ये तो आप जानते हैं कि पेड़ हमारे लिए काफी जरूरी है. लेकिन, कभी आपने ये सोचा है कि आखिर दुनिया में उतने पेड़ बचे हैं, जितने की हमें जरूरत है. दरअसल, दुनिया के कुछ देश हैं, जहां प्रति व्यक्ति एक पेड़ भी नहीं बचा है और भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि भारत में प्रति व्यक्ति कितने पेड़ हैं और दुनिया में भारत की हालत कैसी है? साथ ही जानते हैं कि दुनिया के किन देशों की हालत सबसे खराब और किन देशों की स्थिति सबसे सही है?
दुनिया में कितने पेड़ हैं?
अगर विश्व पटल पर देखें तो कुछ साल पहले हुई एक रिसर्च में सामने आया था कि हमारी पृथ्वी पर 3 ट्रिलियन पेड़ हैं, जिसमें जंगलों में लगे पेड़ भी शामिल हैं. अगर इस संख्या के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो दुनिया में हर व्यक्ति के हिसाब से 400 पेड़ हैं. लेकिन, कुछ देशों की हालत ज्यादा खराब है और कुछ देशों में पेड़ काफी ज्यादा है. जैसे अकेले साउथ अमेरिका के जंगलों में पृथ्वी के 15-20 फीसदी पेड़ हैं. वहीं, कनाडा और इसके आस-पास के क्षेत्र में काफी पौधे हैं.
सबसे ज्यादा कहां है पेड़?
दुनिया में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा पेड़ कनाडा में है. कनाडा और इसके आसपास ज्यादा ग्रीनरी होने की वजह से यहां के निवासियों के हिस्से में पर्याप्त मात्रा में पेड़ है. रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में प्रति व्यक्ति के हिसाब से 9000 पेड़ हैं, जो वहां की जलवायु परिस्थियों को कंट्रोल किए हुए हैं.
सबसे कम कहां है पेड़?
जहां कनाडा में हर व्यक्ति के हिस्से हजारों पौधे हैं, वहीं कुछ देशों में प्रति व्यक्ति एक पौधा भी नसीब नहीं है. जैसे यूएई, जॉर्डन जैसे देशों में तो प्रति व्यक्ति एक पेड़ से भी कम है. इसके अलावा मिडिल ईस्ट देशो में प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या काफी है. उज्बेकिस्तान में प्रति व्यक्ति 4, अफगानिस्तान में 12, इराक में 15 पेड़ बचे हैं.
पाकिस्तान के हालात भारत से खराब
वहीं पाकिस्तान में भी पेड़ की संख्या काफी कम है और रिपोर्ट के हिसाब से यहां हर व्यक्ति के हिसाब से सिर्फ 5 पौधे हैं.
भारत में क्या है स्थिति?
अगर भारत की बात करें तो भारत में प्रति व्यक्ति 28 पेड़ हैं. ऐसे में भारत में भी इसकी संख्या बढ़ाना काफी अहम है ताकि भारत की जलवायु परिस्थितां अनुकूल बनी रहें. इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत फोरेस्ट कवर 7,13,789 square kilometer है, जो पूरे देश का 21.71 फीसदी हिस्सा है. ये फोरेस्ट कवर का हिस्सा साल 2019 से 2021 तक 1540 स्क्वायर किलोमीटर बढ़ गया है.