बरेली में समरीन नाम की एक मुस्लिम लड़की ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है. समरीन ने धर्म परिवर्तन कर हिंदू लड़के से शादी भी कर ली है, जिसका नाम मित्रपाल है. अब शादी करने के बाद समरीन, सुमन यादव बन गई हैं. धर्म बदलने के बाद सुमन का कहना है कि उसे बुर्के में रहना पसंद नहीं था तो उन्होंने मर्जी से धर्म परिवर्तन किया और अपने प्रेमी के साथ शादी कर ली. इससे पहले समरीन से सुमन बनी लड़की ने विधि-विधान से सनातन धर्म अपनाया. ऐसे में सवाल है कि आखिर कानूनी रुप से किस तरह से धर्म बदला जाता है.
इसके अलावा सवाल ये भी है कि जब भी कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म से हिंदू धर्म अपनाता है तो उसकी जाति को लेकर किस तरह से फैसला किया जाता है. ये किस तरह से तय होता है धर्म बदलने के बाद वो किस जाति में रहेंगे, क्योंकि कानून के हिसाब से किसी के जाति बदलने का अधिकार नहीं है.
कानूनी रुप से कैसे होता है धर्म चेंज?
वहीं अगर कानून के हिसाब से देखें तो भारत में धर्म परिवर्तन को लेकर कोई केंद्रीय कानून नहीं है, लेकिन अलग-अलग राज्यों के अपने कानून हैं. उत्तर प्रदेश ने भी कुछ साल पहले ही उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 पास किया था. इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों में भी धर्म परिवर्तन को लेकर कानून बने हुए हैं.
अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो नए कानून के हिसाब से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को दो महीने पर अपने जिले डीएम को जानकारी देनी होगी.उन्हें यह भी बताना होगा कि वे बिना किसी लालच, डर और बहकावे में आए वे धर्म परिवर्तन कर रहे हैं. इसके अलावा अन्य राज्यों में कलेक्टर को सूचना देकर धर्म परिवर्तन किया जाता है.
आम तौर पर कानूनी रुप से धर्म बदलने के लिए सबसे पहले एक एफिडेफिट बनवाना होता है, जिसमें सभी जानकारी लिखी जाती है. इसके बाद न्यूजपेपर में एड निकलवाना होता है और इसके बाद गैजेट नोटिफिकेशन निकलवाना होता है. एफिडेफिट वगैहरा के प्रोसेस के बाद सरकारी रिकॉर्ड के लिए गैजेट नोटिफिकेशन पब्लिश करवाना होता है. गैजेट एप्लीकेशन के बाद आपका धर्म कानूनी रुप से बदल जाता है, इसके लिए आप किसी वकील की मदद ले सकते हैं.
अब सवाल है कि धर्म बदलने के बाद ये कैसे डिसाइड होता है कि आप किस जाति में जाएंगे और किस आधार पर आपको आरक्षण का फायदा मिलेगा. तो समझते हैं कि आखिर धर्म परिवर्तन में जाति किस तरह से डिसाइड होती है?
हिंदू बन रहे हैं तो क्या होगा?
भारतीय संविधान के अनुसार, देश में हर कोई अपने मन के हिसाब से किसी भी धर्म को मानने के लिए, उनके नियमों का पालन करने के लिए स्वतंत्र है. वे अपने हिसाब से अपना धर्म भी बदल सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था, 'किसी व्यक्ति को हिंदू धर्म में वापसी पर अनुसूचित जाति का लाभ दिया जा सकता है, अगर उस जाति के लोग इसे अपना लेते हैं तो. ऐसे व्यक्ति को ये साबित करना होगा कि वे या उसके पूर्वज किसी अन्य धर्म को अपनाने से पहले उसी जाति के थे.'
आगे कोर्ट ने कहा, 'इस बात का बिल्कुल स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए कि वो उस जाति से संबंधित है, जिसे संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश,1950 में मान्यता प्राप्त है और उसका उसी धर्म में फिर से धर्मांतरण हुआ है, जिसे उसके माता-पिता या पिछली पीढ़ियां मानती थीं. साथ ही उसे ये साबित करना होगा कि वापसी के बाद उसे उस समुदाय ने अपना लिया है.' ऐसे अगर कोई व्यक्ति पहले से हिंदू रहा हो और वो किसी धर्म में जाने के बाद फिर से हिंदू बनना चाहता है तो उसे पुरानी है जाति का व्यक्ति होना पड़ेगा.
साथ ही अन्य केस में उसके ऑरिजन के हिसाब से जाति तय होगी और उस जाति के लोग उस व्यक्ति को अपनाते हैं, तो वो उसी के सरनेम से आगे जाना जाएगा. अगर कोई महिला शादी के लिए धर्म परिवर्तन करती हैं तो अपने पति की जाति के हिसाब से जाना जाएगा. साथ
क्या जाति बदल सकता है?
वैसे संविधान के हिसाब से कोई भी व्यक्ति अपने हिसाब से धर्म बदल सकता है, लेकिन जाति नहीं. दरअसल, जाति का संबंध उसके जन्म से होता है और जन्म से जाति होने की वजह से उसे जिंदगीभर एक ही जाति में रहना होता है. लेकिन, अगर कोई हिंदू धर्म के एससी कैटेगरी का व्यक्ति धर्म बदलता है तो उसे एससी कैटेगरी में आरक्षण के तहत मिलने वाले फायदे मिलने बंद हो जाएंगे. हिंदू और अब सिख, बौद्ध धर्म में ही एससी आरक्षण का फायदा उठाया जा सकता है.