International Literacy Day 2022: हर साल 08 सितंबर को दुनिया भर के लोग अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (International Literacy Day) मनाने के लिए एक साथ आते हैं और इंटरनेशनल लेवल पर साक्षर समुदाय बनाने की जरूरत को समझते हुए पढ़ने-लिखने के महत्व पर ध्यान खींचते हैं. साक्षरता एक ऐसी क्षमता जो लोगों को जोड़ती है और उन्हें सशक्त बनाती है, उन्हें दुनिया के साथ संचार करने और बातचीत करने की अनुमति देती है, जिसे संयुक्त राष्ट्र एक बुनियादी मानव अधिकार मानता है.
साक्षरता, किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है. एक उच्च साक्षरता दर यह बताने के लिए काफी है कि वह देश कितना काबिल है. एक साक्षर देश के लोग गहन सोच, किसी भी परिस्थिती का सामना करने वाले प्रतिभाशाली और उस देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाए रखने में काबिल होते हैं. आज दुनियाभर में साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है.
कैसे शुरू हुआ अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस?
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का विचार सबसे पहले 1965 में निरक्षरता को खत्म करने के लिए ईरान द्वारा आयोजित विश्व शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित किया गया था. सम्मेलन के अलगे साल, यूनेस्को ने पहल की और 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में स्थापित किया, जिसका मुख्य लक्ष्य "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को व्यक्तियों, समुदायों और समाजों के लिए साक्षरता के महत्व की याद दिलाने, और अधिक साक्षर समाजों की दिशा में गहन प्रयासों की जरूरत पर जोर देना है.' वर्ल्ड कम्युनिटी ने एक साल बाद पहले अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस में भाग लेकर निरक्षरता को मिटाने का लक्ष्य रखा. तभी से हर साल 08 सितंबर को इंटरनेशनल लिटरेसी डे मनाने की शुरुआत हुई थी.
International Literacy Day: अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व
1967 के बाद से, यूनेस्को के प्रयासों में सबसे आगे, दुनिया भर के लोग अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (ILD) पर एक साथ आए हैं ताकि इस बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके कि एक मानव अधिकार के रूप में साक्षरता कितनी महत्वपूर्ण है. यूनेस्को के अनुसार, हाल के वर्षों में दुनिया के लगातार बदलते संदर्भ का महत्व बढ़ा है, और इसने वैश्विक साक्षरता परियोजनाओं के विस्तार को धीमा कर दिया है. भले ही सुधार हुए हों, लेकिन दुनिया में अभी भी 771 मिलियन लोग ऐसे हैं जो पढ़ या लिख नहीं सकते हैं. इनमें अधिकतर महिलाएं हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, COVID-19 महामारी के कारण 24 मिलियन से अधिक छात्र कभी स्कूल नहीं लौटे, जिनमें से 11 मिलियन लड़कियां हैं. इसी परिस्थिति को बदलने के लिए साक्षरता दिवस मनाने का महत्व बढ़ जाता है.
कितना पढ़ा-लिखा है भारत
पिछले साल आई राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के सर्वेक्षण के अनुसार, देश की साक्षरता दर 77.7 प्रतिशत है. जिसमें ग्रामीण इलाकों की साक्षरता दर 73.5 प्रतिशत और शहरी इलाकों की साक्षरता दर 87.7 प्रतिशत है. नेशनल लेवल पर पुरुषों की साक्षरता दर 84.7 प्रतिशत जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 70.3 प्रतिशत है. भारत में साक्षरता के मामले में 96.2% साक्षरता दर के साथ केरल पहले पायदान पर रहा है जबकि 66.4 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ आंध्र प्रदेश सबसे नीचे स्थान पर है. भारत में नई शिक्षा नीति का लक्ष्य अगले दशक तक 100% साक्षरता हासिल करना है, देश को अभी भी अपनी आबादी को साक्षर बनाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है.
राज्यवार साक्षरता दर
NSO सर्वे में सात साल या उससे अधिक आयु के लोगों के बीच साक्षरता दर की राज्यवार रिपोर्ट इस प्रकार है-
राज्य - साक्षरता दर