनाक यात्रा से बच पाए थे. जुआन सेबेस्टियन एल्कानो ने 1521 में मैगेलन की मृत्यु के बाद अभियान का नियंत्रण संभाला और स्पेन वापस जाने के लिए इसके एकमात्र बचे जहाज, विक्टोरिया की कप्तानी की.
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इतिहास में आज के दिन की प्रमुख घटनाएं
28 नवंबर 1660 – इंग्लैंड में रॉयल सोसाइटी (Royal Society) की स्थापना हुई, जो दुनिया की सबसे पुरानी वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है.
28 नवंबर 1821 – पनामा ने स्पेन से स्वतंत्रता प्राप्त की.
28 नवंबर 1960 – मॉरीटानिया ने फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त की.
28 नवंबर 1964 – नासा ने अपने मंगल मिशन Mariner 4 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह पहली बार था जब मंगल ग्रह की सतह की तस्वीरें ली गईं.