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18 सितंबर: ...तो कुछ और ही होता देश का नाम, आज की कहानी जब दुनिया के सामने आया भारत

18 सितंबर यूं तो हर दिन की तरह एक आम दिन है. फिर भी इस दिन से जुड़ी देश दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हैं, जिस वजह से आज की तारीख को याद किया जाता है. 18 सितंबर को भी कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो इतिहास में दर्ज हो गई. खासकर भारत के लिहाज से तो यह एक यादगार दिन है. क्योंकि इस दिन कुछ ऐसा हुआ था, जिस वजह इस देश को पूरी दुनिया में उसके नाम से जाना गया.

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आज ही भारत को मिला था इसका नाम
आज ही भारत को मिला था इसका नाम

आज 18 सितंबर है. यह कैलंडर का 262 वां दिन (लीप वर्ष) है. आज की कहानी भारत के संदर्भ में काफी दिलचस्प है. क्योंकि आज से करीब 75 साल पहले इसी दिन यह तय हुआ था कि आजादी के बाद पूरी दुनिया इस नए राष्ट्र को किस नाम से पुकारेगी. वैश्विक स्तर पर इस देश का क्या नाम हो इसको लेकर लंबी बहस चली थी. तब जाकर इसके दो नाम तय हुए थे - इंडिया दैट इज भारत.  

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आज हुआ था देश का नामाकरण
18 सितंबर 1949 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान सभा की बैठक हुई थी. इसमें देश के नामाकरण को लेकर लंबी बहस चली थी. इस बहस में आंबेडकर समिति ने भारत और इंडिया जैसे दो नाम सुझाए थे. इसके अलावा भी कई लोगों ने इस बहस में भारत के अलग-अलग नाम सुझाए थे. लेकिन सहमति इंडिया दैट इज भारत पर ही जाकर बनी. कई लोगों ने देश का नाम इंडिया रखने का विरोध भी किया था. जानते हैं देश के नामाकरण की पूरी कहानी. किसने क्या नाम सुझाए और किन-किन लोगों ने इंडिया नाम का विरोध किया था. 

इंडिया नाम का उस वक्त भी हुआ था विरोध
75 साल पहले ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के एचवी कामथ ने देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत या भारतवर्ष करने का संशोधन प्रस्ताव सदन में पेश किया था. इस प्रस्ताव के विरोध में 51 और पक्ष में 38 वोट पड़े थे. इसके बाद यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था. डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में 18 सितंबर 1949 की बहस ऐसा पहला मौका था, जब संविधान सभा में देश के नाम को लेकर चर्चा हुई थी. 

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देश के लिए कई नामों का आया था सुझाव
आंबेडकर ने देश के दो नाम का प्रस्ताव रखा- इंडिया और भारत. इस पर बहस के दौरान कामथ ने कहा था कि जन्म के बाद हर बच्चे का नामकरण होता है और जल्द ही इंडिया का भी जन्म होगा. देश के नाम को लेकर कई सुझाव आए थे. इनमें हिंदुस्तान, हिंद, भारतवर्ष, भारत और भारतभूमि प्रमुख रहे. 

भारत नाम की उत्पत्ति पर दिये गए थे कई तर्क
जब 18 सितंबर 1949 को संविधान सभा की बैठक हुई तो समिति के सदस्य एचवी कामथ पहले वक्ता थे. उन्होंने कहा -'यह भारतीय गणतंत्र का नामकरण समारोह है. अगर नामकरण समारोह की जरूरत नहीं होती तो हम इंडिया नाम ही रख सकते थे ,लेकिन अगर हम इस बिंदु पर पहुंच गए हैं कि नया नाम रखना ही चाहिए तो यकीनन सवाल यही उठेगा कि क्या नाम होना चाहिए. कामथ ने असल में भारत नाम की उत्पत्ति की तह तक जाना शुरू कर दिया था. 

सिर्फ भारत नाम पर भी कई लोगों ने जताई थी आपत्ति
उन्होंने तर्क दिया कि असल में भरत वैदिक युग में दुष्यंत और शकुंतला का बेटा था. इसके नाम पर भारत नाम पड़ा. कामथ के प्रस्ताव का आंबेडकर ने विरोध किया था. आंबेडकर ने इस प्रस्ताव के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर दिए थे. एक चरण पर फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता ने कहा था कि 'इंडिया नाम बहुत अजीब लग रहा है और आंबेडकर को यह स्वीकार करना चाहिए कि यह भी उन कई गलतियों में से एक है, जिन्हें संविधान का मसौदा तैयार करते हुए स्वीकार किया गया है.'
 
इंडिया नाम को बताया गया था संवैधानिक भूल
कामथ ने कहा था कि 'मुझे लगता है कि इंडिया यानी भारत संविधान में अनफिट है.' उन्होंने इसे संवैधानिक भूल करार दिया. कामथ के बाद बिहार से ब्रजेश्वर प्रसाद ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इंडिया या भारत को लेकर किसी तरह की दिक्कत है. उन्होंने प्रस्ताव रखा कि संविधान के अनुच्छेद-1 में कहा जाना चाहिए कि 'इंडिया, दैट इज भारत. इस बहस के दौरान कांग्रेस नेता कमलापति त्रिपाठी ने भी सुझाव दिया था. उन्होंने इस देश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए देश का नाम भारत, दैट इज इंडिया का प्रस्ताव रखा था.

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इंडिया, दैट इज भारत
संविधान सभा के एक अन्य सदस्य सेठ गोविंद दास ने चीनी यात्री ह्वेन सांग की किताब का हवाला देते हुए कहा था कि - उन्होंने भी अपनी किताब में हमारे देश का जिक्र भारत के तौर पर किया है. उन्होंने संविधान सभा के उन अन्य सदस्यों के इस विचार का विरोध किया कि देश का नाम भारत चुनना देश के पीछे चले जाने के समान है.संविधान सभा में हुई बहस के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि इंडिया, दैट इज भारत को संविधान के अनुच्छेद 1(1) में जोड़ा जाए.

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आज ही अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी CIA का हुआ था गठन
18 सितंबर 1947 को अमेरिकी के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत केंद्रीय गुप्तचर संस्था (सीआईए) की स्थापना की गई थी. एक स्वतंत्र सिविलियन इंटेलिजेंस एजेंसी के रूप में इसका गठन किया गया. इस एजेंसी के गठन के पीछे कई वजहें रही. इससे पहले सामरिक सेवा कार्यालय (ओएसएस) काम करता था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे खत्म कर दिया गया. इसके बाद सीआईए का गठन किया गया. सीआईए बनाने का एक मकसद पर्ल हार्बर की खुफिया विफलता को रोकना भी था. 

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प्रमुख घटनाएं व कार्यक्रम
18 सितंबर को विश्व बांस दिवस मनाया जाता है. इस दिन बांस के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाती है और इसके महत्व को पहचाना जाता है. 

18 सितंबर 1986 में मुंबई से पहली बार महिला चालकों ने जेट विमान उड़ाया. 

1502 में क्रिस्टोफ़र कोलंबस कोस्टारिका पहुंचे. यह उनकी यात्रा का आखिरी पड़ाव था. 
  
1967 में नागालैंड ने कामकाज के लिए अंग्रेज़ी भाषा को मान्यता दी. 
  
18 सितंबर 1919 को हॉलैंड में महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला था. 
 
18 सितंबर 1922 को हंगरी का राष्ट्रसंघ में प्रवेश हुआ था. 

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