भारतीय सेना चिकित्सा कोर के नेत्र रोग विशेषज्ञों की एक टीम ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बाईं आंख की सफल मोतियाबिंद सर्जरी की है. इस टीम का नेतृत्व चार राष्ट्रपति मेडल जीत चुके नेत्र रोग विशेषज्ञ लखनऊ के ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा ने किया. आइए जानते हैं कौन हैं डॉ संजय कुमार मिश्रा जिन्होंने बहुत कम उम्र में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया है.
इसी रविवार की सुबह ब्रिगेडियर संजय मिश्रा ने राष्ट्रपति मुर्मू का ऑपरेशन किया. इससे पहले बीते साल अगस्त और सितंबर में कोविड महामारी के दौर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और तत्कालीन फर्स्ट लेडी सविता कोविंद के कैटरेक्ट ऑपरेशन किए थे. रामनाथ कोविंद ने उनके काम से खुश होकर उन्हें सराहना प्रमाण पत्र दिया था.
ब्रिगेडियर संजय मिश्रा मूल रूप से उत्तरप्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे से ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट ब्रिगेडियर डॉ संजय मिश्रा ने अपनी सुपर स्पेशियलिटी की ट्रेनिंग डॉ आरपी सेंटर एम्स दिल्ली से ली है. ब्रिगेडियर मिश्रा ने मणिपुर में एक उग्रवाद अभियान में अपनी आंखों की रोशनी खो चुके सम्मानित पैराट्रूपर का इलाज करके उन्हें फिर से देखने के काबिल बना दिया.
कमांड अस्पताल लखनऊ में रेटिना सेंटर शुरू करने का श्रेय दिया जाता है, जो अब सात राज्यों से रिपोर्ट करने वाले रोगियों की क्षमता के साथ एक बेहतरीन केंद्र बन गया है. उनके मार्गदर्शन में नेत्र और रेडियोथेरेपी विभाग की टीम ने आंखों के कैंसर के इलाज के लिए BARC द्वारा स्वदेशी निर्मित रेडियोएक्टिव पट्टिका (plaque)का इस्तेमाल करके plaque ब्रेकीथेरेपी शुरू की. उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के तहत इस तरह के इलाज को काफी बढ़ावा दिया है और इसे बेहद किफायती बना दिया है. ब्रिगेडियर मिश्रा वर्तमान में प्रतिष्ठित सेना अस्पताल (आर एंड आर) दिल्ली के नेत्र विज्ञान विभाग का नेतृत्व कर रहे हैं.