पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच लंबे समय से हिंसा जारी है. तालिबान और पाकिस्तान दोनों की ओर से अटैक किए जा रहे हैं और कई लोग इस अघोषित जंग में मारे भी जा चुके हैं. इस जंग में पाकिस्तान के दो इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं और पाकिस्तान की आर्मी के लिए ये मुसीबत बने हैं. इन इलाकों में शामिल हैं, वजीरिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा. वैसे तो वजीरिस्तान आज से नहीं, करीब 15 सालों से पाकिस्तान आर्मी की हिट लिस्ट में है, जहां की प्राकृतिक बनावट ऐसी है कि यहां जाना काफी मुश्किल है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये जगह पाकिस्तान में क्यों खतरनाक है?
कैसा है वजीरिस्तान?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा का ये क्षेत्र काफी विवादित है. वज़ीरिस्तान का इलाक़ा दुर्गम है, जो पहाड़ियों से घिरा हुआ है. दूर-दूर तक पहाड़ियों से भरे इस क्षेत्र में बाहर के लोगों के लिए आना-जाना काफी मुश्किल है. कई सालों से यहां झड़प, बारूदी सुरंगों का फटना, गोली-बारी काफी आम है. ये क्षेत्र पाकिस्तान की सेना और टीटीपी के लोगों के लिए ये इलाका एक युद्धक्षेत्र जैसा है. ये इलाका पाक सेना और सरकार के नाक में दम करने वाले आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का गढ़ है.
ये वो ही इलाका है, जहां से फिर से अफगान-पाकिस्तान में जंग शुरू हुई है. दरअसल, विवाद तब गहराया जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने हाल ही में वजीरिस्तान के मकीन इलाके में पाकिस्तानी सेना के 30 जवानों को मार गिराया. इस जगह को तालिबान समेत कई आतंकी संगठनों के लिए नर्सरी कहा जाता है. पाकिस्तान की आर्मी के लिए यहां ऑपरेशन करना काफी नॉर्मल हो गया है. कहा जाता है कि पाकिस्तान में कहीं भी हमला हो, यहां बेतहाशा बमबारी हो जाती है. पाकिस्तान का वित्त मंत्रालय इस लड़ाई पर 30 बिलियन डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रु.) से ज्यादा खर्च कर चुका है.
पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी और दक्षिणी वजीरिस्तान में अफगान तालिबान और पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) को खदेड़ने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया हुआ है. इसके बाद से पाकिस्तान के कई सैनिक अपनी जान गवां चुके हैं. अफगान बॉर्डर पर होने से यहां अफगान तालिबान का काफी ज्यादा प्रभाव रहता है.
करीब 10 साल पहले ये आतंकियों का गढ़ माना जाता था. उत्तरी वजीरिस्तान आतंकवादियों का सबसे बड़ा ठिकाना था और यहां से कई संगठन आतंकवादी गतिविधियों का संचालन लंबे समय से करने में लगे हुए थे. इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने यहां लंबे वक्त तक ऑपरेशन किया और 447 आतंकवादी मारे गए थे और उनके छिपने के 88 ठिकानों को नष्ट कर दिया गया था. इसके साथ ही अमेरिका सेना ने भी यहां काम किया है और यहां की सीमा पर अमेरिकी सैनिक रहे हैं.
खैबर पख्तूनख्वा के क्या हैं हालात?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान का तनाव अब खैबर पख्तूनख्वा तक पहुंच गया है. अब टीटीपी के आतंकियों ने खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में कब्जा कर लिए गए हैं. दावा ये भी है कि टीटीपी ने मिलिट्री कैंप पर कब्जा कर लिया है. बताया जा रहा है कि 15 हजार तालिबानी लड़ाके अफगानिस्तान के काबुल, कांधार और हेरात से निकलकर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के मीर अली बॉर्डर की ओर बढ़ रहे हैं.
खैबर पख्तूनख्वा को सूबा-ए-सरहद के नाम से भी जाना जाता है जो अफगानिस्तान की सीमा पर स्थित है. यहां पर पश्तूनों की आबादी अधिक है जिन्हें स्थानीय रूप से पख्तून भी कहते हैं. यहां अफगानिस्तान से आए शरणार्थी भी बड़ी संख्या में रहते हैं.