scorecardresearch
 
Advertisement
एजुकेशन

बिहार: इंजीनियरिंग से सोशल इंजीनियरिंग तक, जानिए- नीतीश कुमार का अब तक का सफर

Nitish Kumar
  • 1/11

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए हुई मतगणना में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिला. कांटे के मुकाबले में शुरुआती रुझान में महागठबंधन आगे निकलता दिखा लेकिन दोपहर बार एनडीए ने बढ़त बना ली. देर रात तक तस्वीर साफ होने लगी और एनडीए ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. एनडीए के उम्मीदवारों ने 125 सीटों पर जीत दर्ज की है. साल 1977 में अपने राजनीतिक सफर को शुरू करने वाले नीतीश कुमार के बारे में आपको कई खास बातें नहीं पता होंगी, आइए यहां जानें. 

Nitish Kumar
  • 2/11

69 साल के नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना से 35 किलोमीटर दूर बख्त‍ियारपुर में हुआ था. नीतीश कुमार ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बी.टेक (इलेक्ट्र‍िकल) की पढ़ाई की. यह संस्थान अब NIT पटना के नाम से जाना जाता है. हाल ही में चुनाव कैंपेन के दौरान बिहार में जनता दल यूनाइटेड के नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस चुनाव को आखिरी चुनाव बताकर अपने प्रशंसकों सहित राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया था.

Nitish Kumar
  • 3/11

नीतीश के पिता राम लखन बाबू स्वतंत्रता सेनानी थे. उनकी पत्नी का नाम मंजू सिन्हा है जो कि एक स्कूल टीचर थीं. उनका 2007 में देहांत हो गया. नीतीश कुमार का एक बेटा है, जो BIT, Mesra से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट है. नीतीश कुमार को खाने में बटर मसाला सबसे ज्यादा पसंद है. 

Advertisement
Nitish Kumar
  • 4/11

लहरों के विपरीत चलना नीतीश का इतिहास रहा है. साल 1977 में जब जनता पार्टी के सभी दिग्गज मसलन राम विलास पासवान और लालू प्रसाद यादव लोकसभा चुनाव जीत रहे थे, उस वक्त नीतीश कुमार हरनौत से विधानसभा चुनाव तक नहीं जीत सके थे. 

Nitish Kumar
  • 5/11

सबसे हैरानी वाली बात ये है कि वो नालंदा जो कि कुर्मी बाहुल इलाका है, उसमें नहीं जीत पाए. हालांकि साल 1985 में इंदिरा गांधी के देहांत के बाद जहां सभी नेता सहानुभूति लहर में बह गए, वहीं नीतीश कुमार ने हरनौत से जीत हासिल की, जहां वो पहले साल 1977 और 1980 में हार चुके थे. एमएलए बनने के बाद नीतीश कुमार ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा. 

Nitish Kumar
  • 6/11

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की आधारशीला 70 के दशक में ही रख दी थी, जब वो बी.टेक की पढ़ाई कर रहे थे. पढ़ाई के दौरान ही नीतीश जय प्रकाश नरायण के आंदोलन से जुड़ गए. जय प्रकाश नरायण ही नीतीश के मार्गदर्शक थे. सॉफ्ट-स्पोकेन, तेज और मुखर होने के कारण नीतीश कुमार को जल्द ही लोगों द्वारा पसंद किया जाने लगा. 

Nitish Kumar
  • 7/11

हर भाषण पर तालियों की गड़गड़ाहट होने लगी. साल 1987 में उन्हें युवा लोक दल का अध्यक्ष बना दिया गया. बाद में साल 1989 में जनता दल के सचिव-जनरल के रूप में उनकी पदोन्नति हुई. 

Nitish Kumar
  • 8/11

1989 में नीतीश कुमार को लोकसभा चुनाव में बाढ़ से खड़ा होने को कहा गया. नीतीश कुमार मान गए और इस चुनाव में उन्होंने एक ऐसे शख्स को हराया, जिसे शेर-ए-बिहार के नाम से जाना जाता है. वो शख्स थे राम लखन सिंह यादव. 

Nitish Kumar
  • 9/11

वीपी सिंह ने इन सभी बातों पर गौर किया और उन्हें यूनियन मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर एग्रीकल्चर का पद दिया. हालांकि तभी पासवान और शरद यादव को कैबिनेट दिए गए. वहीं लालू ने मार्च 1990 के होने वाले विधानसभा चुनाव में टॉप पोस्ट रिजर्व कर ली. 

Advertisement
Nitish Kumar
  • 10/11

उन अच्छे दिनों में लालू और नीतीश दोनों साथ थे और ये दोस्ती साल 1994 तक सलामत रही. नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव को बड़े भाई कहा करते थे और आज भी नीतीश लालू को इसी नाम से बुलाते हैं. तब बिहार का बंटवारा नहीं हुआ था. बिहार के पास 324 विधानसभा सीटें थीं. नीतीश की पार्टी ने मुश्किल से 7 ही सीटों पर जीत दर्ज कर पाई. हालांकि साल 1995 के चुनाव में उन्होंने 167 सीटें जीतीं. 

Nitish Kumar
  • 11/11

बिहार में सुबह 8 बजे से मतों की गिनती शुरू हुई. आरजेडी ने शुरुआती बढ़त बनाई, लेकिन उसे बरकरार नहीं रख सकी. अंत में जब सभी 243 सीटों के परिणाम आए, पूर्ण बहुमत के साथ नीतीश सरकार की वापसी का रास्ता साफ हो गया. एनडीए ने 125 सीटों पर जीत हासिल किया है. हालांकि नीतीश की पार्टी जेडीयू 43 सीटें ही जीत सकी.

Advertisement
Advertisement