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आखिर क्यों मोबाइल के जमाने में पेजर यूज कर रहे थे लेबनान के लोग? ये था टॉप सीक्रेट

Pager Attack: लेबनान में हुए पेजर अटैक ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. अटैक के वीडियो भी काफी भयावह हैं. लेकिन, सवाल ये है कि आखिर मोबाइल के दौर में लेबनान के लोग पेजर क्यों यूज कर रहे थे.

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पेजर अटैक के वीडियो काफी हैरान कर देने वाले हैं. (अटैक वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट)
पेजर अटैक के वीडियो काफी हैरान कर देने वाले हैं. (अटैक वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट)

लेबनान में हुए पेजर अटैक से पूरी दुनिया हैरान है. पेजर में एक साथ हुए विस्फोट के वीडियो भी काफी शेयर किए जा रहे हैं. पेजर अटैक की खबरों के बाद पेजर भी काफी चर्चा में है. भारत में भी पेजर कई साल पहले ही लोगों के हाथों से गायब हो चुका है और बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर मोबाइल के दौर पर लेबनान के लोग पेजर क्यों इस्तेमाल कर रहे थे. पेजर में ऐसा क्या है, जिस वजह से बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल कर रहे थे.

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कहां हुआ है अटैक?

पेजर अटैक लेबनान और सीरिया के कुछ इलाकों में हुआ है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस अटैक के जरिए लेबनान के चरमपंथी गुट हिजबुल्लाह के लोगों को निशाना बनाया गया था. इसमें हिजबुल्लाह से जुड़े लोगों पर ही अटैक किया गया है. ये अटैक लेबनान की राजधानी बेरुत के साउथ इलाकों में ज्यादा हुए हैं. इन इलाकों में Ali Al-Nahri और Riyaq इलाके शामिल हैं, जो सेंट्रल बेका वैली के एरिया हैं. बता दें कि ये वो जगहें जहां सबसे ज्यादा हिजबुल्लाह का ही प्रभाव है. ऐसे में बताया जा रहा है कि हिजबुल्लाह से जुड़े लोग ही पेजर का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे थे. 

क्या होता है पेजर? 

पेजर का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था, ये जानने से पहले आपको बताते हैं कि आखिर ये है क्या? पेजर मोबाइल फोन की तरह ही एक वायरलेस डिवाइस है, जिसे बीपर भी कहा जाता है. वैसे तो 1950 में न्यूयॉर्क से इसकी शुरुआत हुई थी, लेकिन 80 के दशक में पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल जाने लगा. भारत में भी काफी लोगों ने इसका इस्तेमाल किया था, लेकिन अब इसकी जगह मोबाइल ने ले ली है. इसमें एक छोटी सी स्क्रीन होती है और इसके जरिए वॉयस मैसेज भेजा जाता है. जैसे फोन करने के लिए नंबर होते हैं, वैसे ही पेजर में भी एक नंबर होता है.उस कोड के जरिए मैसेज भेजा जाता है. 

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क्यों हो रहा था पेजर का यूज?

हिजबुल्लाह के लोगों की ओर से पेजर का इस्तेमाल करने के पीछे कई वजह हो सकती है. सबसे खास बात तो ये है कि पेजर में जीपीएस सिस्टम काम नहीं करता है तो ऐसे में इसे ट्रैक करना मुश्किल है. इसके साथ ही इसका कोई आईपी एड्रेस नहीं होता है, जिससे इसे मोबाइल की तरह ट्रेस नहीं किया जा सकता. पेजर का नंबर बदला जा सकता है, इसलिए सुरक्षा कारणों से इसे काफी सिक्योर माना जाता है. ऐसे में माना जा रहा है कि हिजबुल्लाह से जुड़े लोग अपनी बातचीत को सिक्योर रखने के लिए इसका इस्तेमाल ज्यादा करते हैं. ये बातचीत का सिक्योर माध्यम है. 

इसके साथ ही इसे एक बार चार्ज करने के बाद लंबे वक्त तक चार्ज करने की जरुरत नहीं होती और दूर-दराज इलाकों में बिना बिजली के भी इससे काम चलाया जा सकता है. ये पहले भी कई रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिनमें कहा गया था कि इस संगठन ने अपने लड़ाकों को हैकिंग और हमलों के खतरे से बचने के लिए मोबाइल के स्थान पर पेजर का यूज करने के लिए कहा था. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में भी ये कहा गया है कि इजराइल पर हुए हमले के बाद से हिजबुल्लाह ने पेजर्स का इस्तेमाल बड़े स्तर पर शुरू किया था ताकि उन्हें ट्रैक ना किया जा सके. 
 

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