छपाई शुरू होते ही केंद्रीय बजट की उलटी गिनती शुरू हो जाती है. इस साल कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था मंदी की स्थिति में है और वित्तीय घाटा बढ़कर 10.76 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इसलिए इस साल का बजट हर वर्ग के लोगों के लिए खास महत्व रखेगा. जानिए बजट से जुड़ी हर डिटेल.
बता दें कि अब तक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021 के संबंध में उद्योग, सेवाओं और व्यापार जगत के महारथियों के साथ बजट पूर्व विचार-विमर्श किया है. वित्तमंत्री 1 फरवरी को सुबह 11 बजे लोकसभा में बजट पेश करेंगी.
हलवा समारोह से शुरू होती है प्रक्रिया
हर साल वित्त मंत्रालय 'हलवा समारोह' के आयोजन के साथ बजट के दस्तावेजों की प्रिंटिंग शुरू करता है. इसमें बड़ी कढ़ाही में तैयार किया जाता है और बजट की तैयारी में शामिल पूरे कर्मचारियों को परोसा जाता है. अधिकारियों को हलवा परोसने का महत्व पूरी परियोजना की गोपनीयता को भी चिह्नित करना है.
हलवा समारोह के तुरंत बाद, केंद्रीय बजट बनाने में शामिल होने वाले अधिकारियों को लोकसभा में बजट की प्रस्तुति तक अपने परिवारों से अलग नॉर्थ ब्लॉक में रहना पड़ता है. उन्हें फोन या कम्यूनिकेशन के किसी अन्य रूप जैसे ई-मेल या किसी भी माध्यम से परिवारों से संपर्क करने की अनुमति नहीं होती.
वित्त मंत्रालय में केवल बहुत वरिष्ठ अधिकारियों को घर जाने की अनुमति होती है. यहां तक कि मोबाइल जैमर फोन कॉल्स को ब्लॉक करने के लिए इंस्टॉल किए जाते हैं. कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के इंटरनेट कनेक्शन काट दिए जाते हैं. स्थापित किए गए लैंडलाइन के माध्यम से किए गए फोन कॉल पर कड़ी नजर रखी जाती है.
आर्थिक सर्वेक्षण
आर्थिक सर्वेक्षण (Economic survey) वित्त मंत्रालय का वार्षिक प्रमुख दस्तावेज है. केंद्रीय बजट से ठीक पहले, आर्थिक मामलों का विभाग, वित्त मंत्रालय हर साल संसद में सर्वेक्षण प्रस्तुत करता है. यह भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार किया जाता है. सर्वेक्षण पिछले वर्ष के दौरान देश के आर्थिक प्रदर्शन की एक विस्तृत रिपोर्ट है. यह मूल रूप से 12 महीने की अवधि में अर्थव्यवस्था की प्रगति का आकलन है.
वित्त मंत्री बजट सत्र के दौरान 1 फरवरी को बजट पेश करते हैं. हालांकि, कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण, यह संभावना है कि बजट सत्र सुरक्षा उपायों के साथ आयोजित किया जाएगा, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग के सख्त मानदंड शामिल हैं. सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण के लिए पहली बार संसद सदस्यों को तीन अलग-अलग स्थानों - राज्यसभा कक्ष, लोकसभा कक्ष और केंद्रीय कक्ष में बैठाया जा सकता है.