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जब 45 साल बाद एक हुआ जर्मनी... पूरी तरह से गिर गई थी बर्लिन की दीवार

आज 3 अक्टूबर है. आज के दिन कुछ ऐसा हुआ था कि दो टुकड़ों में बंटा देश एक हो गया. दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी का विभाजन हो गया था. एक भाग सोवियत रूस के कब्जे में था, तो दूसरा मित्रराष्ट्र वाले गठबंधन के पास था. इस विभाजन के लिए बर्लिन की बीच ऐतिहासिक दीवार खड़ी कर दी गई थी. आज के दिन यानी 3 अक्टूबर 1990 को करीब 45 साल बाद जर्मनी फिर से एक हो गया था.

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बर्लिन की दीवार गिराने की कहानी
बर्लिन की दीवार गिराने की कहानी

3 अक्टूबर, 1990 को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी एक हो गए थे. यह पहला मौका था जब किसी विभाजित देश को जनांदोलन के चलते फिर से एक होने का मौका मिला. तीन अक्टूबर की सुबह जर्मनी के दोनों तरफ के लोगों के लिए एक नई सुबह थी. 2 अक्टूबर की रात से ही बर्लिन के ब्रांडनबुर्गर गेट के सामने लाखों की तादाद में लोग जमा थे और वह 45 वर्षों के बाद एकीकृत जर्मनी का सूरज उगते हुए देखना चाहते थे.

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9 नवंबर, 1989 को पूर्वी यूरोप में शीत युद्ध की शुरुआत हो गई थी. पूर्वी जर्मन कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता ने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी की सीमा पार करने के संबंध में कई नई नीतियों की घोषणा की. जब उनसे पूछा गया कि ये बदलाव कब होंगे, तो उन्होंने कहा जहां तक ​​मुझे पता है, यह अभी तुरंत से प्रभावी है, बिना किसी देरी के. इसके बाद पूर्वी बर्लिनवासी सीमा चौकियों पर उमड़ पड़े, कुछ लोग "टोर औफ" यानी गेट खोलो का नारा लगाने लगे.  कुछ ही घंटों में, गार्ड भीड़ को अंदर जाने देने लगे. जहां पश्चिमी बर्लिनवासियों ने उनका स्वागत फूलों और शैंपेन से किया.

जिसे जो मिला उसे से दीवार तोड़ने में लग गए...
कहा जाता है कि पूर्वी बर्लिन से 2 मिलियन से ज्यादा लोग पश्चिमी बर्लिन में जश्न मनाने आए थे. इसके बारे में एक पत्रकार ने लिखा था - यह दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी स्ट्रीट पार्टी थी. लोगों ने दीवार के टुकड़ों को तोड़ने के लिए हथौड़ों और कुदालों का इस्तेमाल किया.  उन्हें "दीवार के कठफोड़वे" के रूप में जाना जाने लगा. जबकि क्रेन और बुलडोज़र ने एक के बाद एक कई हिस्सों को गिरा दिया. जल्द ही दीवार पूरी तरह से गिर गई. 1945 के बाद पहली बार बर्लिन शहर के दोनों हिस्सों के लोग एक दूसरे से मिल पाए. बर्लिन की दीवार गिरने के एक साल बाद  पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी 3 अक्टूबर 1990 को एक हो गया.

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1945 के बाद दो भागों में विभाजित हो गई थी जर्मनी
1945 में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद, याल्टा और पॉट्सडैम में मित्र देशों की शांति सम्मेलनों ने जर्मनी के क्षेत्रों का भाग्य तय हुआ. उन्होंने पराजित राष्ट्र को चार "मित्र देशों के कब्जे वाले क्षेत्रों" में विभाजित किया. देश का पूर्वी भाग सोवियत संघ के पास चला गया , जबकि पश्चिमी भाग संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के पास चला गया.

बर्लिन पूरी तरह से देश के सोवियत हिस्से में स्थित था. यह पूर्वी और पश्चिमी कब्जे वाले क्षेत्रों के बीच की सीमा से लगभग 100 मील की दूरी पर था.  याल्टा और पॉट्सडैम समझौतों ने शहर को समान क्षेत्रों में विभाजित कर दिया. सोवियत ने पूर्वी आधे हिस्से पर कब्जा कर लिया, जबकि अन्य मित्र राष्ट्रों ने पश्चिमी हिस्से पर कब्जा कर लिया. बर्लिन पर यह चार-तरफा कब्ज़ा जून 1945 में शुरू हुआ.

1948 में बर्लिन की हुई थी नाकेबंदी
सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव के अनुसार साम्यवादी पूर्वी जर्मनी के भीतर एक विशिष्ट पूंजीवादी शहर, पश्चिम बर्लिन का अस्तित्व सोवियत के गले में हड्डी की तरह अटका हुआ था.  रूसियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस को शहर से हमेशा के लिए बाहर निकालने के लिए युद्धाभ्यास करना शुरू कर दिया.  1948 में पश्चिमी बर्लिन की सोवियत ने नाकाबंदी शुरू कर दी.  इसका उद्देश्य शहर से पश्चिमी सहयोगियों को भूखा मारना था. 

