मंगलवार को बिहार विधानसभा में भारी हंगामे के बीच बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक पेश हुआ. इस दौरान नीतीश कुमार मुर्दाबाद के नारे भी लगे, जिसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया. इस दिन सदन में हुए हंगामे की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. पक्ष-विपक्ष दोनों एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. इस बीच चर्चा हो रही है कि विधानसभा के सख्त प्रोटोकॉल के बीच इस तरह की घटना कैसे हुई. आइए जानें विधानसभा के प्रोटोकॉल क्या होते हैं. विधानसभा की पूरी कार्यवाही किस तरह होती है.
बता दें कि अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान सभा क्षेत्रवार जनता से सीधे निर्वाचित सदस्यों यानी विधायकों का सदन है. विधानसभा के सदस्य पांच साल के लिए लोगों द्वारा चुने जाते हैं. विधान सभा का प्रमुख पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष) होता है, जिसे संविधान प्रक्रिया, नियमों और स्थापित संसदीय परंपराओं के तहत व्यापक अधिकार होते हैं. विधान सभा के परिसर में उनका प्राधिकार सर्वोच्च है.
सभा की व्यवस्था बनाए रखना पीठासीन अधिकारी यानी विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है. वो सभा में सदस्यों से नियमों का पालन सुनिश्चित कराते हैं. प्रोटोकॉल के तहत सभा के सभी सदस्य अध्यक्ष की बात सम्मान से सुनते हैं. इसके अलावा अध्यक्ष सभा के वाद-विवाद में भाग नहीं लेते. बल्कि विधान सभा की कार्यवाही के दौरान अपनी व्यवस्थाएं संभालना और निर्णय देने का काम करते हैं.
ऐसे बैठते हैं सदस्य व अधिकारी
हर सदस्य के सभा में बैठने का क्रम अध्यक्ष निर्धारित करते हैं. सदस्यों को सभा में अपने नियत स्थान से ही कार्यवाहियों में भाग लेना होता है. विधानसभा के सदस्य अध्यक्ष के सामने सदन में बैठते हैं जिसमें सत्ता पक्ष के सदस्य अध्यक्ष के दाहिनी ओर और प्रतिपक्ष के सदस्य बायीं ओर बैठते हैं. पक्ष की ओर से सत्ता पक्ष के प्रमुख की हैसियत से मुख्यमंत्री दाहिनी ओर की प्रथम सीट पर बैठते हैं और प्रतिपक्ष के मुख्य नेता बायीं ओर की प्रथम सीट पर बैठते हैं. गर्भगृह के मध्य में लगी मेज पर सचिवालय के अधिकारी और प्रतिवेदकगण बैठते हैं. ये प्रतिवेदक सदन की कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग करते हैं. सभा अध्यक्ष की बैठक स्थान के ठीक नीचे विधान सभा के प्रमुख सचिव बैठते हैं.
सभाकक्ष के प्रथम तल और भू-तल पर होते हैं ये दीर्घा
दर्शक दीर्घा: यदि कोई सामान्य नागरिक सदन की कार्यवाही देखना चाहता है, तो उसके आवेदन करने पर दर्शक के रूप में कार्यवाही देखने के लिए दर्शक दीर्घा में प्रवेश दिया जाता है.
अध्यक्षीय दीर्घा
भू-तल पर अध्यक्ष की कुर्सी के बायीं ओर अध्यक्षीय दीर्घा स्थित है, यहां सार्वजनिक जीवन के विशिष्ट व्यक्तियों को स्थान दिया जाता है.
अधिकारी दीर्घा
अध्यक्ष की कुर्सी के दायीं ओर भू-तल पर अधिकारी दीर्घा होती है, जहां शासन के वरिष्ठ अधिकारी बैठ सकते हैं.
पत्रकार दीर्घा
सदन की कार्यवाही जन सामान्य तक पहुंचाने के लिए समाचार पत्र, आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रतिनिधियों को बैठने के लिए स्थान पत्रकार दीर्घा में दिया जाता है.
सदन में किसी तरह के वाद-विवाद, चर्चा या सदन की कार्यवाही के दौरान सदस्यों को ऐसे शब्दों या वाक्यांशों का प्रयोग करने की मनाही होती है जो अशिष्ट अथवा असंसदीय हों. यदि कार्यवाही के दौरान कोई सदस्य इनका प्रयोग करते हैं तो अध्यक्ष स्वविवेक से सभा की कार्यवाही से विलोपित करने के निर्देश देते हैं. ऐसे शब्द या वाक्यांश जो विलोपित किये जाते हैं, उनका प्रकाशन समाचार पत्रों या टीवी के लिए भी निषेध रहता है और यदि ऐसे विलोपित अंश प्रकाशित होते हैं तो यह सभा की अवमानना की परिधि में आता है.
बिहार विधानसभा में 23 मार्च को जमकर हंगामा हुआ था. कई विधायकों को जबरन घसीटकर बाहर निकाला गया था. आरजेडी विधायक सुधाकर सिंह की तो पिटाई की गई, सीपीएम के सत्येंद्र यादव भी घायल हुए. किसी महिला विधायक का आरोप है कि कपड़े तक खींचे गए. ये नौबत तब आई, जब पुलिस बिल को पास होने से रोकने के लिए स्पीकर विजय कुमार को विपक्षी विधायकों ने उनके चैंबर में ही बंधक बना लिया था. बिहार स्पेशल आर्म्ड पुलिस बिल को विपक्ष ने काला कानून बताया तो मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा कि विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक को लेकर गलतफहमी फैलाई गई.