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वो भारतीय जासूस... जिन्होंने पकड़े जाने पर भी नहीं खोला ये राज, दुश्मन ने काट दिए थे ब्रेस्ट!

Neera Arya Story: लेबनान में हुए पेजर अटैक के बाद दुनियाभर के जासूसों की चर्चा हो रही है. इसी बीच लोग सोशल मीडिया पर नीरा आर्या की कहानी भी शेयर कर रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि वो कौन थीं और उनकी क्या कहानी है.

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नीरा आर्या आजाद हिंद फौज की पहली महिला जासूस के रुप में फेमस हुई थीं.
नीरा आर्या आजाद हिंद फौज की पहली महिला जासूस के रुप में फेमस हुई थीं.

लेबनान में हुए पेजर अटैक के बाद मोसाद और जासूस एजेंट्स की काफी चर्चा हो रही है. इसी बीच, सोशल मीडिया पर भारतीय जासूस नीरा आर्या की कहानी भी सोशल मीडिया पर काफी शेयर हो रही है. भारत के कई यूजर नीरा आर्या की कहानी शेयर कर रहे हैं और बता रहे हैं कि भारत में भी कई ऐसे जासूस रहे हैं, जिनके बहादुरी के किस्से हमेशा याद रखे जाएंगे. ऐसा ही एक उदाहरण है नीरा आर्या की कहानी, जिन्हें भारत की पुरानी महिला जासूसों में से एक माना जाता है. 

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कौन थीं नीरा आर्या?

ये बात भारत को आजादी मिलने से पहले की है. उस वक्त नीरा आर्या आजाद हिंद फौज की पहली महिला जासूस के रुप में फेमस हुई थीं. उनका जन्म 5 मार्च 1902 को उत्तर प्रदेश के बागपत के खेकड़ा नगर में हुआ था. कम उम्र से ही नीरा राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होना चाहती थीं और वो आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजिमेंट में शामिल हो गईं. नीरा आर्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सेना में थीं और उनकी शादी श्रीकांत जय रंजन दास से हो गई थी.  

पति को ही मार डाला

बताया जाता है कि जब श्रीकांत को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सेना में होने के बारे में पता चला तो उन्होंने उनकी जासूसी करना शुरू कर दी. बता दें कि श्रीकांत भारत में सीआईडी इंस्पेक्ट थे, लेकिन नीरा और उनके विचार बिल्कुल अलग थे. एक बार जब नीरा बोस से मिलने गईं तो श्रीकांत ने उनका पीछा किया. उस वक्त श्रीकांत ने बोस को मारने की कोशिश तो नीरा ने अपने पति को ही मार डाला. इसके लिए उन्होंने अंडमान में काला पानी की सजा दी गई. 

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लेकिन, फिर भी वो झुकी नहीं. उस वक्त नीरा को लालच दिया गया था कि अगर वे नेताओं और खासकर नेताजी के बारे में जानकारी बताएगी तो उन्हें जमानत मिल जाएगी. लेकिन, जेल में उनसे जांच पड़ताल की जाती थी. उन्होंने अपनी कहानी उर्दू राइटर फरहान ताज के साथ शेयर की थी और फिर फरहान ताज ने एक किताब में इस कहानी का जिक्र किया था. 

किताब के अनुसार, उनसे जेल में नेताजी के बारे में पूछा जाता था. लेकिन, वो जवाब देती थीं कि उनकी प्लेन क्रैश में मौत हो चुकी है और ये जानकारी सार्वजनिक है. लेकिन नेताजी की मौत को लेकर उस वक्त कई थ्योरी थी. उन्हें टॉर्चर करके इस सवाल का जवाब पूछा जाता था. एक दिन उन्होंने गुस्से में कहा कि वो मेरे दिल में है. इस बात पर जेलर ने कहा कि अगर नेताजी उनके दिल में है तो निकाल लीजिए. इसके बाद एक जेलर ने मेरे कपड़े फाड़े और ब्रेस्ट रीपर से ब्रेस्ट काट दिया.

हालांकि, जेल में बंद नीरा आर्या को आजादी के बाद छोड़ दिया गया. कहा जाता है कि इसके बाद की जिंदगी उन्होंने फूल बेचकर गुजारी. उन्होंने 26 जुलाई 1998 को हैदराबाद में आखिरी सांस ली. 

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