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पीछे हटने की बजाय, संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों ने शहर के अपने क्षेत्रों में हवाई मार्ग से रसद की आपूर्ति का प्रयास किया. जिसे बर्लिन एयरलिफ्ट के रूप में जाना जाता है.  एक वर्ष से अधिक समय तक चला और इसने पश्चिम बर्लिन में 2.3 मिलियन टन से अधिक भोजन, ईंधन और अन्य सामान पहुंचाया. सोवियत ने 1949 में नाकाबंदी खत्म कर दी. एक दशक तक शांति कायम रही. इसके बाद 1958 में तनाव फिर से बढ़ गया.

1958 के बाद शुरू हुआ बर्लिन के बीच दीवार खड़ी करने का काम
अगले तीन वर्षों तक सोवियत संघ - स्पेस रेस के दौरान पूर्व से पश्चिम की ओर शरणार्थियों का विस्थापन शुरू हो गया.  इनमें से कई युवा कुशल श्रमिक जैसे डॉक्टर, शिक्षक और इंजीनियर शामिल थे. जून 1961 में काफी लोगों का पलायन हुआ. अगले महीने, 30,000 लोग वहां से भाग गए. अगस्त के पहले 11 दिनों में, 16,000 लोग पूर्वी जर्मनों ने पश्चिमी बर्लिन की सीमा पार की और 12 अगस्त को लगभग 2,400 लोग उनके पीछे चले गए. एक दिन में पूर्वी जर्मनी छोड़ने वाले लोगों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या थी.

और ऐसे खड़ी हो गई बर्लिन की दीवार
उस रात, प्रधानमंत्री ख्रुश्चेव ने पूर्वी जर्मन सरकार को अपनी सीमा को हमेशा के लिए बंद करके प्रवासियों के प्रवाह को रोकने की अनुमति दे दी. सिर्फ दो हफ़्तों में, पूर्वी जर्मन सेना, पुलिस बल और स्वयंसेवी निर्माण कार्यकर्ताओं ने एक अस्थायी कांटेदार तार और कंक्रीट ब्लॉक की दीवार - बर्लिन की दीवार - पूरी कर दी थी. जिसने शहर के एक हिस्से को दूसरे हिस्से से अलग कर दिया था. 13 अगस्त, 1961 को जर्मन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (GDR, या पूर्वी जर्मनी) की कम्युनिस्ट सरकार ने पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन के बीच कंटीले तार और कंक्रीट से बनी “एंटीफासीस्टिशर शूट्ज़वॉल” या “एंटीफासीस्ट बुलवार्क” का निर्माण शुरू किया. यही बर्लिन की दीवार कही गई.

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दीवार बनने से पहले दोनों तरफ आ- जा सकते थे लोग
दीवार बनने से पहले, शहर के दोनों ओर के बर्लिनवासी काफी हद तक स्वतंत्र रूप से घूम सकते थे. वे काम करने, खरीदारी करने, थिएटर और फ़िल्म देखने के लिए पूर्व-पश्चिम सीमा पार करते थे. रेलगाड़ियां और सबवे लाइनें यात्रियों को आगे-पीछे ले जाती थीं. दीवार बनने के बाद, तीन चेकपॉइंट्स में से किसी एक के जरिए ही पूर्व से पश्चिम बर्लिन जाना असंभव हो गया. विशेष परिस्थितियों को छोड़कर, पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन के यात्रियों को सीमा पार करने की अनुमति शायद ही कभी दी जाती थी.बर्लिन की दीवार के निर्माण ने पूर्व से पश्चिम की ओर शरणार्थियों की बाढ़ को रोक दिया, और इसने बर्लिन पर संकट को कम कर दिया.

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दीवार बनने के तीन दशक बाद टूट गई.. 
कुल मिलाकर, बर्लिन की दीवार के ऊपर, नीचे या उसके आसपास जाने की कोशिश में कम से कम 171 लोग मारे गए. हालांकि, पूर्वी जर्मनी से भागना असंभव नहीं था. 1961 से लेकर 1989 में दीवार के ढहने तक, 5,000 से ज्यादा पूर्वी जर्मन, जिनमें लगभग 600 सीमा रक्षक शामिल थे. दीवार से सटी खिड़कियों से कूदकर, कांटेदार तार पर चढ़कर, गर्म हवा के गुब्बारों में उड़कर, सीवरों से रेंगकर और तेज रफ़्तार से दीवार के असुरक्षित हिस्सों से गाड़ी चलाकर सीमा पार करने में कामयाब रहे. यह जर्मनी के एक होने की कहानी है.

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प्रमुख घटनाएं
3 अक्टूबर, 1977 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. 
3 अक्टूबर, 1952 को ब्रिटेन ने परमाणु बम का सफल परीक्षण किया था. 
3 अक्टूबर, 1990 को जर्मनी का पुनः एकीकरण हुआ था. शीत युद्ध के चार दशक के विभाजन के बाद, सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने जर्मन चांसलर हेल्मुट कोहल के दबाव में नाटो के भीतर एक एकीकृत जर्मनी पर सहमति व्यक्त की थी. 
3 अक्टूबर, 1831 को मैसूर पर ब्रिटेन ने कब्ज़ा किया था. 
3 अक्टूबर, 1880 को पुणे में पहले मराठी संगीत नाटक 'संगीत शाकुन्ताल' का मंचन हुआ था. 
3 अक्टूबर, 1942 को जर्मनी ने पहली बार अपने नवीनतम रॉकेट V2 की जांच की थी.

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